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मुसीबत का मारा निगम बेचारा, बजट की कमी से जूझ रहे निगम पर गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की मशीनें बदलने का भी बोझ
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चंडीगढ़। नगर निगम की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर बजट की कमी से विकास कार्यों का पहिया थम गया है, वहीं दूसरी ओर अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर) सेंटर की रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी हैं। एनआईटीटीटीआर ने स्पष्ट कहा है कि गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की सभी मशीनें बदलनी होंगी। अब निगम इसके लिए फंड कहां से लाएगा, यह सबसे बड़ी समस्या है। यह मुद्दा 24 जुलाई को रेवेन्यू बढ़ाने वाली बैठक में उठेगा। फरवरी माह की बैठक में कमिश्नर केके यादव ने स्पष्ट कहा था कि कोरोना महामारी के बाद प्रशासन ने बजट में 30 प्रतिशत की कटौती कर दी है। प्रशासन से जो 425 करोड़ की ग्रांट मिलनी थी, अब वह 340 करोड़ की रह गई है। अब विकास कार्य करने तक के रुपए नहीं हैं।
प्रशासन ने भी अप्रैल, मई व जून के खर्चों के लिए निगम को 35-35 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए थे। वहीं जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए प्रशासन ने मात्र 30-30 करोड़ रुपए ही स्वीकृत किए हैं। उसके बाद मेयर राजबाला मलिक ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए 7 सदस्यीय कमेटी गठित की जिसकी रिपोर्ट भी 25 जुलाई को दी जाएगी। अब निगम के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि कैसे जेपी प्लांट का संचालन किया जाए। चूंकि हाल ही में एनआईटीटीटीआर की टीम ने प्लांट का निरीक्षण किया था। उसके बाद रिपोर्ट में कहा है कि सभी मशीनों को बदलना पड़ेगा। ऐसे में मशीनों का खर्चा निगम कहां से लाएगा यह बड़ा सवाल है।
कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो लगेगा जुर्माना
जल्द से जल्द कचरा प्रोसेस न होने पर निगम को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से जुर्माना भरना होगा। ऐसी स्थिति में निगम के सामने बड़ा संकट खड़ा हुआ है। एनजीटी ने निगम से स्पष्ट कहा था कि कंपनी कचरा प्रोसेस नहीं कर पा रही है तो निगम प्लांट को संचालित करे। किसी भी हाल में कचरा सेग्रीगेशन व प्रोसेसिंग होना चाहिए। नहीं तो निगम जुर्माना भरने को तैयार रहे।
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रुड़की आईआईटी की रिपोर्ट के बाद निगम लेगा फैसला
निगम को अभी आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही निगम मशीनों के बदलने व अन्य विकल्पों पर निर्णय लेगा। चूंकि आईआईटी रुड़की की टीम ने प्लांट में विस्तृत रूप से निरीक्षण किया था। जो भी स्थिति बनेगी सदन के सामने रखा जाएगा। वहां से जो भी फैसला होगा वह किया जाएगा।
-केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
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प्रशासन ने भी अप्रैल, मई व जून के खर्चों के लिए निगम को 35-35 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए थे। वहीं जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए प्रशासन ने मात्र 30-30 करोड़ रुपए ही स्वीकृत किए हैं। उसके बाद मेयर राजबाला मलिक ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए 7 सदस्यीय कमेटी गठित की जिसकी रिपोर्ट भी 25 जुलाई को दी जाएगी। अब निगम के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि कैसे जेपी प्लांट का संचालन किया जाए। चूंकि हाल ही में एनआईटीटीटीआर की टीम ने प्लांट का निरीक्षण किया था। उसके बाद रिपोर्ट में कहा है कि सभी मशीनों को बदलना पड़ेगा। ऐसे में मशीनों का खर्चा निगम कहां से लाएगा यह बड़ा सवाल है।
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कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो लगेगा जुर्माना
जल्द से जल्द कचरा प्रोसेस न होने पर निगम को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से जुर्माना भरना होगा। ऐसी स्थिति में निगम के सामने बड़ा संकट खड़ा हुआ है। एनजीटी ने निगम से स्पष्ट कहा था कि कंपनी कचरा प्रोसेस नहीं कर पा रही है तो निगम प्लांट को संचालित करे। किसी भी हाल में कचरा सेग्रीगेशन व प्रोसेसिंग होना चाहिए। नहीं तो निगम जुर्माना भरने को तैयार रहे।
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रुड़की आईआईटी की रिपोर्ट के बाद निगम लेगा फैसला
निगम को अभी आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही निगम मशीनों के बदलने व अन्य विकल्पों पर निर्णय लेगा। चूंकि आईआईटी रुड़की की टीम ने प्लांट में विस्तृत रूप से निरीक्षण किया था। जो भी स्थिति बनेगी सदन के सामने रखा जाएगा। वहां से जो भी फैसला होगा वह किया जाएगा।
-केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम