ज्योति मर्डर केस: वारदात वाली रात का सच
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बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में मंगलवार को एसआईटी के तीन सदस्यों की गवाही हुई, जिसमें दो डीएसपी व एक एएसआई शामिल हैं।
कोर्ट में एक डीएसपी का क्रॉस एग्जामिनेशन हुआ, जबकि अन्य के लिए अगली तारीख तय कर दी गई।
बता दें कि ज्योति हत्याकांड की सुनवाई लगभग फाइनल स्टेज पर है। इस केस में कुल 88 गवाह थे, जिनमें 85 के बयान हो चुके हैं। उसके बाद डिफेंस की गवाहियां होंगी।
टोल से गुजरी थी 7171 नंबर की 17 गाड़ियां
एसआईटी सदस्य डीएसपी कृष्णा हुड्डा ने अपने बयान में कहा कि चंडीमंदिर टोल प्लाजा से उन्होंने जानकारी जुटाई थी। इसमें वारदात में इस्तेमाल गाड़ी क्रूज (एचआर 49 बी 7171), टोयोटा एल्टीस (सीएच 01 एडी 3772), होंडा सिटी (एचआर 02 क्यू 0009), ऑल्टो (एचपी 12 सी 4505) व एक ट्रक (एचपी 12ए 7738) से संबंधित जानकारी मांगी गई थी कि 21 नवंबर 2012 को ये गाड़ियां टोल से निकलीं या नहीं?
डीएसपी हुड्डा ने बयान दिया कि टोल प्लाजा के अधिकारियों के मुताबिक, टोल पर वाहनों के आखिरी चार नंबर ही दर्ज किए जाते हैं। उस रात टोल से एक ही ट्रक निकला और उसका नंबर 7738 था, जिसका रिकार्ड लिया गया। पुलिस केस के मुताबिक ज्योति, रामकुमार व अन्य क्रूज कार में थे। टोल का रिकार्ड बताता है कि वारदात वाली रात टोल से 7171 नंबर वाले 17 वाहन गुजरे थे।
नर्सिंग होम का रिकॉर्ड लिया
इसके अलावा हुड्डा ने पीजी संचालक से की गई पूछताछ के बारे में भी कोर्ट में बयान दर्ज कराए।
वहीं, डीएसपी सुरेश कौशिक ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने तरुण भंडारी से पूछताछ की थी, जिसकी दुकान से हिमाचल के विधायक रामकुमार चौधरी ने फर्जी सिम लिए थे।
वहीं, एएसआई सुरेंद्र पाल ने कोर्ट में कहा कि जिस नर्सिंग होम में ज्योति का गर्भपात कराया गया था, वहां का रिकॉर्ड लिया गया था। कोरोला एल्टीस गाड़ी रिकवर करने के अलावा रामकुमार चौधरी के भाई हरभजन चौधरी से भी पूछताछ की गई थी।
ज्योति मर्डर केस: वारदात वाली रात का सच
आरोपी विधायक समेत तीन अन्य गिरफ्तार
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति प्रैग्नेंट थी और उसका अवैध तरीके से अबॉर्शन करवाया गया था। मोबाइल फोन डिटेल और टॉवर लोकेशन से खुलासा हुआ था कि मर्डर वाले दिन रामकुमार चौधरी भी हर उस जगह मौजूद थे।
इसके अलावा पुलिस के पास ज्योति की बहन की शादी में राम कुमार चौधरी की मौजूदगी वाला भी एक फोटो है। इस खुलासे के बाद से ही रामकुमार चौधरी फरार था। हत्या के 46 दिन बाद आरोपी विधायक राम कुमार चौधरी ने पंचकूला सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। इस मामले में गुरुवार को पंचकूला पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों धर्मपाल, गुरमीत और तिलकराज को गिरफ्तार किया है। पंचकूला की कोर्ट में ज्योति मर्डर केस में गवाहियों का दौर जारी है।
क्या है ज्योति मर्डर केस का मामला
चंडीगढ़ में बतौर पीजी रहने वाली होशियारपुर की ज्योति का शव बीते वर्ष 22 नवंबर 2012 को पंचकूला के सेक्टर-21 में सड़क पर मिला था। उसके चेहरे पर गाड़ी चढ़ाकर पहचान मिटाने की कोशिश भी की गई थी।
ज्योति का बाकी सामान तो था, लेकिन दोनों मोबाइल फोन नहीं मिले। इस मामले में युवती के पिता बूटी राम ने दून के विधायक राम कुमार चौधरी पर आरोप लगाए। इसके बाद विधायक राम कुमार और उनके साथी गुरमीत, धर्मपाल और परमजीत सिंह पर हत्या, धोखाधड़ी और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
ज्योति की बॉडी में नहीं मिला था शराब का अंश
पीजीआई रोहतक की डॉक्टर रंचित कोहली के भी कोर्ट में बयान दर्ज हुए, जिन्होंने ज्योति की बच्चेदानी की जांच रिपोर्ट बनाई थी। उन्होंने कोर्ट में कहा कि बच्चेदानी में कुछ भी असमान्य नहीं था।
फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री मधुबन से केमिकल एग्जामिनर डॉ. आरके मेहला ने कोर्ट में कहा कि ज्योति के शरीर में शराब नहीं पाई गई थी। अगर कोई 55 किलो वजन का इंसान 30 एमएल शराब पीता है, तो तीन घंटे में शरीर से शराब खत्म हो जाती है। हालांकि पुलिस केस के मुताबिक राम कुमार चौधरी ने गिरफ्तारी के बाद बयान दिया था कि ज्योति को मारने से पहले शराब पिलाई गई थी।
राम कुमार चौधरी के साइन का मिलान
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में मंगलवार को तीन एक्सपर्ट्स ने बयान दर्ज कराए। राइटिंग एक्सपर्ट ने कोर्ट में रामकुमार चौधरी के हस्ताक्षरों की पुष्टि की, जो ज्योति के गर्भपात के फार्म पर और मोबाइल की बॉडी पर किए गए थे।
इससे पुलिस के केस को जहां मजबूती मिली है, वहीं मुख्य आरोपी हिमाचल के दून क्षेत्र के विधायक राम कुमार चौधरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राइटिंग एक्सपर्ट डॉ. कांता मलिक ने हस्ताक्षर मिलान रिपोर्ट की पुष्टि की। राम कुमार चौधरी के साइन का मिलान ज्योति के गर्भपात कराने के लिए भरे गए सहमति फार्म पर हुए साइन से हुआ था। साथ ही ज्योति के उस मोबाइल की बॉडी पर भी चौधरी के साइन मैच हुए। ज्योति की हत्या के बाद इस मोबाइल को घग्गर नदी में फेंक दिया गया था और बाद में पुलिस ने इसे रिकवर कर लिया था।