आर्म्स ट्रेनिंग पर सिरसा डेरे को हाईकोर्ट से नोटिस
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हिसार के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के दौरान डेरा सच्चा सौदा में हथियार प्रशिक्षण की जानकारी पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका शुरू हो गई है।
जस्टिस टीपीएस मान व जस्टिस शेखर धवन की डिवीजन बेंच ने डेरा सच्चा सौदा व हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बेंच ने पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन को भी ऐसे डेरों पर 14 जनवरी तक जवाब देने को कहा है। रामपाल केस में एमिक्स क्यूरी एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने जस्टिस एम जियापाल व जस्टिस दर्शन सिंह की बेंच को डेरा सच्चा सौदा सिरसा के संबंध में 23 दिसंबर 2010 को आर्मी हेडक्वाटर से जारी एडवायजरी की जानकारी दी थी।
अवगत कराया था कि आर्मी हेड क्वाटर से आर्मी के अधीनस्थ युनिटों को कहा गया था कि डेरा सच्चा सौदा में पैरोकारों को पूर्व सैनिकों से हथियारों का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
युनिटों को सतर्कता बरतने व कार्रवाई को कहा गया था। जस्टिस जियापाल की बेंच ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले में जनहित याचिका चलाने की सिफारिश की थी और यह जनहित याचिका वीरवार को सुनवाई के लिए जस्टिस मान की डिवीजन बेंच के पास आई।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को दी नसीहत
जस्टिस मान की बेंच ने डेरा सच्चा सौदा व सरकारों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि डेरे धार्मिक ज्ञान देने के लिए होते हैं। इनका इस्तेमाल हथियार प्रशिक्षण व हथियार डंप करने के लिए सरकार के लिए घातक है।
रामपाल के गिरफ्तारी वारंट लागू कराने के लिए बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। सतलोक आश्रम से हथियारों का जखीरा मिला और आश्रम के हथियारबंद कमांडोज़ को काबू करने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बड़ी बात यह कि यह खुलासा खुद डीजीपी के जवाब में हुआ।
दूसरी ओर आर्मी इंटेलिजेंस ने डेरा सच्चा सौदा पर हथियार प्रशिक्षण की एडवायजरी भेजी। ऐसे में यदि बड़े अफसर डेरों में हालातों को भांप नहीं सके तो भविष्य में बहुत बड़ी घटना का सामना करना पड़ सकता है। यह भी कहा गया कि बड़े अधिकारियों को ऐसी स्थिति पर समय-समय पर नजर रखनी चाहिए।