'मां देहव्यापार चलाती थी, बेटी सुबूत मिटा देगी'
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रोहतक के ‘अपना घर’ में रहने वाली बेसहारा लड़कियों से देहव्यापार करवाने के मामले में मुख्य अभियुक्त जसवंती देवी की बेटी सुषमा उर्फ सिम्मी की जमानत अर्जी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
सिम्मी ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उसे जमानत नहीं मिली तो उसका पति तलाक दे देगा। वहीं, सीबीआई ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि जमानत मिलने पर सिम्मी गवाहों को प्रभावित कर सकती है।
सिम्मी पर आरोप है कि वह ‘अपना घर’ के संचालन और वहां होते रहे जघन्य अपराधों में अपनी मां का सहयोग करती रही। सिम्मी सेंट्रल जेल अंबाला में बंद है और जिला अदालत पंचकूला से उसकी नियमित जमानत की अर्जी खारिज हो चुकी थी। इसी कारण उसने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
पति से तलाक बचाने के लिए मांगी जमानत
सिम्मी की ओर से एडवोकेट एसके गर्ग नरवाना ने पैरवी करते हुए कहा कि जिस कथित पीड़िता के बयान पर मामला दर्ज किया गया, उसने अपने बयान में सिम्मी पर कोई आरोप नहीं लगाया है।
सिम्मी जेल में दो साल से अधिक समय से बंद है और उसका पति तलाक मांग रहा है। यदि उसे जमानत नहीं मिली तो उसका तलाक हो जाएगा और उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
सीबीआई की ओर से एडवोकेट सुखदीप सिंह संधु ने पैरवी करते हुए कहा कि अभी इस मामले में गवाह अदालत में पेश किए जाने हैं। सिम्मी की ‘अपना घर’ प्रकरण में अहम भूमिका रही है। वह मुख्य अभियुक्त जसवंती की बेटी भी है।
यदि सिम्मी को जमानत मिलती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है, लिहाजा उसे जमानत नहीं देनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद शुक्रवार को जस्टिस केसी पुरी की एकल बेंच ने सिम्मी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।