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लॉकडाउन से अवसादग्रस्त हो रहे लोग...किसी की नींद उड़ी, किसी को भूख नहीं, कोई बैठा गुमसुम

Fri, 03 Apr 2020 11:28 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 03 Apr 2020 11:28 AM IST
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Coronavirus, Lockdown Side Effects, People Suffering from Depression
प्रतीकात्मक तस्वीर
एक तरफ कोरोना की दहशत, दूसरी तरफ लॉकडाउन की बंदिशें, आवागमन के सभी साधन बंद और अपने घरों से दूर अजीबोगरीब माहौल में फंसे प्रवासी मजदूर। सड़कों, खेतों और रेलवे लाइनों पर कंधे पर समान ढोए पैदल ही मजदूर घरों की ओर चल रहे थे। मगर अब इन मजदूरों को इसकी भी इजाजत नहीं। अगले आदेशों तक जिलों में सरकार द्वारा लगाए गए राहत शिविरों में ही रहना पड़ेगा।
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हरियाणा के प्रत्येक जिले में इन प्रवासी मजदूरों के लिए कई शिविर बनाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन के कंधों पर इन शिविरों में रहने वाले मजदूरों की पूरी जिम्मेदारी है। कई दिनों से मजदूर इन शिविरों में रह रहे हैं। अब इन्हें यहां कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से मजदूर मौजदा हालातों को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। वे अपने घर और घर वालों को याद करके डिप्रेशन का शिकार होने लगे हैं। मजदूरों की हालात देखते हुए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की मेंटल हेल्थ विंग ने मोर्चा संभाल लिया है।
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मनोचिकित्सकों की विशेष टीमें भी तैयार

डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डॉक्टर वीणा सिंह की देखरेख में इसके लिए एक विशेष हेल्थ प्रोग्राम तैयार किया गया है। इतना ही नहीं मनोचिकित्सकों की निगरानी में सभी जिलों के लिए विशेष टीमें भी तैयार की गई हैं, जो डिप्रेशन में जा रहे मजदूरों को अवसाद से बाहर निकालने में मदद करेंगी। हेल्थ निदेशक डॉक्टर वीणा सिंह ने बताया कि वे खुद भी विभिन्न शिविरों का दौरा कर रही हैं। इस दौरान यह देखने में आया कि अवसाद से घिरे कई मजदूरों को भूख नहीं लग रही। कोई  तीन दिन से सोया नहीं तो किसी की प्रवृत्ति अचानक झगड़ालू बन गई है। कोई घंटों गुमसुम बैठा रहता है और कोई अचानक ही आंसू बहाने लगता है।

डॉ. वीणा  के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की गाइडलाइंस के चलते हमने सभी जिलों के लिए विशेष टीमें और प्रोग्राम तैयार किए हैं। ये टीमें इन लोगों को अवसाद से बाहर निकालकर मौजूदा परिस्थितियों से रूबरू कराते हुए उन्हें जागरूक करेंगी। दरअसल ये मजदूर घर न जाने देने के कारण और शहरों में जबरन रोके जाने की वजह से भी खौफजदा थे। इसलिए हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने यह निर्देश भी दिए हैं कि पुलिस प्रशासन इन मजदूरों के साथ शिविरों में पूरी तरह मानवीय व्यवहार करें।

खेलों के सहारे बहलाएंगे मजदूरों का मन

स्वास्थ्य विभाग की टीमों में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, इस क्षेत्र में काम करने वाले सोशल वर्कर, नर्सिंग स्टाफ, काउंसलर इत्यादि शामिल होंगे। सभी जिलों के सिविल सर्जन से कहा गया है कि वे जिला शिक्षा अधिकारियों से इस काम के लिए साइकोलॉजी विषय के पीजीटी टीचरों की भी मदद लें। जिला उपायुक्तों को भी निर्देश दिए गए हैं कि काउंसिलिंग के लिए जरूरी बंदोबस्त शिविरों में ही करवाएं।

इसके अलावा खेल विभाग की मदद भी ली जा रही है। मजदूरों के लिए फुटबॉल, वालीबॉल और कैरम इत्यादि खेलों की व्यवस्था की जा रही है। इन खेलों में सभी खिलाड़ी दूर-दूर रहकर खेलते हैं। मुख्य सचिव की ओर से इन शिविरों में टीवी लगाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
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