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ठग रामलाल पर एक और एफआईआर: 250 करोड़ के गबन के मामले से नाम हटवाने को लिए थे 6 करोड़, एसआईटी करेगी जांच

Thu, 18 Nov 2021 10:56 AM IST
निवेदिता वर्मा संजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 18 Nov 2021 10:56 AM IST
सार

गुरुग्राम के बिजनेसमैन से पांच करोड़ की ठगी में गिरफ्तार फाइनेंसर व प्रॉपर्टी डीलर रामलाल चौधरी के बारे में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। 

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Another FIR against Fraud Accused Ramlal in Chandigarh
ठग रामलाल - फोटो : फाइल

विस्तार

गुरुग्राम के बिजनेसमैन से पांच करोड़ की ठगी में गिरफ्तार फाइनेंसर व प्रॉपर्टी डीलर रामलाल चौधरी की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। चौधरी के खिलाफ सेक्टर-34 थाने में धोखाधड़ी और षडयंत्र रचने की एक और एफआईआर दर्ज की गई है। एमडीसी सेक्टर-6 पंचकूला निवासी सेवानिवृत्त जिला राजस्व अधिकारी नरेश कुमार ने एसएसपी कुलदीप चहल को शिकायत दी है कि रामलाल ने 250 करोड़ के गबन के एक मामले से उनका नाम हटवाने के नाम पर छह करोड़ रुपये लिए थे। एसएसपी ने इस मामले की जांच भी पुराने मामलों की जांच कर रही एसआईटी को सौंप दी है। 

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नरेश कुमार ने एसएसपी को दी शिकायत में बताया कि फरवरी 2015 में विजिलेंस हरियाणा को 250 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत मिली थी। शिकायत में जिला क्षेत्रीय दफ्तर के सरकारी खाते में गबन की बात कही गई थी। उस समय नरेश इस विभाग में जिला क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर तैनात थे। विजिलेंस ने जांच में पाया कि 250 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। इसके बाद नरेश कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया गया। बाद में विजिलेंस ने नरेश कुमार का नाम भी एफआईआर में दर्ज करने को कहा था। 
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नरेश कुमार ने बताया कि उसकी तैनाती हरियाणा में अलग-अलग जगहों पर नायब तहसीलदार, तहसीलदार और जिला राजस्व अधिकारी के तौर पर रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात रेवाड़ी में वकील सतीश यादव से हुई थी। मामले में फंसने के बाद उसने सतीश से बात की तो उसने कहा कि उसके दोस्त भूप सिंह का चंडीगढ़ में किसी रामलाल चौधरी के साथ लिंक है। जिसके नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध हैं। 
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वर्ष 2015 मई में नरेश कुमार अपने दोस्त सतीश यादव के साथ पहले भूप सिंह से मिला। उसने रामलाल चौधरी से फोन पर पूरी बात बताई। उसके ठीक 10 दिन बाद उन्हें अपने चंडीगढ़ के सेक्टर 46 ए के मकान नंबर के-403 में बुलाया। रामलाल ने उन्हें कहा कि उसकी संबंधित अधिकारियों से बात हो गई है। इस केस से बाहर निकालने के लिए छह करोड़ रुपये लगेंगे।

प्लॉट को बेचकर दिए थे रुपये
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने रामलाल को छह करोड़ रुपये देने के लिए गुरुग्राम स्थित गांव सैनी खेड़ा में दो कनाल का एक प्लॉट बेचा, जो उसकी मां सावित्री देवी के नाम पर था। प्लॉट व अन्य जगह से रुपयों का इंतजाम कर नरेश ने रामलाल को पहली किस्त के तौर पर तीन करोड़ रुपये दिए। यह रुपये भूप सिंह और सतीश की मौजूदगी में दिए गए।

तीन करोड़ देने के बाद भी हो गई एफआईआर दर्ज
नरेश ने शिकायत में बताया कि रामलाल चौधरी को पहली किस्त के तौर पर तीन करोड़ रुपये देने के बावजूद विजिलेंस ने उसका नाम एफआईआर में दर्ज कर लिया। उसके बाद नरेश कुमार फिर रामलाल से मिला। इसके बाद रामलाल ने उसे विश्वास में लेकर उसका नाम एफआईआर से हटवाने के लिए तीन करोड़ रुपये और मांगे। इस दौरान नरेश ने गुरुग्राम स्थित डीएलएफ 2 में 215 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट बेचा। यह प्लॉट उसकी पत्नी के नाम पर था। रुपये लेने के बाद रामलाल ने उससे कहा कि उसका काम हो जाएगा लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उसका काम नहीं हुआ।

विजलेंस से मामला हो गया सीबीआई को स्थानांतरित
इस बीच जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इस दौरान नरेश रुपये वापस न मिलने पर अवसाद में चले गए। भूप सिंह और सतीश ने नरेश से कहा कि रामलाल रुपये लौटा देगा, चिंता मत करो। इस दौरान नरेश का नाम एफआईआर से नहीं कटा और रुपये भी वापस नहीं आए। इसके बाद नरेश ने पुलिस को शिकायत दे दी।

इस मामले में रामलाल के खिलाफ छह करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। इस मामले को भी जांच के लिए एसआईटी को सौंप दिया है। -कुलदीप चहल, एसएसपी


रामलाल चौधरी के रिमांड के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका डिसमिस
रामलाल चौधरी के वकील ने पुलिस रिमांड के खिलाफ बीते सोमवार को जिला अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट से मांग की थी कि रामलाल का 7 दिन का रिमांड खत्म किया जाए। इस पर सुनवाई करते हुए एडीजे नरेंद्र की कोर्ट ने याचिका डिसमिस कर दी है। अब रामलाल चौधरी को 7 दिन का रिमांड पूरा करना होगा। 

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