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नगर निगमों-परिषदों पर पंजाब सरकार ने लगाया गो-सेस, अंग्रेजी शराब पर प्रति बोतल 10 रुपये

Sun, 28 Jul 2019 10:10 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 28 Jul 2019 10:10 AM IST
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Cow Cess Applied To Municipal Corporations And Municipal Councils In Punjab
सांकेतिक तस्वीर

बिजली पर प्रति यूनिट गो-सेस लगाए जाने के बाद पंजाब सरकार ने राज्य में कई अन्य वस्तुओं पर लागू इस उपकर की दरों में इजाफा कर दिया है। सूबे में गायों की देखभाल के लिए आम लोगों से वसूले जाने वाले इस उपकर को अब लोकल बॉडी विभाग ने म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन और नगर काउंसिलों में लागू कर दिया है। विभाग के सचिव ए वेणु प्रसाद के अनुसार, इस संबंध में विभाग द्वारा नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

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उल्लेखनीय है कि प्रदेश में गो-सेस की शुरुआत पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा 19 अक्तूबर, 2015 में की गई थी। इसके लिए नगर काउंसिलों द्वारा बाकायदा प्रस्ताव भी पारित किए गए थे, जिन पर अब मौजूदा कांग्रेस सरकार ने मुहर लगा दी है।
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इसके साथ ही, नगर काउंसिलों और म्यूनिसिपल कारपोरेशनों के लिए नोटिफिकेशन जारी होते ही नगर पंचायतों में भी गो-सेस लागू हो गया है। नगर पंचायतों में आठ वस्तुओं पर गो-सेस वसूला जाएगा।

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अंग्रेजी शराब पर प्रति बोतल 10 रुपये लगेगा गो-सेस

नए आदेश में बिजली पर लागू गो-सेस में तो कोई फेरबदल नहीं किया गया है लेकिन मैरिज पैलेस समेत अन्य सभी मदों में इजाफा कर दिया गया है। अब अंग्रेजी शराब पर प्रति बोतल 10 रुपये और देसी शराब व बीयर पर प्रति बोतल 5 रुपये गो-सेस लगेगा। 

एयर कंडीशंड मैरिज पैलेसों को प्रति समारोह 500 की बजाय 1000 रुपये, नॉन एयर कंडीशंड मैरिज पैलेसों पर 300 की बजाय 500 रुपये प्रति समारोह और तेल टैंकरों पर प्रति चक्कर 100 रुपये गो-सेस देना होगा। चार पहिया वाहन खरीदने पर 500 की बजाय 1000 रुपये, दोपहिया वाहन खरीदने पर 200 रुपये गो-सेस वसूला जाएगा।

गो-सेस गायों पर खर्च होने का कोई रिकॉर्ड नहीं
पंजाब सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट 2 पैसे गो-सेस के रूप में लिए जा रहे हैं। 2016 से लागू इस फैसले से दो साल के भीतर पीएसपीसीएल के पास 80 लाख रुपये से अधिक राशि जमा हुई थी। लेकिन यह राशि गायों के कल्याण और उनकी देखभाल पर खर्च हुई हो, इसका कोई रिकॉर्ड सरकार की ओर से जारी नहीं किया गया है। वहीं, पीएसपीसीएल के आला अधिकारियों का कहना है कि बिजली बिलों के साथ गो-सेस को जो राशि आती है, वह राज्य सरकार को सौंप दी जाती है। 

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