41 भारतीय इराक में कैद, विदेश मंत्रालय जागा
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इराक के गृह युद्ध में पंजाब के 41 युवक के आतंकियों के कब्जे में होने की सूचना के बाद विदेश मंत्रालय हरकत में आ गया है।
वहीं इराक में फंसे पंजाबियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने केंद्र से सभी उचित कदम उठाने के लिए कहा है।
इस मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को फोन करके केंद्र द्वारा इस संबंध में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। सुखबीर के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने बुधवार को उन्हें फोन पर बताया कि भारत सरकार देश के नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से सीधा संपर्क बनाया हुआ है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और एनआरआई मामलों के मंत्री तोता सिंह ने भी इराक में फंसे पंजाबियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को उनकी सुरक्षा विश्वसनीय बनाने के लिए कहा है।
इराक की एक कंपनी में काम करने गए थे
मजदूरी करने इराक गए 41 पंजाबी युवक इस समय वहां गृहयुद्ध में फंस गए हैं। पिछले साल ये नौजवान इराक की एक कंपनी में काम करने गए थे।
इराक के मोसुल व तिकरित कस्बों में आतंकी संगठनों के कब्जे के बाद जिस कंपनी में ये नौजवान काम करते थे वह कंपनी भी भाग खड़ी हुई है। अब वहां के हालात की जानकारी पाकर उनके घरों में दहशत का माहौल है।
तीन दिन से कोई बात नहीं हो रही
अमृतसर जिले के मजीठा कस्बे के निक्टवर्ती गांव भोयेकला के युवक मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर कौर ने बताया कि उसके भाई मनजिंदर सिंह व उसके साथी जतिंदर सिंह, सोनू, सिमरन व हिमाचल का रहने वाला अमन इराक के आतंकी संगठन और आर्मी के बीच हो रहे युद्ध में फंसे हैं।
मनजिंदर सिंह समेत इराक गए 41 पंजाबी युवक इस समय वहां के जेहादियों के कब्जे में हैं। उन्हें कुछ नही पता चल रहा है। पिछले रविवार उनसे फोन पर बात हुई थी। उसके बाद उनसे कोई संपर्क नही हुआ।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय विदेश मंत्री को अलग अलग पत्र
मनजिंदर की बहन गुरपिंदर कौर ने बताया कि उनके पास के ही एक गांव की रंजीत कौर का बेटा जतिंदर सिंह भी मनजिंदर के साथ ही वहा फंसा हुआ है।
जतिंदर की मां और पिता भी परेशान हैं। पिता बलकार सिंह का कहना है कि सभी परिवारों ने अपने बच्चों को सही सलामत भारत वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय विदेश मंत्री को अलग अलग पत्र भेजे हैं।