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सूचना मिली तो जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में छापा मारा, स्कूल के बुक सेंटर को किया सील
Updated Thu, 26 Apr 2018 02:12 AM IST
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बुक संचालक बोला, दुुकान में चाय-समोसा ही बेचते हैं किताबें तो प्रिंसिपल के निर्देश पर बेच रहे
डीईओ कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर डीसी मॉडल स्कूल में बिक रही थीं प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें और वर्दी
- सूचना मिली तो जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में छापा मारा, स्कूल के बुक सेंटर को किया सील
- स्कूल प्रिंसिपल मौके पर नहीं मिली तो स्कूल के शिक्षकों से कहा किसकी अनुमति से बिक रही थीं किताबें कारण बताओ
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
जिले के प्राइवेट स्कूलों में धड़ल्ले से बिक रही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर आखिरकार शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी टीम के साथ पंचकूला सेक्टर-सात के डीसी मॉडल स्कूल में छापा मारा। उन्होंने यहां पर बाकायदा बुक सेंटर में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों और बच्चों की वर्दियां अभिभावकों को बेचते हुए पकड़ा। विभाग की टीम को देखकर बुक संचालक घबरा गया और वह डीईओ से बोलने लगा कि इसमें हमारा कोई रोल नहीं है, सिर्फ दुुकान में चाय और समोसे बेचते हैं। किताबें स्कूल प्रिंसिपल के निर्देश पर बेची जाती हैं। इतने में सूचना मिली तो स्कूल के कुछ शिक्षक भी बुक सेंटर पर पहुंच गए। सबने जिला शिक्षा अधिकारी से मिन्नतें की लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और अपने स्टाफ को तत्काल स्कूल को सील करने का निर्देश दिया। इस दौरान डीईओ हरमिंदर सिंह सैनी ने अपने सामने हीं बुक सेंटर को सील करवाया।
इस दौरान स्कूल में प्रिंसिपल मौजूद नहीं थीं, डीईओ ने स्कूल के शिक्षकों को निर्देश दिया कि स्कूल में किसकी अनुमति से किताबें बिक रही हैं, इसका जवाब लिखित में भेजें। बता दें कि अमर उजाला ने इससे पहले छह अप्रैल को जैनेंद्रा पब्लिक स्कूल के स्कूल कैंपस में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचने का मसला उठाया था। उसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। वहीं, जिले के निजी स्कूलों में विभाग की ओर से छापेमारी जारी है।
डीईओ कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर स्कूल में बिक रहीं थी प्राइवेट पब्लिसर्स की किताबें
हैरत की बात है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज पांच मीटर की दूरी पर निजी स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बिक रही थीं। इसकी भनक किसी को नहीं थी। बता दें कि सीबीएसई और शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके साथ हीं स्कूल परिसर में पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें और बच्चों की वर्दी नहीं बेचने का निर्देश है। स्कूल शिक्षा निदेशक के निर्देश पर हाल हीं प्रदेश भर के जिला शिक्षा अधिकारियों ने निजी स्कलों को पत्र भी भेजा था, लेकिन इससे बेपरवाह कमीशन के खेल में स्कूल परिसर में किताबें बेची जा रही हैं।
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पहले भी हम शिक्षा विभाग को शिकायत करते आए हैं कि जिले के निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें और बच्चों की वर्दियां स्कूलों में बेची जा रही हैं। हमारी शिकायत सच साबित हुई है, संस्था शिक्षा विभाग की कार्रवाई की सराहना करती है और आशा करती है कि ऐसे स्कूलों की शीघ्र मान्यता रद्द कर दी जाएगी। अगर ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। - भारत भूषण बंसल, प्रदेश महासचिव, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
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डीईओ कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर डीसी मॉडल स्कूल में बिक रही थीं प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें और वर्दी
- सूचना मिली तो जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में छापा मारा, स्कूल के बुक सेंटर को किया सील
- स्कूल प्रिंसिपल मौके पर नहीं मिली तो स्कूल के शिक्षकों से कहा किसकी अनुमति से बिक रही थीं किताबें कारण बताओ
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
जिले के प्राइवेट स्कूलों में धड़ल्ले से बिक रही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर आखिरकार शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी टीम के साथ पंचकूला सेक्टर-सात के डीसी मॉडल स्कूल में छापा मारा। उन्होंने यहां पर बाकायदा बुक सेंटर में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों और बच्चों की वर्दियां अभिभावकों को बेचते हुए पकड़ा। विभाग की टीम को देखकर बुक संचालक घबरा गया और वह डीईओ से बोलने लगा कि इसमें हमारा कोई रोल नहीं है, सिर्फ दुुकान में चाय और समोसे बेचते हैं। किताबें स्कूल प्रिंसिपल के निर्देश पर बेची जाती हैं। इतने में सूचना मिली तो स्कूल के कुछ शिक्षक भी बुक सेंटर पर पहुंच गए। सबने जिला शिक्षा अधिकारी से मिन्नतें की लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और अपने स्टाफ को तत्काल स्कूल को सील करने का निर्देश दिया। इस दौरान डीईओ हरमिंदर सिंह सैनी ने अपने सामने हीं बुक सेंटर को सील करवाया।
इस दौरान स्कूल में प्रिंसिपल मौजूद नहीं थीं, डीईओ ने स्कूल के शिक्षकों को निर्देश दिया कि स्कूल में किसकी अनुमति से किताबें बिक रही हैं, इसका जवाब लिखित में भेजें। बता दें कि अमर उजाला ने इससे पहले छह अप्रैल को जैनेंद्रा पब्लिक स्कूल के स्कूल कैंपस में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचने का मसला उठाया था। उसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। वहीं, जिले के निजी स्कूलों में विभाग की ओर से छापेमारी जारी है।
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डीईओ कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर स्कूल में बिक रहीं थी प्राइवेट पब्लिसर्स की किताबें
हैरत की बात है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज पांच मीटर की दूरी पर निजी स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बिक रही थीं। इसकी भनक किसी को नहीं थी। बता दें कि सीबीएसई और शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके साथ हीं स्कूल परिसर में पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें और बच्चों की वर्दी नहीं बेचने का निर्देश है। स्कूल शिक्षा निदेशक के निर्देश पर हाल हीं प्रदेश भर के जिला शिक्षा अधिकारियों ने निजी स्कलों को पत्र भी भेजा था, लेकिन इससे बेपरवाह कमीशन के खेल में स्कूल परिसर में किताबें बेची जा रही हैं।
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पहले भी हम शिक्षा विभाग को शिकायत करते आए हैं कि जिले के निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें और बच्चों की वर्दियां स्कूलों में बेची जा रही हैं। हमारी शिकायत सच साबित हुई है, संस्था शिक्षा विभाग की कार्रवाई की सराहना करती है और आशा करती है कि ऐसे स्कूलों की शीघ्र मान्यता रद्द कर दी जाएगी। अगर ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। - भारत भूषण बंसल, प्रदेश महासचिव, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।