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निर्यात और घरेलू बाजार कारोबार में लुढ़का सूती वस्त्र उद्योग, हरियाणा को बीते वर्ष लगा सवा सौ करोड़ का झटका

Fri, 05 Mar 2021 10:40 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 05 Mar 2021 10:40 AM IST
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Cotton textile industry of Haryana suffers in domestic market business and export
हरियाणा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा सहित देश भर में सूती वस्त्र उद्योग के निर्यात और घरेलू बाजार कारोबार पर आर्थिक मार पड़ रही है। प्रदेश का सूती वस्त्र निर्यात बीते वर्ष मार्च तक सवा सौ करोड़ रुपये नीचे लुढ़का तो देश भर के निर्यात में 3.06 प्रतिशत की गिरावट आई। पानीपत के कपड़ा उद्योग का कारोबार ही 2020 में 2800 करोड़ कम रहा।

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निर्यात और घरेलू कारोबार में आर्थिक नुकसान होने से स्थानीय कंपनी मालिक चिंतित हैं। विदेशी कंपनियां ई-कॉमर्स के जरिए सूती वस्त्र एवं अन्य कपड़ा व्यापारियों को काफी नुकसान पहुंचा रही हैं। प्रदेश के भिवानी जिले में बीते दो वर्ष में चार में से तीन बड़ी सूती वस्त्र कंपनियां बंद हो चुकी हैं।
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बिरला यूनिट व बिड़ला ग्रासिम की दो इकाईयों में ही पांच हजार कर्मचारियों को रोजगार गंवाना पड़ा। जहां राजस्व हानि हुई, वहीं कच्चे माल की आपूर्ति करने वालों को भी खासी चपत लगी है। टैक्सलाउन के नाम से एक और कंपनी ग्रामीण क्षेत्र में बंद हुई, जिससे दोहरा नुकसान हुआ।
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सूती टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के डाटा के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना 2019-20 में सूती धागे, कपड़े और कृत्रिम वस्त्र के निर्यात में 3.06 प्रतिशत की गिरावट आई है। मानव निर्मित धागे, कपड़ा एवं कृत्रिम वस्त्र का निर्यात 2.75 प्रतिशत पर ही सिमट गया।

पानीपत में 30 हजार इकाइयां
टेक्सटाइल हब पानीपत में सूती वस्त्र व अन्य कपड़ा उद्योग की 30 हजार छोटी और बड़ी इकाइयां है। जिनका 2020 में निर्यात 8000 करोड़, 2019 में 8800 करोड़ तो 2018 में 7744 करोड़ रहा। घरेलू बाजार की बात करें तो पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज ने वर्ष 2020 में 28000 करोड़, 2019 में 30800 करोड़ व 2018 में 26180 करोड़ का व्यापार किया।

डॉलर की बढ़ती कीमत का भी पड़ा असर
राष्ट्रीय जन व्यापार उद्योग संगठन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सूत्री वस्त्र का निर्यात गिरने का कारण डॉलर की कीमतें लगातार बढ़ना भी है। बीते वर्षों के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया अत्यधिक कमजोर रहा। वर्ष 2020 में डॉलर की औसतन कीमत रुपये के मुकाबले 71.29 से 73 तक रही। वर्ष 2019 में 69.43 से 71.38 व वर्ष 2018 में 63.65 से 73.58 तक रही। निर्यात व घरेलू कारोबार में गिरावट के आंकड़े कोरोना से पहले के हैं। 2020-21 के आंकड़ों में यह गिरावट और अधिक होने की संभावना है।

प्रोत्साहन की जरूरत, समग्र रूप से काम करना होगा : गुप्ता
राष्ट्रीय जन व्यापार उद्योग संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि उद्योग क्षेत्र और सरकार को समग्र रूप से काम करना होगा। इससे ही सूती वस्त्र व कपड़ा उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बना रह सकता है। बुनाई और प्रसंस्करण खंडों को मजबूत करने, छोटे व मध्यम पैमाने के निर्यातकों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। वस्त्र उद्योग, निर्यातकों और घरेलू उत्पादकों के लिए अलग-अलग नीतियां होनी चाहिए। कपड़ा उद्योग कीमतों और मांग में लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। 

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