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क्रिक कॉरिडोर का होगा विस्तार.. पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के शिक्षण संस्थान भी होंगे शामिल
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ रीजन रेनोवेशन नॉलेज कलस्टर (क्रिक) कॉरिडोर का बड़े स्तर पर विस्तार होने जा रहा है। इसमें पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को भी जगह दिए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को एक-दूसरे शिक्षण संस्थानों के संसाधनों का लाभ पहुंचाना है। साथ ही ज्ञान का आदान प्रदान भी कर सकेंगे। सूत्रों का कहना है कि इसी साल इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। नए सिरे से नियमों का निर्धारण किए जाने की योजना है।
वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्रिक की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य था कि एक संस्थान के पास भरपूर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हो सकता है। ऐसे में शिक्षक और विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे संस्थानों की प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकें। इसका शुभारंभ सात से आठ शिक्षण संस्थानों में हुआ। उसके बाद संख्या बढ़कर 20 तक पहुंची। शुरू में इसका संचालन बेहतर ढंग से नहीं हो पाया। सबसे बड़ी दिक्कत समय को लेकर आई। संस्थानों में स्टूडेंट्स के समय का निर्धारण नहीं हो पाया और न ही एक-दूसरे संस्थानों के फीस लेने में समानता रही। वर्ष 2019 में नियम बनाए गए थे, लेकिन लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाया। हालांकि वीसी की ओर से 28 सदस्यीय कमेटी पहले बनाई गई थी, जिसने नियमों को लागू करने की कोशिश जरूर की थी।
क्या है इन प्रदेशों को शामिल करने का उद्देश्य
अभी तक क्रिक कॉरिडोर में ट्राइसिटी के शिक्षण संस्थान शामिल हैं, लेकिन इसका विस्तार किया जाएगा। पंजाब, हिमाचल, हरियाणा से सर्वाधिक विद्यार्थी ट्राइसिटी के शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं। यहां शिक्षण संस्थान बेहतर हैं। संसाधन भी पर्याप्त हैं। ऐसे में यहां का लाभ इन प्रदेशों के छात्रों को मिल सके। साथ ही इन प्रदेशों की प्रतिभा का पता यहां के छात्रों को लग सके यानी ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। हालांकि अभी इस योजना को पूरी तरह धरातल पर नहीं लाया गया। अंतिम मंजूरी पीयू के उच्च अधिकारियों की ओर से दी जाएगी।
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इन बिंदुओं पर नए सिरे से होगा काम
- तीनों प्रदेशों के कौन-कौन से शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा और कितना लाभ मिलेगा।
- छात्र, शोधार्थी आदि से ये संस्थान कितनी फीस लेंगे।
- पीयू की क्रिक बस का संचालन कैसे हो और बसों की संख्या कितनी बढ़ाई जाए।
- ज्ञान के साधनों को बढ़ाने के रास्ते खोले जाएंगे।
- हर दिन प्रयोशाला, पुस्तकालय आदि प्रयोग के लिए 24 घंटे में से कुछ घंटे इन विद्यार्थियों के लिए तय किए जाएंगे।
- इन सभी संस्थानों की फीस एक समान होगी।
- प्रयोगशाला में अलग से निर्धारित होगा विद्यार्थियों के लिए समय।
- सभी शिक्षण संस्थानों का एक सामूहिक ज्ञान यज्ञ भी कराया जाएगा। हालांकि यह तभी संभव होगा जब कोरोना खत्म होगा।
अभी तक यह संस्थान कॉरिडोर में शामिल
- पीयू
- इमटैक
- नाइपर
- आईएनएसटी
- सीआईएबी
- नाबी
- पेक
- पीजीआई
- निटर
ये कमेटियां बनाएंगी नियम
