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दिल्ली की रेप पीड़िता से पुलिस का 'शर्मनाक' बर्ताव'

Fri, 16 Jan 2015 05:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा) Updated Fri, 16 Jan 2015 05:40 PM IST
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disgusting behaviour with rape victim of delhi

दिल्ली की रहने वाली युवती से पिछले साल सिरसा के होटल में रेप हुआ। आरोप, इनेलो के वरिष्ठ नेता पर लगे। 5 महीने बाद अपने केस का स्टेटस जानने पहुंची रेप पीड़िता के साथ पुलिस का बर्ताव काफी 'शर्मनाक' रहा।

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सादी पोशाक में 50 से अधिक पुलिस कर्मचारी अदालत में पेश होने आई रेप पीड़िता पर सुबह से लेकर शाम तक पैनी नजर रखे हुए थे। राजधानी दिल्ली की रहने वाली उक्त युवती के साथ सितंबर 2014 को सिरसा के एक होटल में दुराचार हुआ था। दुष्कर्म की शिकार पीड़िता अदालत में अपने केस का स्टेट्स जानने के लिए पेश हुई।
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पुलिस प्रशासन को शंका थी कि युवती अदालत परिसर में सुसाइड कर सकती है इसलिए सुबह से लेकर शाम तक अदालत के बाहर तैनात पुलिस वालों की सांस अटकी रही क्योंकि युवती पिछली पेशी पर आत्महत्या करने की चेतावनी देकर गई थी। जानकारी के अनुसार दिल्ली के लाजपत नगर क्षेत्र निवासी 20 वर्षीय युवती ने दिल्ली अमर कॉलोनी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी कि सिरसा निवासी मनीष सिंगला नामक युवक ने उसके साथ सिरसा के एक होटल में बलात्कार किया है।
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पुलिस ने रेप पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके इसकी कॉपी सिरसा शहर थाने में भेजी गई थी। आठ अक्टूबर को सिटी थाना पुलिस ने आरोपी मनीष सिंगला के खिलाफ बलात्कार सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया। जांच अधिकारी कमलेश रानी ने पीड़िता के बयान दर्ज किए जिसमें पीड़िता ने बताया कि 13 सितंबर 2014 को मनीष सिंगला धोखे से सिरसा ले आया और डबवाली रोड स्थित एक होटल में ले गया। जहां कमरे में नशीला पदार्थ देकर उसके साथ बलात्कार किया।

हैरान करने वाली पुलिस की कार्यप्रणाली

disgusting behaviour with rape victim of delhi

शहर थाना पुलिस ने आठ अक्टूबर को आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करके मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। अदालत ने पीड़िता की गुहार पर 24 दिसंबर को पुलिस को फटकार लगाते हुए 15 जनवरी को केस का स्टेटस बताने को कहा था।

सुबह अदालत खुलते ही पीड़िता दिल्ली की कड़कड़डुमा कोर्ट के अधिवक्ता सुधीर ओझा के साथ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बलवंत सिंह की अदालत में पेश हुई। अधिवक्ता सुधीर ओझा ने न्यायाधीश से पीड़िता के केस का स्टेट्स बताने का आग्रह किया।

शहर थाना प्रभारी सुरेशपाल ने केस की स्टेट्स फाइल अदालत को सौंपी। लंच के बाद न्यायाधीश ने पीड़िता से कहा कि ‘पुलिस बोल रही है कि इस केस में कोई सच्चाई नहीं है। पीड़िता ने सीजेएम से कहा कि ‘सारे सबूत लेकर अदालत में खड़ी हूं मैं,  ये देखिए जज साहब। न्यायाधीश ने कहा कि ‘सबूत नहीं देख सकता पावर नहीं है मुझे, अदालत के पास केस आने पर ही सबूत देखे जाते हैं’।

पीड़िता अधिवक्ता सुधीर ओझा ने बताया कि हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली देखकर हैरानी हो होती है। एफआईआर दर्ज करने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं। पांच माह बाद भी रेप जैसे जघन्य अपराध में पुलिस चालान पेश नहीं करती।

सिरसा पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप

disgusting behaviour with rape victim of delhi

अदालत के आदेश पर केस का स्टेटस बताया जाता है। पीड़िता के अधिवक्ता को स्टेटस रिपोर्ट भी नहीं दिखाया जाता। दिल्ली में इतने माह में बलात्कार केस का अदालतें फैसला सुना देती हैं। इस मामले में भी सिरसा पुलिस ने आरोपी को बचाने के लिए कानून प्रक्रिया को ताक पर रख दिया। चूंकि आरोपी एक इनेलो नेता का रिश्तेदार है इसलिए उसे बचाने के लिए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने जी जान लगा दी है।

दुराचार की शिकार पीड़िता का कहना है कि दिल्ली से सिरसा न्याय की आस लगाए आते-आते हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। घरवालों ने भी कह दिया है कि उसे घर में नहीं रहने देंगे, ऐसे में न न्याय मिला और घर का सहारा भी छूट गया। अब तो न इधर की रही और न उधर की। उसने आरोप लगाया कि पुलिस प्रभावी आरोपी के हाथों बिक गई है।

पुलिस को अपनी रिपोर्ट को देखते हुए शंका थी कि कही पीड़िता अदालत परिसर में आत्महत्या का प्रयास न कर डाले। इसी चक्कर में सादी पोशाक में करीब दस महिला पुलिसकर्मी, इतने ही पुरुष पुलिसकर्मी, सीआईडी के पांच व हथियारों से लैस पुलिस वाले सीजेएम कोर्ट के बाहर तैनात थे।

पीड़िता जहां भी जाती महिला पुलिस उसके आसपास खड़ी हो जाती। पीड़िता को ये अहसास तक नहीं हुआ कि जिन महिलाओं को वह आम महिला समझकर अपना दुख सुना रही है वे वास्तव में महिला पुलिसकर्मी हैं। पुलिस वाले बोल रहे थे कि अगर इसने यहां सुसाइड का प्रयास भी किया तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। किसी तरह युवती वापस वहां से चली जाए।

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