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कचरे का पहाड़ हटाने के लिए निगम ने केंद्र से मांगा 76 करोड़
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चंडीगढ़। डड्डूमाजरा में बने कचरे के दूसरे पहाड़ को खत्म करने के लिए नगर निगम ने केंद्र को प्रस्ताव भेज दिया है। 76 करोड़ की लागत से आठ एकड़ भूमि से 7.66 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाया जाएगा। नगर निगम ने केंद्र को बताया है कि जेपी समूह तय मानक के अनुसार, कचरा निस्तारित नहीं कर रहा था, जिससे डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ बन गया। पुराना कचरा न होने के चलते अब इसके निस्तारण में अधिक खर्च आएगा।
सेक्टर-25 स्थित कचरा निस्तारण प्लांट में सूखा कचरा पूरी तरह निस्तारित न होने से उसे डंपिंग ग्राउंड में भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कचरे को धकेलकर डड्डूमाजरा कॉलोनी की तरफ बढ़ा दिया गया है, ताकि कचरे का पहाड़ ऊंचा न दिखे। इस संबंध में स्मार्ट सिटी ने अपनी ओर से एक सर्वे कराया था, जिसमें पता चला था कि डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ तैयार हो गया है।
नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि पांच लाख मीट्रिक टन कचरे को निस्तारित करने के लिए अभी स्मार्ट सिटी प्रति टन 574 रुपये के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से दे रहा है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर अनुमान निकाला गया, जिसमें पता चला कि 7.66 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाने के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार सभी शहरों को ग्रांट दे रही है। इसमें कचरे को शत-प्रतिशत खत्म करने के लिए पूरी राशि केंद्र से मिलनी है।
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जेपी समूह से वसूलना था खर्चा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। उसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, लेकिन मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। उसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकने लगे। अदालत में जेपी समूह और निगम के बीच सुनवाई चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जेपी समूह की वजह से नए कचरे का पहाड़ बना है। इस कचरे के निस्तारण के रुपये कंपनी से लेंगे, लेकिन केंद्र जल्द ही स्मार्ट सिटी को अपने क्षेत्र में लगे कचरे के ढेर को हटाने का लक्ष्य देने वाला है। इस कारण निगम को ही अपने खर्चे पर कचरे का निस्तारण करना पड़ रहा है।
प्लांट में पड़ा है लगभग 25 हजार मीट्रिक टन कचरा
प्लांट में भी इस समय 25 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिसे निगम को खाली करवाकर डंपिंग ग्राउंड पर ही भेजना है। दूसरी ओर शहर का कचरा जो कि निस्तारित नहीं हो पा रहा है, वह भी डंपिंग ग्राउंड में जा रहा है। इस दौरान करोड़ों रुपये से बनाए गए सैनेटरी लैंडफिल पर भी निगम ने कचरा डाल दिया है, जिससे हल्की बारिश में ही लीचैट सीधा लोगों के घरों तक पहुंच गया था। इस कचरे के निस्तारण में भी निगम को खर्च करना होगा।
जून 2020 में निगम ने प्लांट को लिया था कब्जे में
एनजीटी के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। उसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, मगर मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। उसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकना शुरू कर दिया। दबाव बढ़ने के साथ निगम ने प्लांट को निजी हाथों में देने का फैसला लिया।
कोट-
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी शहरों को कचरा हटाने के लिए फंड दिया जा रहा है। हमने भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा है और 76 करोड़ रुपये मांगे हैं। इससे आठ एकड़ भूमि को बिल्कुल साफ हो जाएगी।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
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सेक्टर-25 स्थित कचरा निस्तारण प्लांट में सूखा कचरा पूरी तरह निस्तारित न होने से उसे डंपिंग ग्राउंड में भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कचरे को धकेलकर डड्डूमाजरा कॉलोनी की तरफ बढ़ा दिया गया है, ताकि कचरे का पहाड़ ऊंचा न दिखे। इस संबंध में स्मार्ट सिटी ने अपनी ओर से एक सर्वे कराया था, जिसमें पता चला था कि डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ तैयार हो गया है।
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नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि पांच लाख मीट्रिक टन कचरे को निस्तारित करने के लिए अभी स्मार्ट सिटी प्रति टन 574 रुपये के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से दे रहा है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर अनुमान निकाला गया, जिसमें पता चला कि 7.66 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाने के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार सभी शहरों को ग्रांट दे रही है। इसमें कचरे को शत-प्रतिशत खत्म करने के लिए पूरी राशि केंद्र से मिलनी है।
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जेपी समूह से वसूलना था खर्चा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। उसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, लेकिन मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। उसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकने लगे। अदालत में जेपी समूह और निगम के बीच सुनवाई चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जेपी समूह की वजह से नए कचरे का पहाड़ बना है। इस कचरे के निस्तारण के रुपये कंपनी से लेंगे, लेकिन केंद्र जल्द ही स्मार्ट सिटी को अपने क्षेत्र में लगे कचरे के ढेर को हटाने का लक्ष्य देने वाला है। इस कारण निगम को ही अपने खर्चे पर कचरे का निस्तारण करना पड़ रहा है।
प्लांट में पड़ा है लगभग 25 हजार मीट्रिक टन कचरा
प्लांट में भी इस समय 25 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिसे निगम को खाली करवाकर डंपिंग ग्राउंड पर ही भेजना है। दूसरी ओर शहर का कचरा जो कि निस्तारित नहीं हो पा रहा है, वह भी डंपिंग ग्राउंड में जा रहा है। इस दौरान करोड़ों रुपये से बनाए गए सैनेटरी लैंडफिल पर भी निगम ने कचरा डाल दिया है, जिससे हल्की बारिश में ही लीचैट सीधा लोगों के घरों तक पहुंच गया था। इस कचरे के निस्तारण में भी निगम को खर्च करना होगा।
जून 2020 में निगम ने प्लांट को लिया था कब्जे में
एनजीटी के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। उसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, मगर मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। उसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकना शुरू कर दिया। दबाव बढ़ने के साथ निगम ने प्लांट को निजी हाथों में देने का फैसला लिया।
कोट-
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी शहरों को कचरा हटाने के लिए फंड दिया जा रहा है। हमने भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा है और 76 करोड़ रुपये मांगे हैं। इससे आठ एकड़ भूमि को बिल्कुल साफ हो जाएगी।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम