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चंडीगढ़ः कर्मियों की मिलीभगत से डीसी ऑफिस में चल रहा फर्जी स्टांप का धंधा, कई होंगे गिरफ्तार
Sat, 27 Jul 2019 10:38 AM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 27 Jul 2019 10:38 AM IST
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ डीसी ऑफिस में बैक डेट के स्टांप पेपर बेचने का गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा था। सूत्रों की मानें तो एस्टेट ऑफिस के कुछ कर्मचारी भी बैक डेट स्टांप पेपर बेचने के प्रकरण में संलिप्त हैं। फिलहाल पूरे मामले में विजिलेंस सेल ने जांच पूरी कर ली है। अगले हफ्ते विजिलेंस की ओर से इस घोटाले में 4 से 6 आरोपियों की गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इसको लेकर विजिलेंस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। गिरफ्तारी की भनक लगते ही वेंडरों के साथ ही डीसी ऑफिस में हड़कंप है।
बीते 2 अप्रैल को विजिलेंस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ वेंडर बैक डेट में स्टांप पेपर बेच रहे हैं। विजिलेंस ने छापेमारी करके वेंडर सतपाल गुप्ता को साल 2016 के 5 रुपये के स्टांप पेपर 100 रुपये में बेचते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इसके बाद से लगातार विजिलेंस पूरे मामले में खोजबीन करने में जुटी रही। विजिलेंस की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों की मानें तो पुराने स्टांप पेपर बेचने के मामले में एस्टेट ऑफिस के भी कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
जांच के बाद पाया गया कि लंबे समय से डीसी ऑफिस में कर्मचारियों की मिलीभगत से एक रैकेट बैक डेट के चोरी से स्टांप पेपर बेचने का काम कर रहा है। इसमें अभी तक 6 लोगों की संलिप्तता मिली है। विजिलेंस सेल के एक अफसर का कहना है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अगले हफ्ते मेें आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू कर दी जाएगी। आरोपियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
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बीते 2 अप्रैल को विजिलेंस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ वेंडर बैक डेट में स्टांप पेपर बेच रहे हैं। विजिलेंस ने छापेमारी करके वेंडर सतपाल गुप्ता को साल 2016 के 5 रुपये के स्टांप पेपर 100 रुपये में बेचते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इसके बाद से लगातार विजिलेंस पूरे मामले में खोजबीन करने में जुटी रही। विजिलेंस की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों की मानें तो पुराने स्टांप पेपर बेचने के मामले में एस्टेट ऑफिस के भी कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
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जांच के बाद पाया गया कि लंबे समय से डीसी ऑफिस में कर्मचारियों की मिलीभगत से एक रैकेट बैक डेट के चोरी से स्टांप पेपर बेचने का काम कर रहा है। इसमें अभी तक 6 लोगों की संलिप्तता मिली है। विजिलेंस सेल के एक अफसर का कहना है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अगले हफ्ते मेें आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू कर दी जाएगी। आरोपियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
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विजिलेंस ने आरोपी को ऐसे पकड़ा
डीसी ऑफिस में पुराने स्टांप पेपर की बिक्री की जानकारी मिलने पर विजिलेंस की टीम ने 2 अप्रैल को चुपके से डीसी आफिस में ट्रैप लगाया। बताया जाता है कि विजिलेंस ने वेंडर पर शिकंजा कसने के लिए एक फर्जी ग्राहक बनाकर भेजा। यह ग्राहक वेंडर सतपाल गुप्ता के पास गया और उससे 2016 में बैक डेट एंट्री कर पेपर देने के लिए कहा।
वेंडर बैक डेट पर स्टांप पेपर देने को राजी हो गया। पुराने स्टांप पेपर के रेट भी तय हो गए। इसी दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने स्टांप पेपर वेंडर को न सिर्फ पुराने स्टांप पेपर बल्कि तीन साल पहले की बैक एंट्री लिखते हुए दबोच लिया। इसके बाद से ही स्टेट ऑफिस के कर्मचारियों की मिलीभगत की चर्चा आम हो गई थी।
वेंडर बैक डेट पर स्टांप पेपर देने को राजी हो गया। पुराने स्टांप पेपर के रेट भी तय हो गए। इसी दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने स्टांप पेपर वेंडर को न सिर्फ पुराने स्टांप पेपर बल्कि तीन साल पहले की बैक एंट्री लिखते हुए दबोच लिया। इसके बाद से ही स्टेट ऑफिस के कर्मचारियों की मिलीभगत की चर्चा आम हो गई थी।