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किसान की हत्या में दोषी बहन, जीजा और दो भांजों को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी।
Updated Wed, 30 Mar 2016 09:21 AM IST
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कोर्ट
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भिवानी के चनाना गांव में किसान की हत्या मामले में अदालत ने उसकी बहन, जीजा व दो भांजों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। सभी पर आठ-आठ हजार रुपये जुर्माना भी किया गया। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र शर्मा की अदालत ने सुनाया। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा होगी।
मामला 21 अप्रैल 2013 का है। गांव चनाना में खेतों में काम कर रहे रिशाल सिंह, उसके भाई प्रताप सिंह और उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। हमले में गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह ने हिसार के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। पुलिस ने रिशाल सिंह के बेटे भाल सिंह के बयान पर सात नामजद और 20-25 अन्य के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास व अन्य विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। घायल भाल सिंह ने बताया था कि वे तीन भाई है और उसके चाचा प्रताप सिंह को दो लड़के है। उसके दादा ने पुस्तैनी जमीन पांचों भाईयों में बांट दी थी।
जमीन नहीं मिलने से उनकी बुआ नाराज है और कोर्ट में भी केस किया। 21 अप्रैल की शाम को आठ-10 गाड़ियों में लोग उनके खेत पहुंचे। जहां वह स्वयं, पिता, भाई व चाचा खेतीबाड़ी कर रहे थे। हमलावरों ने पहले हवाई फायर किए और फिर उन पर गोलियां चलाई। चाचा प्रताप के सिर में बुआ ने लोहे का नोजल पाइप मारा। उन्हें गंभीर चोट आई। जिसे उपचार के लिए सामान्य अस्पताल हिसार लेकर गए जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घायल के बयान पर उसकी बुआ गुड्डी देवी, फूफा रामनिवास, इनके लड़के सोमबीर, संजय और अन्य पर मामला दर्ज किया।
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पुलिस ने मामले में छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया वहीं मृतक की बहन गुड्डी देवी, जीजा रामनिवास, लड़के सोमबीर व संजय व कुछ अन्य के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास, आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हत्या मामले में चारों को उम्र कैद व पांच पांच हजार रुपये जुर्माना, हत्या प्रयास मामले में सात साल कैद व तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
इसी मामले में सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र शर्मा की अदालत ने आरोपी बहन, जीजा व भाजों को दोषी करार दिया। बाकी को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया।
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मामला 21 अप्रैल 2013 का है। गांव चनाना में खेतों में काम कर रहे रिशाल सिंह, उसके भाई प्रताप सिंह और उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। हमले में गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह ने हिसार के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। पुलिस ने रिशाल सिंह के बेटे भाल सिंह के बयान पर सात नामजद और 20-25 अन्य के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास व अन्य विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। घायल भाल सिंह ने बताया था कि वे तीन भाई है और उसके चाचा प्रताप सिंह को दो लड़के है। उसके दादा ने पुस्तैनी जमीन पांचों भाईयों में बांट दी थी।
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जमीन नहीं मिलने से उनकी बुआ नाराज है और कोर्ट में भी केस किया। 21 अप्रैल की शाम को आठ-10 गाड़ियों में लोग उनके खेत पहुंचे। जहां वह स्वयं, पिता, भाई व चाचा खेतीबाड़ी कर रहे थे। हमलावरों ने पहले हवाई फायर किए और फिर उन पर गोलियां चलाई। चाचा प्रताप के सिर में बुआ ने लोहे का नोजल पाइप मारा। उन्हें गंभीर चोट आई। जिसे उपचार के लिए सामान्य अस्पताल हिसार लेकर गए जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घायल के बयान पर उसकी बुआ गुड्डी देवी, फूफा रामनिवास, इनके लड़के सोमबीर, संजय और अन्य पर मामला दर्ज किया।
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पुलिस ने मामले में छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया वहीं मृतक की बहन गुड्डी देवी, जीजा रामनिवास, लड़के सोमबीर व संजय व कुछ अन्य के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास, आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हत्या मामले में चारों को उम्र कैद व पांच पांच हजार रुपये जुर्माना, हत्या प्रयास मामले में सात साल कैद व तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
इसी मामले में सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र शर्मा की अदालत ने आरोपी बहन, जीजा व भाजों को दोषी करार दिया। बाकी को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया।