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कुर्क जमीन लाखों रुपयों में बेचा, कांग्रेसी विधायक का भतीजा गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, (मुल्लांपुर)मोहाली
Updated Fri, 10 Mar 2017 12:31 AM IST
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गिरफ्तार
- फोटो : Demo Pic
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मुल्लांपुर में फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की कुर्क जमीन बेचने के आरोप में पुलिस ने राणा प्रभदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी कपूरथला के कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह का भतीजा बताया जा रहा है। जबकि इस मामले के अन्य दो आरोपी उसके पिता राणा महिंदर जीत सिंह व भाई राणा हरदीप सिंह फरार बताए जा रहे हैं।
आरोपी को पुलिस ने खरड़ अदालत में पेश किया। वहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अदालत में जब आरोपी को पेश किया गया तो उसके वकील ने दलील दी की उक्त धोखाधड़ी से कुछ लेना देना नहीं है। जबकि दूसरे पक्ष का कहना था कि गिरफ्तार आरोपी भी कंपनी का प्रमुख था। उसकी अगुवाई में डील हुई थी। इसके अलावा उन्होंने कुछ दस्तावेज पेश किए। जिसके बाद अदालत ने उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
ऐसे हुए थे ठगी का शिकार
जानकारी के मुताबिक, गांव मिल्ख निवासी गुरचरण सिंह ने बताया कि साल 2014 में उन्होंनेे जमीन लेने का फैसला किया था। इस दौरान दो प्रॉपर्टी डीलर जो उनके गांव के आसपास के रहने वाले हैं, उन्होंने गुरचरण सिंह की मुलाकात महिंदर जीत सिंह राणा व हरदीप सिंह राणा से करवाई। इस दौरान उन्होंने बताया माजरी तहसील के पास गांव फतेहपुर में उनकी जमीन बिकाऊ है, जो 61 कनाल छह मरले हैं। इस दौरान उन्होंने जमीन की फर्द दिखाई। साथ ही कहा कि जमीन पर करीब 25 लाख का लोन है। उसे चुकाना होगा। जमीन की कुल कीमत करीब पांच करोड़ थी। प्रति एकड़ जमीन का रेट 68 लाख रुपये बनता था। इसके बाद उन्होंने मुल्लांपुर स्थित एचडीएफएसी बैंक से लाखों रुपये नकद और चेक के माध्यम से पेमेंट किए। उन्होंने इस दौरान सवा दो करोड़ रुपये की अदायगी कर दी। इसके बाद वह रजिस्ट्री नहीं करवा रहे थे। 31 जनवरी 2015 को रजिस्ट्री करवाने के लिए माजरी तहसील बुलाया, लेकिन दोनों नहीं आए। इसके बाद वह आरोपियों के चंडीगढ़ स्थित घर पर गए और उनसे विनती कि वह रजिस्ट्री करने तहसील पर आ जाएं। 2 फरवरी 2015 को वह फिर रजिस्ट्री करवाने नहीं आए। ऐसे में उन्हें दोनों पर संदेह हो गया है। जब गुरचरण सिंह ने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की तो आरोपियों की कहानी सामने आ गई।
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आरोपी को पुलिस ने खरड़ अदालत में पेश किया। वहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अदालत में जब आरोपी को पेश किया गया तो उसके वकील ने दलील दी की उक्त धोखाधड़ी से कुछ लेना देना नहीं है। जबकि दूसरे पक्ष का कहना था कि गिरफ्तार आरोपी भी कंपनी का प्रमुख था। उसकी अगुवाई में डील हुई थी। इसके अलावा उन्होंने कुछ दस्तावेज पेश किए। जिसके बाद अदालत ने उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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ऐसे हुए थे ठगी का शिकार
