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डीएसपी खुदकुशी कांड: मजिस्ट्रेट जांच में तत्कालीन थाना प्रभारी पर कार्रवाई की सिफारिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट (पंजाब)
Updated Wed, 11 Jul 2018 09:45 AM IST
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पांच माह पहले 29 जनवरी को जैतो के यूनिवर्सिटी कॉलेज में विद्यार्थियों के रोष प्रदर्शन के दौरान डीएसपी बलजिंदर सिंह संधू के अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुदकुशी करने के मामले में हुई मजिस्ट्रेट जांच में तत्कालीन थाना जैतो प्रभारी इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह को कसूरवार पाया गया है।
इस प्रकरण में न सिर्फ डीएसपी की मौत हो गई थी बल्कि उसी गोली से उनके पीछे खड़े सीआईए स्टाफ जैतो के कांस्टेबल लाल सिंह की भी मौत हो गई थी। इस मामले में जिला मजिस्ट्रेट कम डीसी के आदेश पर मजिस्ट्रेटी जांच करने वाले सहायक कमिशनर (शिकायतें) जगदीश सिंह जौहल ने अपनी रिपोर्ट में इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
मामला 12 जनवरी 2018 से शुरू हुआ था। उस दिन थाना जैतो प्रभारी इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह ने बस स्टैंड से यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक छात्रा औा दो विद्यार्थियों को जबरन उठाया और थाने में लेकर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान उनके साथ कोई महिला कांस्टेबल भी नहीं थी। साथ ही थाने में उनकी पुरुष कांस्टेबलों से पिटाई करवाई गई और थर्ड डिग्री टार्चर किया गया।
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इस मामले में विद्यार्थियों की शिकायत के बाद जांच डीएसपी जैतो बलजिंदर सिंह संधू के पहुंची। डीएसपी ने थाना प्रभारी गुरमीत सिंह को कई बार बुलाकर मामला निपटाने का आग्रह किया लेकिन थाना प्रभारी अपनी जिद पर अड़ा रहा। मामले ने तूल पकड़ा तो विद्यार्थियों के पक्ष में किसान, मजदूर और विद्यार्थी संगठन आगे आ गए और उन्होंने 29 जनवरी को यूनिवर्सिटी कॉलेज में रोष धरना देने का ऐलान किया। इस धरने के दौरान ही डीएसपी ने खुद को गोली मार ली। गोली उनकी कनपटी को चीरती हुई पीछे खड़े सीआईए स्टाफ जैतो के कांस्टेबल लाल सिंह को लगी थी।
एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने जिला मजिस्ट्रेट कम डीसी को पत्र लिखकर कहा था कि इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस रुल्स 16.38 के तहत विभागीय कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट जांच करवाने का आग्रह किया था। जांच अधिकारी सहायक कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह ने कानूनी नियमों की अवहेलना की है और विवाद में उनके सूझबूझ न दिखाए जाने के कारण ही दो लोगों की जान चली गई। एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने कहा कि रिपोर्ट मिल चुकी है और उसके आधार पर इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इस प्रकरण में न सिर्फ डीएसपी की मौत हो गई थी बल्कि उसी गोली से उनके पीछे खड़े सीआईए स्टाफ जैतो के कांस्टेबल लाल सिंह की भी मौत हो गई थी। इस मामले में जिला मजिस्ट्रेट कम डीसी के आदेश पर मजिस्ट्रेटी जांच करने वाले सहायक कमिशनर (शिकायतें) जगदीश सिंह जौहल ने अपनी रिपोर्ट में इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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मामला 12 जनवरी 2018 से शुरू हुआ था। उस दिन थाना जैतो प्रभारी इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह ने बस स्टैंड से यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक छात्रा औा दो विद्यार्थियों को जबरन उठाया और थाने में लेकर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान उनके साथ कोई महिला कांस्टेबल भी नहीं थी। साथ ही थाने में उनकी पुरुष कांस्टेबलों से पिटाई करवाई गई और थर्ड डिग्री टार्चर किया गया।
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इस मामले में विद्यार्थियों की शिकायत के बाद जांच डीएसपी जैतो बलजिंदर सिंह संधू के पहुंची। डीएसपी ने थाना प्रभारी गुरमीत सिंह को कई बार बुलाकर मामला निपटाने का आग्रह किया लेकिन थाना प्रभारी अपनी जिद पर अड़ा रहा। मामले ने तूल पकड़ा तो विद्यार्थियों के पक्ष में किसान, मजदूर और विद्यार्थी संगठन आगे आ गए और उन्होंने 29 जनवरी को यूनिवर्सिटी कॉलेज में रोष धरना देने का ऐलान किया। इस धरने के दौरान ही डीएसपी ने खुद को गोली मार ली। गोली उनकी कनपटी को चीरती हुई पीछे खड़े सीआईए स्टाफ जैतो के कांस्टेबल लाल सिंह को लगी थी।
एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने जिला मजिस्ट्रेट कम डीसी को पत्र लिखकर कहा था कि इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस रुल्स 16.38 के तहत विभागीय कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट जांच करवाने का आग्रह किया था। जांच अधिकारी सहायक कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह ने कानूनी नियमों की अवहेलना की है और विवाद में उनके सूझबूझ न दिखाए जाने के कारण ही दो लोगों की जान चली गई। एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने कहा कि रिपोर्ट मिल चुकी है और उसके आधार पर इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।