बहुचर्चित गैंगरेप केस में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
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बहुचर्चित बादशाहपुर गैंगरेप केस की पीड़ित युवती को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोष में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। एडिशनल सेशन जज जतिंदर कौर की अदालत ने मामले में महिला को दोषी करार दिया गया है।
महिला के अलावा दो नौजवानों को दस-दस साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि बादशाहपुर चौकी के तत्कालीन इंचार्ज नसीब सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया। सरकारी वकील संजीव बत्तरा ने बताया कि 13 नवंबर 2012 को दिवाली वाली शाम को करीब साढ़े चार बजे पीड़िता अपनी पड़ोसी शिंदरपाल कौर के साथ गुग्गा माड़ी पर दीये जलाने गई थी।
रास्ते में साजिश के तहत शिंदर पाल कौर ने युवती को पास के गांव खेड़ी नगाइयां के रहने वाले बलविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह की कार में उठवा दिया। बाद में इन नौजवानों ने अपने दोस्त संदीप सिंह की मोटर के कोठे में युवती को नशे वाली कोई दवा पिलाकर बारी-बारी से कई बार रेप किया। इसके बाद आरोपी युवती को उसी रात गांव बादशाहपुर के गुरुद्वारा साहिब के पास कार में लाकर फेंक गए थे।
खुदकुशी से पहले सुसाइड नोट छोड़ा था
पहले तो पुलिस ने पर्चा दर्ज नहीं किया, बाद में मीडिया के दवाब में वारदात के कई दिनों बाद 27 नवंबर 2012 को पुलिस ने पर्चा तो दर्ज कर लिया। मगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की, जिसके चलते उनके हौसले बुलंद हो गए और वह पीड़िता को परेशान करने लगे।
इसी के चलते पीड़िता ने समाना के सरां पत्ती एरिया में रहने वाली अपनी मौसेरी बहन हरविंदर कौर के घर पर कोई जहरीली चीज खाकर 26 दिसंबर 2012 को आत्महत्या कर ली थी। पीड़िता ने सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें बलविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, शिंदर पाल कौर को उसकी आत्महत्या के लिए दोषी बताया था।
पुलिस ने 31 दिसंबर 2012 को शिंदर पाल कौर, बलविंदर, गुरप्रीत और चौकी इंचार्ज नसीब सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने और नसीब सिंह पर गलत आफिशियल रिकार्ड फ्रेम करने के आरोप में भी केस दर्ज किया था। बुधवार को शिंदर पाल कौर, बलविंदर व गुरप्रीत को सजा सुनाई गई।