एक और किसान ने जान दी, सुसाइड नोट में लिखा सच
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दीवारों पर लिखे सुसाइड नोट में 3 फाइनेंसरों पर तंग करने का आरोप लगा किसान फंदे पर लटकर दे दी जान। मामला हरियाणा के भिवानी जिले के दिनोद गांव का है। फंदा लगाने से पहले दीवारों पर तीनों फाइनेंसरों द्वारा तंग करने की बात भी लिखी।
सुसाइड नोट में मृतक ने तीनों फाइनेंसरों पर तंग करने का आरोप लगाया। मृतक के भाइयों ने बताया कि फाइनेंसर 10 रुपये सैकड़ा ब्याज वसूलता था और अक्सर गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने मृतक के भाई के बयान पर तीन फाइनेंसरों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया है।
बृहस्पतिवार सुबह दिनोद गांव में ग्रामीण राजबीर के खेत में बने कमरे में 38 वर्षीय मदन का शव फंदे से लटकते हुए मिला। मृतक युवक खेत मालिक के यहां चौथे हिस्से के तहत काम करता था। मदन ने सुसाइड से पहले दीवारों पर तीन फाइनेंसरों के नाम लिखे थे, जिन पर उसे तंग करने का आरोप लगाया।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक की जेब से भी सुसाइड नोट मिला। जिसमें तीनों फाइनेंसरों के नाम लिखकर उन्हें मौत का जिम्मेवार ठहराया गया था। पुलिस ने हुक से शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल लाई।
मृतक के भाइयों संजय, गोवर्धन, पवन ने बताया कि मदन चौथे हिस्से में बटाई का काम करता था। वह सुबह पांच बजे घर से खेत गया था और 11 बजे उन्हें सूचना मिली कि मदन का शव फंदे से लटक रहा है।
मृतक के भाइयों ने बताया कि तीनों फाइनेंसरों से मदन ने रुपये उधार ले रखे थे और काफी रुपया चुकाने के बाद भी उसे तंग किया जा रहा था। उससे 10 रुपये सैकड़ा वसूले जा रहे थे। उक्त फाइनेंसर घर आकर भी उसे धमकी देते और अपशब्द कहते। फाइनेंसरों के दबाव में ही उसने यह कदम उठाया। उसे एक छोटी लड़की व एक लड़का है।
'...जिम्मेवार ये हैं इन्हें भी फांसी होनी चाहिए'
मामले में सदर थाना से एसआई चंद्र सिंह ने बताया कि मदन ने कमरे में गार्डर से लगे हुक से रस्सी बांधकर फंदा लगाया। उसके पास सुसाइड नोट मिला है। जिसमें तीन युवकों सतपाल उर्फ सत्ता, बिजेंद्र उर्फ जाट व अमर सिंह को मौत का जिम्मेवार ठहराया है। तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है।
फंदे से लटके मिले किसान मदन ने दीवारों पर लिखा था कि भाइयों मैं बुरा नहीं था मगर इन लोगों ने ये दिन दिखा दिया। मेरी फांसी के जिम्मेवार ये हैं। इन्हें भी फांसी होनी चाहिए। सुसाइड नोट में भी तीनों नाम लिखकर लिखा है कि मेरी मौत के जिम्मेवार ये हैं।
मूल से डेढ़ गुणा दिए, फिर भी कर्ज नहीं उतरा
मृतक किसान की जेब से एक पर्ची भी मिली है। जिसमें बताया गया है कि उसने एक फाइनेंसर से आठ हजार रुपये लिये और साढे़ 15 हजार रुपये लौटा दिए। दूसरे फाइनेंसर से 10 हजार रुपये लिए और 13 हजार लौटा दिए। तीसरे फाइनेंसर से 20 हजार रुपये लिये और 27 हजार रुपये लौटा दिए। इसके बावजूद उसका कर्ज नहीं उतरा।
कागजों में भले ही दो रुपये सैकड़ा लिखा हो मगर वसूली 10 रुपये सैकड़ा के हिसाब से होती है। जिले में फाइनेंसरों का दबाव बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों दिनोद गेट चौकी क्षेत्र में एक युवक ने जहर निगल लिया था। उससे पहले टीआईटी चौकी क्षेत्र की एक महिला ने फाइनेंसर पर 10 रुपये सैकड़ा ब्याज वसूलने और मारपीट करने का आरोप लगाया था।