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आय से अधिक संपत्ति मामले में दंपती को 3-3 साल की कैद और 85 लाख जुर्माना, कोर्ट की टिप्पणी...
Fri, 13 Mar 2020 12:16 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 13 Mar 2020 12:16 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
चंडीगढ़ सीबीआई अदालत ने सेक्टर-7 निवासी राजेश चड्ढा और उनकी पत्नी मंजू चड्ढा को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने दंपती पर 85 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। दंपती के खिलाफ आय से अधिक संपति होने का मामला दर्ज था।
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषियों ने लोक सेवक होते हुए व्यक्तिगत फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। यह मानव अधिकारों, विभाग की नीतियों और जनहित के लिए चुनौती है। यह कानून का उल्लघंन है। एक भ्रष्ट अधिकारी पूरे विभाग के प्रति लोगों में अविश्वास पैदा कर देता है। सार्वजनिक कार्यालयों में भ्रष्टाचार का कैंसर कई बार होता है। यह कैंसर सांविधानिक शासन को खतरे में डालता है।
इसलिए ऐसे लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी बहुत आवश्यक है, जो जनता में विभाग के प्रति अविश्वास पैदा करता है। दोषियों ने अदालत में कहा कि उनके दो अविवाहित बच्चे हैं, उनकी नौकरी पहले ही जा चुकी है। बच्चों का उनके अलावा कोई नहीं है। यह कहते हुए दोषियों ने कम से कम सजा की मांग की।
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जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषियों ने लोक सेवक होते हुए व्यक्तिगत फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। यह मानव अधिकारों, विभाग की नीतियों और जनहित के लिए चुनौती है। यह कानून का उल्लघंन है। एक भ्रष्ट अधिकारी पूरे विभाग के प्रति लोगों में अविश्वास पैदा कर देता है। सार्वजनिक कार्यालयों में भ्रष्टाचार का कैंसर कई बार होता है। यह कैंसर सांविधानिक शासन को खतरे में डालता है।
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इसलिए ऐसे लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी बहुत आवश्यक है, जो जनता में विभाग के प्रति अविश्वास पैदा करता है। दोषियों ने अदालत में कहा कि उनके दो अविवाहित बच्चे हैं, उनकी नौकरी पहले ही जा चुकी है। बच्चों का उनके अलावा कोई नहीं है। यह कहते हुए दोषियों ने कम से कम सजा की मांग की।
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पति असिस्टेंट इंजीनियर, पत्नी सीनियर असिस्टेंट
राजेश चड्ढा यूटी में असिस्टेंट इंजीनियर और उनकी पत्नी पंजाब सचिवालय में सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थी। मामला 2009 का है। एक कॉन्ट्रैक्टर ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि राजेश चड्ढा ने उसके 1.90 लाख रुपये के लंबित बिलों को क्लीयर करने के लिए 70 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। जनवरी 2012 में इस मामले में दोषी करार देते हुए राजेश को ढाई साल की सजा सुनाई गई थी।
इसके बाद सीबीआई ने उनके आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान कुछ दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिसमें उनकी संपत्ति आय से अधिक होने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में 6 सितंबर 2012 को दोनों (दंपती) के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी, जिसमें बरामद दस्तावेज भी शामिल थे।
आरोपी मंजू ने अपने पति को निवेश दस्तावेजों को तैयार करने के लिए अपने नाम का उपयोग करने की अनुमति दी थी। इसलिए सीबीआई ने उनको भी आरोपी बनाया था। उस समय उनकी संपत्ति 98 लाख से अधिक पाई गई थी। अदालत ने कहा था कि दोषी अपनी संपत्ति की जानकारी अपने विभाग को देने और बरामद दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति को गलत साबित करने में विफल रहा, इसलिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद सीबीआई ने उनके आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान कुछ दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिसमें उनकी संपत्ति आय से अधिक होने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में 6 सितंबर 2012 को दोनों (दंपती) के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी, जिसमें बरामद दस्तावेज भी शामिल थे।
आरोपी मंजू ने अपने पति को निवेश दस्तावेजों को तैयार करने के लिए अपने नाम का उपयोग करने की अनुमति दी थी। इसलिए सीबीआई ने उनको भी आरोपी बनाया था। उस समय उनकी संपत्ति 98 लाख से अधिक पाई गई थी। अदालत ने कहा था कि दोषी अपनी संपत्ति की जानकारी अपने विभाग को देने और बरामद दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति को गलत साबित करने में विफल रहा, इसलिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।