जूतों ने पकड़वाया गैंग, शौक ने पहुंचाया जेल
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शौक बड़ी चीज है। इसी शौक ने हाइवे पर वाहन चालकों और उनके वाहनों को लूटने वाले गिरोह को पकड़वाया। हुआ यूं कि 18 जनवरी को विपिन निवासी गुड़गांव से इस गैंग ने गाड़ी लूटी। गाड़ी के साथ-साथ उसका एटीएम भी लूट लिया। इसके बाद लुटेरों ने विपिन को गाड़ी में ही बंधक बना लिया और टीडीआई मॉल, कुंडली की तरफ चले गए।
मॉल में से यह 4 जोड़ी नाइकी कंपनी के जूते खरीदकर लाए। 48 हजार का बिल बन गया था। बस यहीं गैंग मात खा गया। गाड़ी में बंधक बने पड़े विपिन ने देख लिया था कि लुटेरे नए जूते लेकर आए हैं। जब विपिन पुलिस के पास पहुंचा तो उसने जूतों के बारे में बताया।
इसके बाद पुलिस ने टीडीआई मॉल में जाकर नाइकी के शोरूम से वीडियो फुटेज निकलवाई। 4 जोड़ी एक साथ लेने वाले युवकों की पहचान जल्द ही हो गई। सीसीटीवी अच्छी क्वालिटी के होने से फोटो भी साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। यहीं से गैंग को पकड़ने की सबसे पहली सीढ़ी मिली।
इस पूरे गैंग का सरगना मोमीन उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का रहने वाला है। वह हत्या के एक केस में जेल में बंद था, लेकिन 6 महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद ही उसने कबीर, नितिन, दिलशाद को लेकर गैंग बनाया। पहले तो नोएडा, गाजियाबाद के क्षेत्र में वारदात को अंजाम देता था।
बाद में उसने बुआ के लड़के यामीन निवासी देवड़ू के साथ जोड़ी बनाई। यामीन ने मोमीन और उसके साथियों को जीटी रोड पर लूटने की राह दिखाई। बस फिर क्या था शुरू हो गया एक के बाद एक लूट का सिलसिला।
ठंड में बिना कपड़ों के छोड़ते थे
सोनीपत के क्षेत्र में पांच, पानीपत के क्षेत्र में 1 और गाजियाबाद के क्षेत्र में 12 लूट की वारदात को अंजाम दे चुके इस गैंग का सरगना ही सबसे पहले पकड़ में आया। टीडीआई मॉल से फोटो निकलवाने के बाद नोएडा पुलिस को रिकार्ड भेजा गया। नोएडा पुलिस को मोमीन का जेल रिकार्ड मिला।
इसी वजह से सबसे पहले मोमीन ही काबू में किया गया। मोमीन के काबू में आने के बाद कबीर, नितिन को भी गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं यामीन के शामिल होने की खबर लगते ही सीआईए सोनीपत ने यामीन को भी गांव देवडू से गिरफ्तार कर लिया।
इस गैंग की कुछ खास आदतें थीं। सोनीपत के क्षेत्र में जो भी वारदात की गई। उसमें मुरथल को मेन प्वाइंट माना गया। इससे 10 किमी बहालगढ़ की तरफ और 10 किमी गन्नौर की तरफ वारदात को अंजाम दिया जाता था। यह गैंग वाहन में सवार अकेले व्यक्ति को ही निशाना बनाता था।
जिसके साथ भी लूटपाट की जाती उसे सुनसान इलाके में बिना कपड़ों के छोड़ दिया जाता था। खास बात यह कि अपने शिकार के साथ ये मारपीट जरूर करते थे।
100 रुपये, जर्दा और यूपी की बोली
एक के बाद एक गाड़ी लूट की वारदात के बाद प्रारंभिक जांच में ही सामने आ गया था कि यह काम किसी एक गैंग का ही है। सभी पीड़ितों ने तीन बातें एक जैसी बताई थीं। इसमें पहली तो यूपी की बोली थी। दूसरी कॉमन चीज थी एक लुटेरे का जर्दा खाया जाना। तीसरी कॉमन चीज इसी लुटेरे द्वारा 100-200 रुपये देना। ये जर्दा खाने वाला और कोई नहीं गैंग का सरगना मोमीन था, जोकि वारदात के बाद सुनसान इलाके में छोड़े गए अपने शिकार को 100-200 रुपये देकर जाता था।
एक गैंग का खुलासा रह गया है बाकी
पुलिस सूत्रों की मानें तो इस गैंग के पकड़े जाने से 5 वारदातों का खुलासा हुआ है, लेकिन अभी भी दो वारदात ऐसी रह गई हैं। जिनका खुलासा होना बाकी है। इसीलिए कयास लगाया जा रहा है कि अभी एक गैंग और बाकी है, जो लूट की घटनाओं को अंजाम दे रहा है।
इंदीवर, प्रभारी, सीआईए स्टाफ ने बताया कि ये लोग गाड़ी में सवार होकर अपना शिकार ढूंढते थे। या तो कोई चालक गाड़ी रोककर खड़ा हो या फिर किसी पेट्रोल पंप के आसपास से कोई अकेला व्यक्ति गाड़ी चलाकर निकला हो तो उसे ओवरटेक कर वारदात करते थे।