चंडीगढ़ रेप: मुआवजे के लिए दायर की अर्जी
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पांच कांस्टेबलों द्वारा दुराचार करने के मामले में पीड़ित ने जिला अदालत में विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत मुआवजे की मांग को लेकर अर्जी दायर की है। इस अर्जी पर सीजेएम अनुभव शर्मा की अदालत में बयान दर्ज हुए हैं।
अदालत उसकी इस मांग पर अपनी रिपोर्ट 22 अगस्त को स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के सदस्य सचिव को सौंप सकती है। पीड़ित की तरफ से लीगल एड की वकील मंजीत कौर सिद्धू केस की पैरवी कर रहीं हैं।
स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी, यूटी के सदस्य सचिव न्यायधीश लालचंद ने बताया कि कानूनी संशोधन व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों पर सभी राज्यों में विक्टिम कंपनसेशन स्कीम शुरु की गई है। संशोधित कानूनी प्रक्रिया में सी.आर.पी.सी. 357(ए) के तहत यह स्कीम चलाई गई है।
स्कीम के तहत पीड़ित को मुआवजा
इसमें एसिड अटैक वाली पीड़िता-पीड़ित, दुष्कर्म पीड़ित, वारदात में शारीरिक अंग खो देने वाले पीड़ित, पीड़ित या वारदात में मौत का शिकार हुए पीड़ित/पीड़िता इस स्कीम के तहत लाभ ले सकते हैं।
विभिन्न श्रेणियों में मुआवजा 2 लाख से 5 लाख रुपये तक है। यह मुआवजा जिला स्तरीय स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के जरिए अपील कर मांगा जा सकता है। पीड़ित/पीड़िता या उनकी मौत के मामले में उनके परिजनों के अदालत में बयान दर्ज होते हैं। अदालत बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट आगे अथारिटी को भेजती है।
अथारिटी घटनाक्रम को जांचने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट जिला उपायुक्त को सौंप देती है। इसके बाद जिला उपायुक्त मुआवजा राशि वितरित करता है। चंडीगढ़ में यह मुआवजा चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से दिया जाता है।
ध्यान रहे कि चंडीगढ़ पुलिस के पांच कांस्टेबल अक्षय, सुनील, जगतार हिम्मत और अनिल पर 19 दिसम्बर 2013 को सेक्टर 11 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बाद में पुलिस विभाग ने सभी जवानों को नौकरी से बर्खास्त किया था।
पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ का आरोप
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं क्लास की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने अक्षय सुनील, अनिल, जगतार और हिम्मत के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस विभाग ने पांचों कांस्टेबलों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। जांच के लिए पुलिस विभाग ने डीएसपी कमला मीणा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी। एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। अदालत ने अक्षय और सुनील पर पद का दुरुपयोग करने, अपहरण, दुराचार (पार्ट-2), धमकाने, साजिश रचने, पोस्को एक्ट की धारा-6 के तहत आरोप तय किए। वहीं, जगतार, हिम्मत और अनिल पर छेड़छाड़, गलत नियम से रोकने, आपराधिक साजिश रचने और पोस्को एक्ट की धारा-12 के तहत आरोप तय किए थे।