सुप्रीम कोर्ट की फटकार, एक रात में केस चार
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प्रदेश के अन्य जिलों की तरह नाबालिगों की गुमशुदगी पर पठानकोट पुलिस ने भी चुप्पी साधे रखी। अब सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस एक ही रात में विभिन्न थानों में चार नाबालिगों के गायब होने की एफआईआर दर्ज कर जान छुड़ाने में जुट गई है। इन मामलों में पीड़ित एक साल तक पुलिस थानों के चक्कर काटते रहे लेकिन पुलिस हीलाहवाली करती रही।
पहला मामला
गांव खानपुर के जसपाल सिंह ने 22 मई 2013 को शिकायत दी थी कि उनका बेटा रोहित (16) 20 मई 2013 को मानसिक तनाव से ग्रस्त होने के घर से चला गया था लेकिन वापस नहीं लौटा।
उन्होंने ममून कैंट पुलिस के पास इसकी शिकायत भी दी लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। अब जाकर पुलिस थाना सदर में जसपाल सिंह की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
छह माह बाद जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया
दूसरा मामला: गांव बधानी निवासी मुन्नू राम मूल रूप से मध्यप्रदेश के पन्ना जिला के गांव रूपरा निवासी हैं। जीविका के लिए वे पठानकोट में मेहनत मजदूरी करते हैं।
उन्होंने शिकायत दी थी कि उनकी 17 साल की बेटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं की छात्रा थी। 18 मार्च 2014 को वह स्कूल पेपर देने गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी। उन्होंने 19 मार्च 2014 को ममून पुलिस से शिकायत की थी। अब छह माह बाद जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
तीसरा मामला: गांव घाड़ बगड़ौली के तिलक राज का 15 साल का बेटा लखविंद्र राज 16 जून 2014 को घर से छिंज मेला देखने गया था पर वापस नहीं लौटा। आठ जुलाई को उन्होंने थाने में इसकी शिकायत दी। अब जाकर धार कलां पुलिस ने छह माह बाद मामला दर्ज किया है। इस दौरान बेटे को ढूंढने के लिए परिवार इधर-उधर चक्कर काटता रहा लेकिन कुछ पता नहीं चला।
चौथा मामला: गांव अंतोर निवासी सुरिंद्र सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनका 15 साल का बेटा त्रिलोचन सिंह बोल नहीं सकता है। नौ जूून 2013 की रात को वह घर से अचानक लापता हो गया था। उसकेे गायब होने की शिकायत 13 जून को पुलिस को दी गई थी लेकिन पुलिस लापरवाही बरतती रही। अब जाकर कानवां पुलिस ने कोर्ट की सख्ती के बाद एफआईआर दर्ज कर ली है।