क्रिक कॉरिडोर का बेहतर संचालन करने के लिए कई प्रकार की कमेटियां बनाई जाएंगी। पुस्तकालय शेयरिंग कमेटी, इंस्ट्रूमेंटल फैसिलिटीज शेयरिंग कमेटी, कमेटी टू फ्रेम रूल्स, कमेटी टू स्ट्रीमलाइन द ऑपरेशन ऑफ क्रिक बसेज आदि कमेटियां बनेंगी। नए सिरे से सदस्य बनाए जाएंगे। कुछ पुराने सदस्यों को भी इनमें जगह मिलेगी।
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वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्रिक की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य था कि एक संस्थान के पास भरपूर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हो सकता है। ऐसे में शिक्षक और विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे संस्थानों की प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकें। इसका शुभारंभ सात से आठ शिक्षण संस्थानों में हुआ। उसके बाद संख्या बढ़कर 20 तक पहुंची। शुरू में इसका संचालन बेहतर ढंग से नहीं हो पाया। सबसे बड़ी दिक्कत समय को लेकर आई। संस्थानों में स्टूडेंट्स के समय का निर्धारण नहीं हो पाया और न ही एक-दूसरे संस्थानों के फीस लेने में समानता रही। वर्ष 2019 में नियम बनाए गए थे, लेकिन लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाया। हालांकि वीसी की ओर से 28 सदस्यीय कमेटी पहले बनाई गई थी, जिसने नियमों को लागू करने की कोशिश जरूर की थी।
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क्या है इन प्रदेशों को शामिल करने का उद्देश्य
अभी तक क्रिक कॉरिडोर में ट्राइसिटी के शिक्षण संस्थान शामिल हैं, लेकिन इसका विस्तार किया जाएगा। पंजाब, हिमाचल, हरियाणा से सर्वाधिक विद्यार्थी ट्राइसिटी के शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं। यहां शिक्षण संस्थान बेहतर हैं। संसाधन भी पर्याप्त हैं। ऐसे में यहां का लाभ इन प्रदेशों के छात्रों को मिल सके। साथ ही इन प्रदेशों की प्रतिभा का पता यहां के छात्रों को लग सके यानी ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। हालांकि अभी इस योजना को पूरी तरह धरातल पर नहीं लाया गया। अंतिम मंजूरी पीयू के उच्च अधिकारियों की ओर से दी जाएगी।
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इन बिंदुओं पर नए सिरे से होगा काम
- तीनों प्रदेशों के कौन-कौन से शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा और कितना लाभ मिलेगा।
- छात्र, शोधार्थी आदि से ये संस्थान कितनी फीस लेंगे।
- पीयू की क्रिक बस का संचालन कैसे हो और बसों की संख्या कितनी बढ़ाई जाए।
- ज्ञान के साधनों को बढ़ाने के रास्ते खोले जाएंगे।
- हर दिन प्रयोशाला, पुस्तकालय आदि प्रयोग के लिए 24 घंटे में से कुछ घंटे इन विद्यार्थियों के लिए तय किए जाएंगे।
- इन सभी संस्थानों की फीस एक समान होगी।
- प्रयोगशाला में अलग से निर्धारित होगा विद्यार्थियों के लिए समय।
- सभी शिक्षण संस्थानों का एक सामूहिक ज्ञान यज्ञ भी कराया जाएगा। हालांकि यह तभी संभव होगा जब कोरोना खत्म होगा।
अभी तक यह संस्थान कॉरिडोर में शामिल
- पीयू
- इमटैक
- नाइपर
- आईएनएसटी
- सीआईएबी
- नाबी
- पेक
- पीजीआई
- निटर
ये कमेटियां बनाएंगी नियम
क्रिक कॉरिडोर का बेहतर संचालन करने के लिए कई प्रकार की कमेटियां बनाई जाएंगी। पुस्तकालय शेयरिंग कमेटी, इंस्ट्रूमेंटल फैसिलिटीज शेयरिंग कमेटी, कमेटी टू फ्रेम रूल्स, कमेटी टू स्ट्रीमलाइन द ऑपरेशन ऑफ क्रिक बसेज आदि कमेटियां बनेंगी। नए सिरे से सदस्य बनाए जाएंगे। कुछ पुराने सदस्यों को भी इनमें जगह मिलेगी।