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200 करोड़ का महाघोटाला, आरोपी सीए ने अदालत में सरेंडर किया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Oct 2016 09:40 AM IST
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200 करोड़ का महाघोटाला
- फोटो : demo pic
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भारतीय स्टेट बैंक की सेक्टर-17 स्थित शाखा से 200 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी मामले में दिल्ली सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की ओर से 16 सितंबर को सीजेएम कोर्ट में चालान दाखिल करने के बाद सोमवार को एक आरोपी ने सरेंडर कर दिया।
सरेंडर करने वाले सेक्टर-36 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) दिनेश विरमानी को भी सीबीआई ने इस मामले में आरोपी बनाया है। आरोपी ने अदालत में सरेंडर के साथ ही जमानत याचिका भी दायर कर दी। फिलहाल सीबीआई द्वारा रिमांड न लिए जाने पर अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं दिनेश विरमानी की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया है कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। सीबीआई की ओर से दायर एफआईआर में उनका नाम नहीं था। उन्हें बाद में आरोपियों के बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीआई ने चालान में उन्हें भी आरोपी बनाया है, लेकिन अब तक उन्हें चालान की कॉपी नहीं सौंपी है। मामले में मुख्य आरोपी विदेश भाग चुके हैं।
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दिनेश के अनुसार इससे पहले वह जिस कंपनी में नौकरी करता था, वहां से उसने दिसंबर 2011 में नौकरी छोड़ दी थी। जबकि घोटाले की सारी ट्रांजेक्शन इसके बाद की है। सीजेएम कोर्ट ने उनकी याचिका पर दिल्ली सीबीआई को नोटिस जारी कर मंगलवार को जवाब दाखिल करने को कहा है।
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सरेंडर करने वाले सेक्टर-36 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) दिनेश विरमानी को भी सीबीआई ने इस मामले में आरोपी बनाया है। आरोपी ने अदालत में सरेंडर के साथ ही जमानत याचिका भी दायर कर दी। फिलहाल सीबीआई द्वारा रिमांड न लिए जाने पर अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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वहीं दिनेश विरमानी की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया है कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। सीबीआई की ओर से दायर एफआईआर में उनका नाम नहीं था। उन्हें बाद में आरोपियों के बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीआई ने चालान में उन्हें भी आरोपी बनाया है, लेकिन अब तक उन्हें चालान की कॉपी नहीं सौंपी है। मामले में मुख्य आरोपी विदेश भाग चुके हैं।
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दिनेश के अनुसार इससे पहले वह जिस कंपनी में नौकरी करता था, वहां से उसने दिसंबर 2011 में नौकरी छोड़ दी थी। जबकि घोटाले की सारी ट्रांजेक्शन इसके बाद की है। सीजेएम कोर्ट ने उनकी याचिका पर दिल्ली सीबीआई को नोटिस जारी कर मंगलवार को जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह है मामला
धोखाधड़ी
- फोटो : Demo Pic
22 मई 2014 को एसबीआई के जनरल मैनेजर कुमार श्रीदिंदू ने दिल्ली सीबीआई की खास व्यावसायिक शाखा को दी शिकायत में कहा कि सूर्या फार्मा के डायरेक्टरों ने बैंक से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। सीबीआई ने 3 जून 2014 को मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
एफआईआर में सूर्या फार्मा के डायरेक्टर अलका, राजीव गोयल, सुहेल गोयल के साथ ही हरि ओम भाटिया, मुक्ता सेठ, प्रमोद अग्रवाल और अन्य को आरोपी बनाया गया था। बैंक की शिकायत के अनुसार सूर्या फार्मास्युटिकल लिमिटेड के डायरेक्टर पंचकूला निवासी अलका और राजीव गोयल ने बैंक से लोन के लिए आवेदन किया था। इसके लिए अलका ने कंपनी के टर्नओवर संबंधी फर्जी रिपोर्ट जमा कराई थी। इसमें कंपनी का टर्न ओवर बहुत अधिक दिखाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 से 2012 तक उनकी कंपनी का व्यापार 1,100 करोड़ रुपये का था। इसी रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने उनका 157.96 करोड़ का लोन पास किया था। इसके अलावा उन्होंने बेटे सुहेल गोयल को एम/एस एमसंस ऑरगेनिक्स लिमिटेड का एडिशनल डायरेक्टर जनरल दिखाकर उसकी कंपनी के फर्जी ट्रांजेक्शन के नाम पर भी बैंक से कुछ करोड़ का लोन लिया था। 200 करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेने के बाद अल्का और राजीव फरार हो गए थे। इससे पहले कि उनका बेटा फरार होता सीबीआई ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था।
मामले में पहले पुलिस में केस दर्ज किया गया था। बाद में इसकी जांच जून 2014 में सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने 20 जून को आरोपियों के चंडीगढ़ स्थित ऑफिस और पंचकूला स्थित घर की तलाशी भी ली थी। इस दौरान सीबीआई ने कई दस्तावेज सीज किए थे जिनके आधार पर बैंक से धोखा किया गया था।
एफआईआर में सूर्या फार्मा के डायरेक्टर अलका, राजीव गोयल, सुहेल गोयल के साथ ही हरि ओम भाटिया, मुक्ता सेठ, प्रमोद अग्रवाल और अन्य को आरोपी बनाया गया था। बैंक की शिकायत के अनुसार सूर्या फार्मास्युटिकल लिमिटेड के डायरेक्टर पंचकूला निवासी अलका और राजीव गोयल ने बैंक से लोन के लिए आवेदन किया था। इसके लिए अलका ने कंपनी के टर्नओवर संबंधी फर्जी रिपोर्ट जमा कराई थी। इसमें कंपनी का टर्न ओवर बहुत अधिक दिखाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 से 2012 तक उनकी कंपनी का व्यापार 1,100 करोड़ रुपये का था। इसी रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने उनका 157.96 करोड़ का लोन पास किया था। इसके अलावा उन्होंने बेटे सुहेल गोयल को एम/एस एमसंस ऑरगेनिक्स लिमिटेड का एडिशनल डायरेक्टर जनरल दिखाकर उसकी कंपनी के फर्जी ट्रांजेक्शन के नाम पर भी बैंक से कुछ करोड़ का लोन लिया था। 200 करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेने के बाद अल्का और राजीव फरार हो गए थे। इससे पहले कि उनका बेटा फरार होता सीबीआई ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था।
मामले में पहले पुलिस में केस दर्ज किया गया था। बाद में इसकी जांच जून 2014 में सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने 20 जून को आरोपियों के चंडीगढ़ स्थित ऑफिस और पंचकूला स्थित घर की तलाशी भी ली थी। इस दौरान सीबीआई ने कई दस्तावेज सीज किए थे जिनके आधार पर बैंक से धोखा किया गया था।