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क्राइम ब्रांच ने किरकिरी पर DSP सतबीर को हटाया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Feb 2014 12:01 PM IST
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कई बड़े मामलों में आरोपियों के छूटने से हो रही किरकिरी के बीच चंडीगढ़ पुलिस में बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। इनमें डीएसपी सतबीर सिंह को क्राइम ब्रांच से हटा कर ऑपरेशन सेल का प्रभार सौंपा गया है।
उनकी जगह क्राइम ब्रांच की जिम्मेदारी ऑपरेशन सेल के जगबीर सिंह को दी गई है। कुल तीन डीएसपी सहित 55 पुलिस कर्मियों के तबादले किए गए हैं।
हालांकि पुलिस अधिकारी इसे रूटीन तबादले बता रहे हैं। मगर उन सभी बड़े मामलों में जिन्हें सुलझाने का दावा कर पुलिस अधिकारियों ने वाहवाही लूटी थी उनके आरोपी सुबूतों के अभाव में पिछले दिनों अदालत से बरी हो गए। इनमें तनिष्क डकैती और डिंपी हत्याकांड जैसे मामले भी शामिल हैं।
इसके बाद से ही पुलिस की क्राइम ब्रांच की शैली पर सवाल उठ रहे थे और एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल को भी सफाई देने पड़ी थी। उन्होंने अपने पुलिस कर्मियों में विश्वास जताया था। आला अधिकारी अब भी इन मामलों को रूटीन तबादले बता रहे हैं।
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इन मामलों में हुई थी क्राइम ब्रांच की किरकिरी
21 जनवरी 2014: मनीमाजरा में तनिष्क शोरूम में दस करोड़ की डकैती मामले में पुलिस ने अदालत में मामला इतने कमजोर ढंग से रखा कि डकैती, आर्म्स एक्ट की धारा साबित ही नहीं कर सकी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की इन धाराओं में आरोपी मानव सोनी, भूरा कुरैशी, उपेन्द्र सिंह, अनुज कुमार, भूरा तोमर, सोनू राघव, नदीम, हरजिंद्र और अजय को बरी कर दिया। उन्हें रिकवरी के आधार पर मामूली सी सजा मिली जो वह ट्रायल के दौरान पहले ही पूरी कर चुके थे।
6 फरवरी 2014 : गैंगस्टर प्रभजिंदर सिंह डिंपी की हत्या मामले में पकड़े गए जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी पर हत्या, साजिश रचने और आर्म्स एक्ट की धारा साबित नहीं कर पाई।
पुलिस की ढीली जांच और ठोस सबूत न होने पर अदालत ने जसविंद्र सिंह उर्फ रॉकी को बरी कर दिया। डिंपी की हत्या सुखना लेक पर सात जुलाई 2006 को गोली मारकर कर दी गई थी। स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल के इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह और सब इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह ने अक्तूबर 2008 में जसविंद्र को सेक्टर-11 से पकड़ा था।
पुलिस ने दावा किया था कि रॉकी से बरामद हुई पिस्टल से ही डिंपी की हत्या हुई थी। लेकिन मुकदमा इतना कमजोर बनाया कि पुलिस अदालत में हत्या, आर्म्स एक्ट और साजिश रचने की धारा साबित नहीं कर पाई।
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उनकी जगह क्राइम ब्रांच की जिम्मेदारी ऑपरेशन सेल के जगबीर सिंह को दी गई है। कुल तीन डीएसपी सहित 55 पुलिस कर्मियों के तबादले किए गए हैं।
हालांकि पुलिस अधिकारी इसे रूटीन तबादले बता रहे हैं। मगर उन सभी बड़े मामलों में जिन्हें सुलझाने का दावा कर पुलिस अधिकारियों ने वाहवाही लूटी थी उनके आरोपी सुबूतों के अभाव में पिछले दिनों अदालत से बरी हो गए। इनमें तनिष्क डकैती और डिंपी हत्याकांड जैसे मामले भी शामिल हैं।
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इसके बाद से ही पुलिस की क्राइम ब्रांच की शैली पर सवाल उठ रहे थे और एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल को भी सफाई देने पड़ी थी। उन्होंने अपने पुलिस कर्मियों में विश्वास जताया था। आला अधिकारी अब भी इन मामलों को रूटीन तबादले बता रहे हैं।
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इन मामलों में हुई थी क्राइम ब्रांच की किरकिरी
21 जनवरी 2014: मनीमाजरा में तनिष्क शोरूम में दस करोड़ की डकैती मामले में पुलिस ने अदालत में मामला इतने कमजोर ढंग से रखा कि डकैती, आर्म्स एक्ट की धारा साबित ही नहीं कर सकी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की इन धाराओं में आरोपी मानव सोनी, भूरा कुरैशी, उपेन्द्र सिंह, अनुज कुमार, भूरा तोमर, सोनू राघव, नदीम, हरजिंद्र और अजय को बरी कर दिया। उन्हें रिकवरी के आधार पर मामूली सी सजा मिली जो वह ट्रायल के दौरान पहले ही पूरी कर चुके थे।
6 फरवरी 2014 : गैंगस्टर प्रभजिंदर सिंह डिंपी की हत्या मामले में पकड़े गए जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी पर हत्या, साजिश रचने और आर्म्स एक्ट की धारा साबित नहीं कर पाई।
पुलिस की ढीली जांच और ठोस सबूत न होने पर अदालत ने जसविंद्र सिंह उर्फ रॉकी को बरी कर दिया। डिंपी की हत्या सुखना लेक पर सात जुलाई 2006 को गोली मारकर कर दी गई थी। स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल के इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह और सब इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह ने अक्तूबर 2008 में जसविंद्र को सेक्टर-11 से पकड़ा था।
पुलिस ने दावा किया था कि रॉकी से बरामद हुई पिस्टल से ही डिंपी की हत्या हुई थी। लेकिन मुकदमा इतना कमजोर बनाया कि पुलिस अदालत में हत्या, आर्म्स एक्ट और साजिश रचने की धारा साबित नहीं कर पाई।