फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   ASI and head constable acquitted from bribe case

रिश्वत मामले में एएसआई और हेड कांस्टेबल बरी

Tue, 01 Mar 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 01 Mar 2016 12:26 AM IST
विज्ञापन
ASI and head constable acquitted from bribe case

तीन हजार रुपये रिश्वत मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए यूटी पुलिस के एसएसआई देशराज सिंह और हेड कांस्टेबल वजिंदर सिंह को सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

विज्ञापन


देशराज और वजिंदर को 24 फरवरी 2012 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
विज्ञापन


बलटाना निवासी रूपेश टांगरी मामले में शिकायतकर्ता थे। उनके खिलाफ सेक्टर-29बी के जयदीप सिंह ने 2.20 लाख रुपये के चेक बाउंस का केस दर्ज करवाया था। इसमें टांगरी भगोड़ा था। उनकी गिरफ्तार की ड्यूटी एएसआई देशराज और वजिंदर सिंह पर थी। सीबीआई को दी गई शिकायत में कहा था कि देशराज ने दिसंबर 2011 में टांगरी को फोन कर उनके भगोड़ा होने की जानकारी दी थी। आरोप के अनुसार देशराज ने उन्हें आपराधिक मामले में राहत देने की एवज में चार हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


रूपेश के अनुसार 18 फरवरी 2012 को उन्हें दोबारा एएसआई का फोन आया और कहा कि वह उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगा और वह कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। इसकी एवज में उसने चार हजार रुपये मांगे। इसके बाद 24 फरवरी को शिकायतकर्ता ने कोर्ट में पेश होकर जमानत ले ली। इसके बाद सीबीआई को रिश्वत की शिकायत दी। इसके बाद जांच एजेंसी के कहने पर शिकायतकर्ता ने देशराज को फोन किया और रिश्वत देने की बात की। इसे रिकार्ड करने के बाद सीबीआई ने संबंधित केस दर्ज किया।

सीबीआई टीम के कहने पर रूपेश ने एएसआई को रिश्वत के पैसे देने के लिए कॉल किया। इस पर देशराज ने उसे कलाग्राम के पास बुलाया। जांच एजेंसी की टीम ने वहां ट्रैप लगाया, लेकिन काफी देर तक एएसआई वहां नहीं आया। इसके बाद उसे फोन किया तो उसका नंबर नहीं मिला।

उसे दूसरे नंबर पर कॉल किया गया तो उसने एक दूसरे नंबर पर फोन किया उसे हेड कांस्टेबल विजेंदर ने उठाया और रूपेश को सेक्टर-17 बस स्टैंड के पास बुलाया। वहां से उसे शिव मंदिर के पास बुलाया गया। इस दौरान वजिंदर को देशराज का फोन आया और वजिंदर ने देशराज की बात शिकायतकर्ता से करवाई।

इस पर देशराज ने रिश्वत की रकम वजिंदर को देने की बात कही। वजिंदर के पैसे लेते ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद देशराज की गिरफ्तारी के लिए उनके सेक्टर-46 स्थित घर पर छापेमारी की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद देशराज ने गिरफ्तारी से रोक के लिए कोर्ट ने अग्रिम जमानत ले ली थी।

बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज के अनुसार ट्रायल के दौरान रूपेश टांगरी के खिलाफ चेक बाउंस का केस दर्ज करवाने वाले जयदीप राठौर ने कोर्ट में कहा था कि रूपेश कोर्ट के आदेश संबंधी समन लेने के लिए कभी घर पर नहीं होता था। रूपेश ने गलत पता दर्ज कराया हुआ था।


इस पर कोर्ट ने उसे भगोड़ा करार दे दिया था। देशराज ने जयदीप को बताया था कि कोर्ट प्रक्रिया से बचने के लिए टांगरी उन्हें बार-बार फोन कर रिश्वत देना चाहता है। इस पर उन्होंने जयदीप को बताया कि जब रूपेश उन्हें रिश्वत की रकम देने आएगा तो वह उसे गिरफ्तार कर लेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed