केबल ऑपरेटर की मौत के पीछे का खौफनाक सच
होटल होली डे इन में 28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के सामने जहर निगलने वाले केबल ऑपरेटर जसविंदर सिंह जस्सी ने सोमवार सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
गुस्साए परिवार ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर चाटीविंड गेट के पास शव रखकर सड़क पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे एडीसीपी केतन पाटिल से 24 घंटे में आरोपी सरबजीत सिंह राजू और प्रितपाल सिंह लाली की गिरफ्तारी का आश्वासन मिलने पर शाम को जस्सी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जान पर भारी पड़ा एफिडेविट
जस्सी को जब लगा कि उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो उसने 17 सितंबर 2010 में राजू और उसके साथियों के हक में सीबीआई कोर्ट में गवाही दे दी। इसके बाद भी उसे धमकियां आनी बंद न हुई और उसकी पूरी केबल पर कब्जा कर लिया गया। उसकी आर्थिक हालत खराब होनी शुरू हो गई।
जब उसे लगा कि आरोपियों के हक में गवाही देकर भी उसे मानसिक परेशानी ही मिल रही तो उसने दोबारा से सीबीआई की कोर्ट में 17 सितंबर 2014 को एफिडेविट देकर कहा है कि उसने दबाव में आकर गवाही दी थी। इसलिए दोबारा से उसकी गवाही कराई जाए। इस एफिडेविट के बाद जस्सी को पहले से ज्यादा परेशान करना शुरू कर दिया गया।
सीबीआई की नहीं सुनी तो जस्सी की कौन सुनता
फास्ट वे केबल के इंचार्ज सरबजीत सिंह राजू के खिलाफ सीबीआई की कोर्ट में 2003 से सेक्स रैकेट के तहत केस चल रहा है। इस केस में जस्सी ने 2003 में राजू और बाकी आरोपियों के खिलाफ गवाही दी थी। इसके बाद से जस्सी को जान से मारने की धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।
जस्सी ने 2004 में सीबीआई के समक्ष यह बात रखी। सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर ने तत्कालीन एसएसपी को चिट्ठी लिखकर पुख्ता कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बाद भी धमकी मिलना जारी रहा। उसने 2009 में फिर से अदालत को परेशानी बताई।
कोर्ट ने जस्सी की गवाही बाद में करवाने के निर्देश देते हुए आरोपियों को चेतावनी भी दी। वहीं सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर ने दोबारा एसएसपी को चिट्ठी लिख जस्सी को सुरक्षा मुहैया करवाने को कहा लेकिन सुरक्षा नहीं दी गई।