रोहतक रेप के 'दरिदों' का होगा डीएनए टेस्ट
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नेपाली युवती के साथ दरिंदगी की हद तक हैवानियत करने वाले आठों आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इससे पहले, गद्दी खेड़ी गांव से गिरफ्तार 8 युवकों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 8 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार युवकों को सजा दिलाने के लिए सबूत जुटाना जांच टीम के लिए चुनौती बन गया है।
अब एसआईटी साइंटिफिक सबूत जुटाने पर ज्यादा जोर दे रही है। बता दें कि आरोपी दरिंदों ने खेत में बने कोठड़े में अपने गुनाह के सबूत मिटा दिए। सामूहिक दुराचार के 8 दिन तक आरोपी दरिंदगी के निशान मिटाने में लगे रहे। पुलिस दोबारा एफएसएल एक्सपर्ट की सहायता से मौके का मुआयना करेगी, ताकि खून के धब्बे से लेकर बाल जैसा बारिक से बारिक सबूत ढूंढा जा सके।
जिला बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी करने से मना कर दिया। पेशी के दौरान कोर्ट में कोई भी वकील आरोपियों की तरफ से पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने आरोपियों की पैरवी के लिए लीगल एड सर्विस से वकील मांगा है।
निर्भया की सांस बंद होने तक डटा रहा राजेश
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि सामूहिक दुष्कर्म के बाद लड़की को शहर की तरफ रवाना कर दिया, लेकिन तभी ध्यान आया कि अगर लड़की ने किसी को बता दिया तो सब फंस जाएंगे। इसलिए मारपीट के बाद नेपाली युवती की गला दबाकर हत्या कर दी।
वहीं पर ड्रेन नंबर 8 के पास उसके शरीर में सीमेंट की शीट के टुकड़े व कंडोम का पैक तक डाल दिया। लड़की की सांस बंद होने तक राजेश उर्फ घूचड़ू वहां डटा रहा। पुलिस अब राजेश से अलग से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
सोमबीर की मौत मामले में सर्च वारंट
जांच टीम ने कांड के 9वें आरोपी सोमबीर के बारे में अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस से पता चला कि सोमबीर ने अपनी बहन के घर आकर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। सोमबीर की मौत कैसे हुई, मामले में उसकी क्या भूमिका रही। इसकी जांच के लिए सर्च वारंट जारी किया जाए। अदालत ने जांच टीम की याचिका स्वीकार कर ली है।
खून के धब्बे व बाल तलाशने के लिए मुआयना करेगी पुलिस
अदालत में डीएसपी एवं एसआईटी प्रभारी अमित भाटिया ने बताया कि आरोपियों ने सामूहिक दुराचार के बाद खेत में बने उस कोठड़े से सबूत मिटा दिए। अब एफएसएल एक्सपर्ट टीम गहराई से मौके का मुआयना करेगी।
पुलिस को उम्मीद है कि कोठड़े में कहीं न कही पीड़िता या आरोपियों के बाल या खून के धब्बे मिल जाएं। ये सबूत आरोपियों को सजा दिलाने में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
केस को पहले हल्के में लिया पुलिस ने
एक्सपर्ट की मानें तो पुलिस ने मामले को शुरू में हल्के में लिया। लड़की की बहन की शिकायत पर सबसे पहले केस में बंधक बनाने की धारा 346 लगाई गई, जबकि इस तरह के केस में अपहरण यानि 364 या 365 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए था।
यहीं कारण है कि रेलवे रोड के एक व्यापारी का बेटा चाहे अपनी मर्जी से चला गया, लेकिन इस केस में पुलिस ने कोई लापरवाही बरते बिना अपहरण का केस दर्ज किया है।