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पंजाब एक्साइज विभाग ने नुकसान होने की अफवाहों पर लगाया विराम, दावा- कोई घाटा नहीं हुआ
Sat, 16 May 2020 10:52 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 16 May 2020 10:52 AM IST
सार
- लॉकडाउन की अवधि में कुछ घाटे का अभी अनुमान नहीं
- विभाग के अफसरों ने कैप्टन को दिया मुनाफे का ब्योरा
- लॉकडाउन के कारण फीस संबंधी पैसे की वसूली नहीं हुई
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विस्तार
घाटे की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए, पंजाब आबकारी विभाग ने दावा किया है कि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान उसे कोई घाटा नहीं हुआ। केवल कोविड-19 के कारण लगे कर्फ्यू/लॉकडाउन के परिणामस्वरूप कुछ वित्तीय नुकसान हुआ है, जिसका अभी अनुमान लगाया जाना बाकी है।
यह जानकारी शुक्रवार को आबकारी विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ नई आबकारी नीति में किए संशोधनों के मद्देनजर उत्पन्न हालात की समीक्षा संबंधी मीटिंग में दी गई। इस बीच, शुक्रवार को राज्य के कंटेंनमेंट-रेड जोन के शराब ठेकों को छोड़ बाकी सभी इलाकों में 589 ग्रुपों की तरफ से चलाए जा रहे 4404 ठेके खुल गए हैं।
आबकारी विभाग की तरफ से समीक्षा मीटिंग में बताया गया कि कोविड महामारी के कारण लागू लॉकडाउन /कर्फ्यू के कारण हुए नुकसान के अलावा विभाग को 2019 -20 के दौरान कोई वित्तीय घाटा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री की तरफ से विभाग को निर्देश दिए गए कि ठेके की नीलामी बाबत बाकी बचे कामों को तेजी से निपटाया जाए।
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कैप्टन ने यह भी कहा कि आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने विभाग को लॉकडाउन के कारण पैदा हुए हालात की जमीनी हकीकत का समय पर पता लगाने के लिए हर शुक्रवार वित्तीय वसूलियों का रिव्यू करने को भी कहा।
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यह जानकारी शुक्रवार को आबकारी विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ नई आबकारी नीति में किए संशोधनों के मद्देनजर उत्पन्न हालात की समीक्षा संबंधी मीटिंग में दी गई। इस बीच, शुक्रवार को राज्य के कंटेंनमेंट-रेड जोन के शराब ठेकों को छोड़ बाकी सभी इलाकों में 589 ग्रुपों की तरफ से चलाए जा रहे 4404 ठेके खुल गए हैं।
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आबकारी विभाग की तरफ से समीक्षा मीटिंग में बताया गया कि कोविड महामारी के कारण लागू लॉकडाउन /कर्फ्यू के कारण हुए नुकसान के अलावा विभाग को 2019 -20 के दौरान कोई वित्तीय घाटा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री की तरफ से विभाग को निर्देश दिए गए कि ठेके की नीलामी बाबत बाकी बचे कामों को तेजी से निपटाया जाए।
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कैप्टन ने यह भी कहा कि आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने विभाग को लॉकडाउन के कारण पैदा हुए हालात की जमीनी हकीकत का समय पर पता लगाने के लिए हर शुक्रवार वित्तीय वसूलियों का रिव्यू करने को भी कहा।
2018-19 में मामूली गिरावट पर 2016-17 से लगातार इजाफा
आबकारी विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि भले ही वित्त वर्ष 2019-20 की वसूलियों को अभी अंतिम रूप दिया जाना है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि इस साल की आबकारी आय पिछले वित्तीय वर्ष की अपेक्षा ज्यादा है। तथ्य पेश करते हुए विभाग ने बताया कि साल 2017 में कैप्टन सरकार बनने के बाद वित्तीय वसूलियों में उल्लेखनीय और रचनात्मक विस्तार हुआ है।
वित्त वर्ष 2016-17 में 4405 करोड़ से साल 2017-18 में राज्य के खजाने को आय बढ़कर 5135.68 करोड़ हुई, जो एक साल में 16 फीसदी का विस्तार है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि साल 2018 -19 में कोटा और कीमतें घटने के साथ-साथ वैट, जीएसटी में कुछ तबदीलियों के साथ 14 प्रतिशत तक बढ़ गया, जिसके कारण आबकारी विभाग की आय में मामूली गिरावट आई। यह घाटा मामूली था और 5073.79 करोड़ रुपये की असली वसूली हुई।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019 -20 में आबकारी विभाग को हुई आय 5015 करोड़ रुपए है। हालांकि, 2019 -20 की आबकारी नीति के मुताबिक आवेदनों की 50 करोड़ रुपए की राशि आबकारी एवं कर सेवाएं एजेंसी (ईटीटीएसए) को हस्तांतरित कर दी गई। इसके अलावा 125 करोड़ रुपए के वैट को शामिल किया गया और इसे ध्यान में रखते कुल प्राप्तियां 5222 करोड़ रुपए होंगी।
लॉकडाउन के कारण फीस संबंधी पैसे की वसूली नहीं हुई
अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में 22 मार्च को कर्फ्यू लगने और 23 मार्च को कर्फ्यू /लॉकडाउन के कारण 2020 -21 के लिए सभी फ़ीसों (तय लाइसेंस फीस और अन्य निर्धारित लाइसेंस फीस) जो मार्च में जमा करवानी थी, नहीं करवाई जा सकी।
इनमें ग्रुपों के नवीनीकरण के एवज में 278 करोड़ रुपए, नये अलाट किए ग्रुपों से लगभग 68 करोड़ रुपए और अन्य वसूलियों के 120 करोड़ रुपए कर्फ्यू /लॉकडाउन की बंदिशों के कारण जमा नहीं करवाए जा सके। इसी कारण राज्य के खजाने में मार्च, 2020 में 466 करोड़ रुपए नहीं आए जबकि 5 करोड़ रुपए टैक्सों और ईटीटीएसए में चले गए।
वित्त वर्ष 2016-17 में 4405 करोड़ से साल 2017-18 में राज्य के खजाने को आय बढ़कर 5135.68 करोड़ हुई, जो एक साल में 16 फीसदी का विस्तार है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि साल 2018 -19 में कोटा और कीमतें घटने के साथ-साथ वैट, जीएसटी में कुछ तबदीलियों के साथ 14 प्रतिशत तक बढ़ गया, जिसके कारण आबकारी विभाग की आय में मामूली गिरावट आई। यह घाटा मामूली था और 5073.79 करोड़ रुपये की असली वसूली हुई।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019 -20 में आबकारी विभाग को हुई आय 5015 करोड़ रुपए है। हालांकि, 2019 -20 की आबकारी नीति के मुताबिक आवेदनों की 50 करोड़ रुपए की राशि आबकारी एवं कर सेवाएं एजेंसी (ईटीटीएसए) को हस्तांतरित कर दी गई। इसके अलावा 125 करोड़ रुपए के वैट को शामिल किया गया और इसे ध्यान में रखते कुल प्राप्तियां 5222 करोड़ रुपए होंगी।
लॉकडाउन के कारण फीस संबंधी पैसे की वसूली नहीं हुई
अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में 22 मार्च को कर्फ्यू लगने और 23 मार्च को कर्फ्यू /लॉकडाउन के कारण 2020 -21 के लिए सभी फ़ीसों (तय लाइसेंस फीस और अन्य निर्धारित लाइसेंस फीस) जो मार्च में जमा करवानी थी, नहीं करवाई जा सकी।
इनमें ग्रुपों के नवीनीकरण के एवज में 278 करोड़ रुपए, नये अलाट किए ग्रुपों से लगभग 68 करोड़ रुपए और अन्य वसूलियों के 120 करोड़ रुपए कर्फ्यू /लॉकडाउन की बंदिशों के कारण जमा नहीं करवाए जा सके। इसी कारण राज्य के खजाने में मार्च, 2020 में 466 करोड़ रुपए नहीं आए जबकि 5 करोड़ रुपए टैक्सों और ईटीटीएसए में चले गए।
राज्य भर में 4674 में से 4404 ठेके खुल गए
आबकारी और कर विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, नवीनीकृत/अलॉट किए गए 4674 ठेकों में से 4404 ठेके राज्य भर में खुल गए हैं। सीमित जोन (कंटोनमेंट जोन) वाले इलाकों में अभी ठेके नहीं खोले जा सके। इसके अलावा मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद विभाग ने 91 ग्रुपों पर आधारित 1235 ठेकों के लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी है, जो राज्य में कर्फ्यू/लॉकडाउन के कारण मुकम्मल नहीं की जा सकी थी।
589 ग्रुपों की तरफ से आज तक खोले गए 4404 ठेकों संबंधी विस्तार में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि 54 ग्रुपों ने अमृतसर -1, अमृतसर -2, गुरदासपुर, पठानकोट और तरनतारन में 669 ठेकेे खोलें हैं। इसी तरह होशियारपुर, जालंधर -1, जालंधर -2, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिलों में 138 ग्रुपों ने 977 ठेके खोलें हैं। लुधियाना -1, लुधियाना -2, लुधियाना -3 और फतेहगढ़ साहिब में 147 ग्रुपों की तरफ से चलाए जा रहे 742 ठेकों को खोला गया है।
जबकि पटियाला, संगरूर और बरनाला जिलों में 117 ग्रुपों ने 718 ठेके खोले हैं। रूपनगर और मोहाली जिलों में 55 ग्रुपों की तरफ से 340 ठेके खोलें गए हैं। इनके अलावा फिऱोजपुर, फाजिल्का, मोगा और मुक्तसर जिलों में 26 ग्रुपों की तरफ से 485 ठेके खोले गए हैं। इसी तरह फरीदकोट, बठिंडा और मानसा जिलों में 52 ग्रुपों की तरफ से 473 ठेके खोले गए हैं।
589 ग्रुपों की तरफ से आज तक खोले गए 4404 ठेकों संबंधी विस्तार में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि 54 ग्रुपों ने अमृतसर -1, अमृतसर -2, गुरदासपुर, पठानकोट और तरनतारन में 669 ठेकेे खोलें हैं। इसी तरह होशियारपुर, जालंधर -1, जालंधर -2, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिलों में 138 ग्रुपों ने 977 ठेके खोलें हैं। लुधियाना -1, लुधियाना -2, लुधियाना -3 और फतेहगढ़ साहिब में 147 ग्रुपों की तरफ से चलाए जा रहे 742 ठेकों को खोला गया है।
जबकि पटियाला, संगरूर और बरनाला जिलों में 117 ग्रुपों ने 718 ठेके खोले हैं। रूपनगर और मोहाली जिलों में 55 ग्रुपों की तरफ से 340 ठेके खोलें गए हैं। इनके अलावा फिऱोजपुर, फाजिल्का, मोगा और मुक्तसर जिलों में 26 ग्रुपों की तरफ से 485 ठेके खोले गए हैं। इसी तरह फरीदकोट, बठिंडा और मानसा जिलों में 52 ग्रुपों की तरफ से 473 ठेके खोले गए हैं।