{"_id":"5ecf4bca8ebc3e903730176d","slug":"coronavirus-lockdown-chandigarh-administration-sent-migrant-workers-from-bapudham-colony","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः बापूधाम कॉलोनी से दो दिन में 675 लोगों को भेजा यूपी, लापरवाही पड़ सकती है भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः बापूधाम कॉलोनी से दो दिन में 675 लोगों को भेजा यूपी, लापरवाही पड़ सकती है भारी
Thu, 28 May 2020 10:57 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 May 2020 10:57 AM IST
विज्ञापन
प्रवासी मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ की बापूधाम कालोनी से दो दिनों में 675 लोगों को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से उत्तर प्रदेश के सात शहरों में भेज दिया गया है। जबकि कंटेंनमेंट जोन से न तो कोई बाहर आ सकता है और न ही अंदर जा सकता है। ऐसे में यूटी प्रशासन की यह लापरवाही उत्तर प्रदेश पर भारी पड़ सकती है। इतना ही नहीं कालोनी में रहने वाले अन्य प्रवासियों को भी भेजने की सूची तैयार हो चुकी है, जिन्हें 31 मई तक यूपी और बिहार भेजा जाएगा।
यह लापरवाही तब की जा रही है, जब बापूधाम में लगातार संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। हालांकि अफसरों का दावा है कि जिन लोगों को भेजा जा रहा है, वह कंटेनमेंट जोन के बाहर कालोनियों में रहते हैं। लेकिन बापूधाम इलाके में अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने और एक साथ लोगों के घूमने की कई तस्वीरें सार्वजनिक हो चुकी हैं, ऐसे में यह लापरवाही यूपी और बिहार पर भारी पड़ सकती है।
बापूधाम कालोनी में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 200 के पार पहुंच चुका है और यूटी प्रशासन ने कालोनी को पूरी तरह सील कर कंटेनमेंट जोन घोषित कर रखा है। यहां न ही किसी के भीतर प्रवेश की अनुमति है और न ही बाहर निकलने की। इसके बाद भी यूटी प्रशासन कालोनी में रहने वाले प्रवासियों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेज रहा है। मंगलवार और बुधवार को 675 प्रवासियों को उत्तर प्रदेश के सात जिलों मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, जौनपुर और सुल्तानपुर भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह लापरवाही तब की जा रही है, जब बापूधाम में लगातार संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। हालांकि अफसरों का दावा है कि जिन लोगों को भेजा जा रहा है, वह कंटेनमेंट जोन के बाहर कालोनियों में रहते हैं। लेकिन बापूधाम इलाके में अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने और एक साथ लोगों के घूमने की कई तस्वीरें सार्वजनिक हो चुकी हैं, ऐसे में यह लापरवाही यूपी और बिहार पर भारी पड़ सकती है।
विज्ञापन
बापूधाम कालोनी में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 200 के पार पहुंच चुका है और यूटी प्रशासन ने कालोनी को पूरी तरह सील कर कंटेनमेंट जोन घोषित कर रखा है। यहां न ही किसी के भीतर प्रवेश की अनुमति है और न ही बाहर निकलने की। इसके बाद भी यूटी प्रशासन कालोनी में रहने वाले प्रवासियों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेज रहा है। मंगलवार और बुधवार को 675 प्रवासियों को उत्तर प्रदेश के सात जिलों मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, जौनपुर और सुल्तानपुर भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
कैसे तय होता है कंटेनमेंट जोन
कंटेनमेंट जोन को लेकर भी अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कंटेनमेंट जोन को तय करने का अलग फार्मूला अपनाया जाता है। अगर किसी इलाके में कोरोना का एक पॉजिटिव केस आता है तो शहरी क्षेत्र में उस कालोनी, मोहल्ले या वार्ड की सीमा के अंदर कम से कम 400 मीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। यदि एक से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस आते हैं तो प्रशासन एक किलोमीटर के एरिये को कंटेनमेंट घोषित कर सकता है। प्रशासन यह निर्णय इसलिए लेता है कि संक्रमण का दायरा अन्य क्षेत्रों में न बढ़ सके।
हां, बापूधाम से लोगों को उनके घर भेजा जा रहा है। यह वह लोग हैं, जो कंटेनमेंट एरिया के बाहर कालोनी में रहते हैं। घर न जाने के लिए उन पर किसी प्रकार का दवाब नहीं बनाया जा सकता, इसलिए उनकी घर रवानगी की जा रही है।
- यशपाल गर्ग, आईएएस, सचिव, समाज कल्याण विभाग, चंडीगढ़
हां, बापूधाम से लोगों को उनके घर भेजा जा रहा है। यह वह लोग हैं, जो कंटेनमेंट एरिया के बाहर कालोनी में रहते हैं। घर न जाने के लिए उन पर किसी प्रकार का दवाब नहीं बनाया जा सकता, इसलिए उनकी घर रवानगी की जा रही है।
- यशपाल गर्ग, आईएएस, सचिव, समाज कल्याण विभाग, चंडीगढ़