जानकारी के मुताबिक, गांव मिल्ख निवासी गुरचरण सिंह ने बताया कि साल 2014 में उन्होंनेे जमीन लेने का फैसला किया था। इस दौरान दो प्रॉपर्टी डीलर जो उनके गांव के आसपास के रहने वाले हैं, उन्होंने गुरचरण सिंह की मुलाकात महिंदर जीत सिंह राणा व हरदीप सिंह राणा से करवाई। इस दौरान उन्होंने बताया माजरी तहसील के पास गांव फतेहपुर में उनकी जमीन बिकाऊ है, जो 61 कनाल छह मरले हैं। इस दौरान उन्होंने जमीन की फर्द दिखाई। साथ ही कहा कि जमीन पर करीब 25 लाख का लोन है। उसे चुकाना होगा। जमीन की कुल कीमत करीब पांच करोड़ थी। प्रति एकड़ जमीन का रेट 68 लाख रुपये बनता था। इसके बाद उन्होंने मुल्लांपुर स्थित एचडीएफएसी बैंक से लाखों रुपये नकद और चेक के माध्यम से पेमेंट किए। उन्होंने इस दौरान सवा दो करोड़ रुपये की अदायगी कर दी। इसके बाद वह रजिस्ट्री नहीं करवा रहे थे। 31 जनवरी 2015 को रजिस्ट्री करवाने के लिए माजरी तहसील बुलाया, लेकिन दोनों नहीं आए। इसके बाद वह आरोपियों के चंडीगढ़ स्थित घर पर गए और उनसे विनती कि वह रजिस्ट्री करने तहसील पर आ जाएं। 2 फरवरी 2015 को वह फिर रजिस्ट्री करवाने नहीं आए। ऐसे में उन्हें दोनों पर संदेह हो गया है। जब गुरचरण सिंह ने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की तो आरोपियों की कहानी सामने आ गई।
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'बेरोजगार हो गए, जमीन भी बिक गई'
गिरफ्तार
- फोटो : File Photo
प्रॉपर्टी डीलर बोले-हमारा काम तो सौदा करवाने तक था
जब दोनों जमीन की रजिस्ट्री करवाने नहीं आए तो गुरचरण सिंह प्रॉपर्टी डीलर से मिले और कहा कि उन्हें करीब एक लाख रुपये दे चुके हैं, इसके प्रमाण उनके पास हैं। ऐसे में वह जमीन की रजिस्ट्री करवाकर दें। इस पर प्रॉपर्टी डीलरों ने उन्हें धमकाया और गाली गलौच की। उन्होंने कहा कि उनका काम बात करवाने तक था। इसके बाद उन्होंने जान से मारने की धमकियां भी दी।
फर्द व बैंक स्टेंटमेंट से उड़े होश
उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की। साथ ही जमीन की माल विभाग की फर्द निकलवाई। इसे देखते ही उनके होश उड़ गए। फर्द देखने के बाद पता चला कि जमीन पर दोनों आरोपियों की कंपनी ने 18 करोड़ 55 लाख 64 हजार 957 का कर्ज लिया था। यह बात फर्द पर दर्ज थी। जबकि इस लोन की राशि उनसे छिपाई गई। उन्होंने जब सेक्टर-34 कोआपरेटिव बैंक में पड़ताल की तो पता चला कि जमीन के कुछ हिस्से की 2013 में ही कुर्की हो चुकी थी। जबकि 1998 में कंपनी वेस्ट वाटर प्लांट लगाने के लिए एक करोड़ का कर्ज लिया था। 30-9-15 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, यह राशि 21 करोड़ 47 लाख 30 हजार 510 रुपये बनती है।
बेरोजगार हो गए, जमीन भी बिक गई
पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि वह किसान हैं, उनके पैसे आरोपी हड़प चुके हैं। उनकी जमीन बिक चुकी है, अब वह बेरोजगार हैं।
जब दोनों जमीन की रजिस्ट्री करवाने नहीं आए तो गुरचरण सिंह प्रॉपर्टी डीलर से मिले और कहा कि उन्हें करीब एक लाख रुपये दे चुके हैं, इसके प्रमाण उनके पास हैं। ऐसे में वह जमीन की रजिस्ट्री करवाकर दें। इस पर प्रॉपर्टी डीलरों ने उन्हें धमकाया और गाली गलौच की। उन्होंने कहा कि उनका काम बात करवाने तक था। इसके बाद उन्होंने जान से मारने की धमकियां भी दी।
फर्द व बैंक स्टेंटमेंट से उड़े होश
उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की। साथ ही जमीन की माल विभाग की फर्द निकलवाई। इसे देखते ही उनके होश उड़ गए। फर्द देखने के बाद पता चला कि जमीन पर दोनों आरोपियों की कंपनी ने 18 करोड़ 55 लाख 64 हजार 957 का कर्ज लिया था। यह बात फर्द पर दर्ज थी। जबकि इस लोन की राशि उनसे छिपाई गई। उन्होंने जब सेक्टर-34 कोआपरेटिव बैंक में पड़ताल की तो पता चला कि जमीन के कुछ हिस्से की 2013 में ही कुर्की हो चुकी थी। जबकि 1998 में कंपनी वेस्ट वाटर प्लांट लगाने के लिए एक करोड़ का कर्ज लिया था। 30-9-15 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, यह राशि 21 करोड़ 47 लाख 30 हजार 510 रुपये बनती है।
बेरोजगार हो गए, जमीन भी बिक गई
पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि वह किसान हैं, उनके पैसे आरोपी हड़प चुके हैं। उनकी जमीन बिक चुकी है, अब वह बेरोजगार हैं।