ससुरालवाले बार-बार मांग रहे थे रुपये, परेशान इंस्पेक्टर के बेटे उठाया खौफनाक कदम और फिर...
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अभी तक अपने दहेज से प्रताड़ित महिलाओं की खबर पढ़ी और सुनीं होगी। लेकिन आपका सामना एक चौंकाने वाली खबर से कराने जा रहे हैं। एक युवक ने अपनी जान इसलिए दे दी, क्योंकि वह ससुराल वालों के बार-बार रुपये मांगने से परेशान था। यह हम नहीं बल्कि सुसाइड नोट में खुद युवक ने आरोप लगाए हैं। मामला हरियाणा के रोहतक का है। यहां की न्यू राजेंद्र कॉलोनी में ससुरालियों के बार-बार रुपये मांगने और उत्पीड़न से त्रस्त होकर विजिलेंस इंस्पेक्टर के बेटे ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी।
मामले की सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस को मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए पत्नी और ससुरालियों को जिम्मेदार ठहराया है।
बोहर गांव के रहने वाले नरेंद्र ने बताया कि उसके ताऊ प्रकाश चंद विजिलेंस में इंस्पेक्टर थे। कुछ समय पूर्व ही बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई थी। उनका इकलौता बेटा 38 वर्षीय हरीश अहलावत न्यू राजेंद्र कॉलोनी में परिवार समेत रह रहा था। हरीश फाइनेंसर था। बताया कि सोमवार देर शाम उसने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया।
हालत बिगड़ने पर आनन-फानन में हरीश को पीजीआई ले जाया गया। जहां पर देर रात हरीश ने दम तोड़ दिया। हरीश की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने पत्नी और ससुराल के लोगों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि आए दिन पत्नी और ससुराल के लोग उससे रुपये मांगते रहते थे। उसके साथ अभद्रता भी करते थे, जिसके कारण वह आत्मघाती कदम उठा रहा है।
शिवाजी कॉलोनी एसएचओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि मृतक की पत्नी ऊषा और ससुराल के अन्य लोगों पर केस दर्ज किया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
दो बेटियां और एक बेटा है परिवार में
हरीश के परिवार में 15 वर्षीय बेटी हिमांशी जो कक्षा 9वी में पढ़ती है और 13 वर्षीय बेटी दीपांशी जो कक्षा आठ में पढ़ती है तथा 11 वर्षीय बेटा प्रिंस है, जो कक्षा छह में पढ़ता है। हरीश ही परिवार का पालन पोषण कर रहा था। अब हरीश की मौत के बाद परिवार के समक्ष दो वक्त की रोजी रोटी का संकट आ खड़ा हो गया है।
परिजनों का दावा- हरीश ने उपकरण तैयार कर लिम्का बुक में दर्ज करा लिया था नाम
नरेंद्र ने बताया कि मात्र हाईस्कूल तक पढ़े हरीश को बिजली के उपकरण बनाने का शौक था। बताया कि हरीश ने लोहे के सामान से ऐसा उपकरण निर्मित किया था, जिसे पानी में डालने के बाद भी करंट नहीं लगता था। इस उपकरण पर हरीश का नाम लिम्का बुक में दर्ज किया गया था। कई सामाजिक संगठनों ने भी हरीश को सम्मानित किया था।