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20 लाख रिश्वत केस में पकड़े गए चारों पुलिसकर्मी छोड़े

Fri, 06 Feb 2015 05:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Fri, 06 Feb 2015 05:18 PM IST
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bribe case: clean chit to accused CIA team

बीस लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ी सीआईए टीम को पुलिस ‘ऊपरी दबाव’ के चलते बचाने के प्रयास में दिख रही है। यमुनानगर जिले के जगाधरी थाने के सीआईए-टू के एएसआई अशोक के साथ आए एक एएसआई, दो ईएएसआई व एक सिपाही को विजिलेंस ने बृहस्पतिवार को यह कहते हुए छोड़ दिया किया ये बेकसूर हैं और अशोक के कहने पर हिसार आए थे।

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रिश्वत मामले की इन्हें भनक तक नहीं थी। पुलिस ने इन चारों को राउंड अप किया था, जबकि अशोक व बिचौलिए राजेश की गिरफ्तारी दर्शाई थी। वे दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
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सूत्रों का दावा है कि रिश्वत की इतनी बड़ी डिलिंग करना अशोक के बस की बात नहीं है। पूरे मामले में यमुनानगर पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों के संलिप्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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इसी के चलते विजिलेंस के उच्चाधिकारी इस मामले को अधिक तूल नहीं दे रहे। इतना ही नहीं रिश्वत के आरोप में पकडे़ गए एएसआई अशोक के सहकर्मियों को भी उच्चाधिकारियों के दबाव में ही छोड़े जाने की बात सामने आ रही है।

स्मगलिंग रोके पुलिस
विजिलेंस टीम के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि उच्चाधिकारियों का पूरा दबाव है। अगर स्मगलिंग का गोरखधंधा करने वालों ने पुलिस को मोहरा बनाया है तो पहले तो पुलिस इस दो नंबर के धंधे को रोके न कि रिश्वत मांगे।

क्यों नहीं करवाया मामला दर्ज
विजिलेंस सूत्रों का कहना है कि सीआईए टीम द्वारा इस पूरे प्रकरण में रिश्वत लेने का मामला साफ झलक रहा है। 26 जनवरी को भोपाल में अगर शराब ठेकेदार की गाड़ी लूटी गई थी तो उन्होंने वहां मामला दर्ज क्यों नहीं करवाया? एक सवाल यह भी है कि लूट की वारदात हकीकत है तो यमुनानगर पुलिस का बिना एफआईआर दर्ज किए किसी से रुपये मांगने का क्या मतलब है?

एसपी बोले, सहकर्मी थे अनजान

bribe case: clean chit to accused CIA team

एसपी (विजिलेंस) शिवचरण अत्री ने कहा कि एक एएसआई, दो ईएएसआई तथा एक सिपाही को राउंड अप किया था। चारों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। वे एएसआई अशोक के कहने पर हिसार आए थे। अशोक ने इनसे कहा था कि किसी केस के सिलसिले में हिसार चलना है।

 कानूनी पक्ष
सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल का कहना है कि मुख्य अभियुक्त के साथ पकड़े गए लोग इस अपराध में शामिल हैं या नहीं सही जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकता है। अगर उनकी नॉलेज में यह बात थी कि मुख्य अभियुक्त 20 लाख रुपये रिश्वत लेने हिसार जा रहा था तो वे भी इस मामले में आरोपी होंगे। प्रोपर इन्वेस्टिगेशन से इस बात का खुलासा हो सकता है।

सवाल मांगते जवाब

-सीआईए टीम को क्या लालच था कि बिना केस दर्ज किए शराब ठेकेदारों के आपसी मामले में हस्तक्षेप किया जाए?
- पुलिस आखिर शराब की स्मगलिंग करने वालों की क्यों कर रही थी पैरवी?
- एएसआई के साथ आई उसकी टीम को क्या पूरे मामले में कहीं नहीं पता चला कि वे क्या करने हिसार जा रहे हैं?
- क्या अशोक ने अपने सहकर्मियों के साथ कोई बात नहीं की या उनके सामने रुपये नहीं लिए?
- क्या पकड़े गए लोग आम आदमी होते तो क्या पुलिस मुख्य अभियुक्त का साथ देने वालों को बख्श देती?

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