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शराबी पिता से परेशान बेटे ने दी खौफनाक सजा

Wed, 04 Feb 2015 05:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब) Updated Wed, 04 Feb 2015 05:30 PM IST
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brutal murder of father

थाना बख्शीवाला के अधीन पड़ते गांव किशनगढ़ के रहने वाले पूर्व सरपंच का कातिल उसका बेटा ही निकला। बेटे ने ही अपने पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से गोलियां मार कर हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। दरअसल बेटा अपने पिता के शराब पीने और मांस खाने की आदत से तंग था। पुलिस ने आरोपी बेटे को काबू कर लिया है।

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एसएसपी गुरमीत सिंह चौहान ने मंगलवार को पुलिस लाइन में बाद दोपहर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बताया कि 29 जनवरी को गांव किशनगढ़ में पूर्व सरपंच नाहर सिंह (56) की लाश उसके कमरे से खून से लथपथ मिली थी। छाती में दो और सिर में दाईं तरफ दो गोलियां लगी थीं।
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पास ही नाहर सिंह की लाइसेंसी रिवाल्वर पड़ी थी। कमरे के दरवाजे को भी अंदर से कुंडी लगी थी। पूर्व सरपंच के लड़के चमकौर सिंह ने बयान दिया था कि उसका पिता मानसिक तौर पर परेशान था, इसलिए अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से आत्महत्या कर ली है।

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पिता को गोलियां मारीं

brutal murder of father

बख्शीवाला थाना इंचार्ज भुपिंदर सिंह को सुसाइड केस में चार गोलियां लगना कुछ अजीब लगा। छानबीन के दौरान सामने आया कि बेटे चमकौर सिंह ने पिता नाहर सिंह की हत्या की है। बेटे चमकौर सिंह को काबू करके जब सख्ती से पूछताछ की गई। इस पर उसने बताया कि 28 जनवरी 2015 को उसका पिता रोजाना की तरह शराब और मांस खाकर आया। जब उसने एतराज किया तो गालियां देने लगा।

आरोपी बेटे ने बताया कि उसका 11 साल का लड़का बीमार रहता था और किसी संत ने कहा था कि घर में कोई शराब न पिए और न ही मांस खाए। फिर भी उसका पिता नहीं सुनता था। जैसे ही पिता अपने कमरे में जाने लगा, तो उसने पीछे से पकड़कर उनके दाएं हाथ में पकड़े गए रिवाल्वर पर अपना हाथ रखकर ट्रिगर में उंगली डालकर पिता की छाती की तरफ दो फायर कर दिए।

फर्श पर गिरने के बाद दो और फायर दाईं तरफ सिर में कर दिए। इससे पूर्व सरपंच की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद चमकौर सिंह ने रिवाल्वर अपने पिता की लाश के पास ही रख दिया और इसे सुसाइड केस दिखाने के लिए कमरे के दरवाजे की चिटकनी में अंदर की साइड से बोरी का धागा फंसाकर आप खुद कमरे से बाहर आ गया और धागा खींच कर दरवाजे की चिटकनी बंद कर दी।

फिर वह बिना किसी से बात किए चुपचाप अपने कमरे में सो गया। सुबह परिवार वालों को बुलाकर शोर मचा दिया कि पिता नाहर सिंह दरवाजा नहीं खोल रहे हैं।

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