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कोरोना वायरसः कर्फ्यू के कारण विसर्जन का इंतजार कर रहीं अस्थियां, मायूस होकर लौट रहे परिवार
Mon, 30 Mar 2020 02:42 PM IST
खुशबू गोयल
अमित शर्मा, मोहाली
अमित शर्मा, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 30 Mar 2020 02:42 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना महामारी के चलते लगे कर्फ्यू की वजह से उन सैकड़ों परिवारों के पूर्वजों की अस्थियां गंगा विसर्जन के लिए तरस रही हैं, जिनका कुछ समय पहले स्वर्गवास हो गया था। उत्तराखंड प्रशासन ने बाहरी लोगों की अपने राज्य में एंट्री पूरी तरह से बंद कर रखी है। ऐसे में बाहरी राज्यों के लोगों को उत्तराखंड की सीमा से ही वापस लौटना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जिन लोगों ने कर्फ्यू पास बनवाए हुए हैं, उन्हें भी वापस भेजा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मोहाली में श्मशानघाट के लॉकर भी अस्थियों से भर गए हैं। यहां अस्थ्यियां रखने में जगह की दिक्कत तक आ रही है।
वहीं, इस वजह से लोगों को अपने रीति रिवाज पूरे करने में अड़चन आ रही है। केंद्रीय मंदिर परिषद कमेटी के प्रधान जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने पंजाब सरकार और उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि यह मामला गंभीर है। इसमें तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और बाहरी राज्य से आने वाले उन लोगों को उत्तराखंड में आने दें, जो हरिद्वार जाकर अपने धार्मिक रीति-रिवाज पूरे करना चाहते हैं। कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। जरूरी कामों के लिए कर्फ्यू पास देख कर आने-जाने की अनुमति दी जा रही है।
लेकिन जिन लोगों के अपने परिजनों या जानकारों का कुछ समय पहले देहांत हो गया हो तो उन्हें अस्थियां गंगा में विसर्जित करने में दिक्कत आ रही है। उत्तराखंड प्रशासन की ओर से बाहरी राज्यों के लोगों को शहर से 30 किलोमीटर बाहर ही रोक दिया जा रहा है। इसके साथ ही साफ कहा जा रहा है कि उनकी शहर में एंट्री नहीं हो सकती। ऐेसे में हजारों रुपये खर्च कर वहां पहुंच चुके लोगों को राज्य में नहीं आने देने के कारण काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। जबकि मोहाली के श्मशान घाट में बने सभी लॉकर अस्थियों से भर गए हैं। जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
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अस्थियां वापस लानी पड़ी घर, सरकार को लिखा पत्र
शहर के एक परिवार में बुजुर्ग का कुछ समय पहले देहांत हो गया था। मृतक के परिवारिक मेंबर मोहाली प्रशासन से बाकायदा अनुमति और पास बनाकर अस्थियों को विसर्जित करने के लिए हरिद्घार गए थे। लेकिन उन्हें हरिद्घार जाने की अनुमति नहीं मिली। ऐसे में उन्हें अस्थियां लेकर वापस घर लौटना पड़ा। जिससे परिवार को काफी परेशानी उठानी पड़ी रही। परिवार का कहना है कि यह गंभीर मामला है। इसमें सरकार को दखल देना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखा है।
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वहीं, इस वजह से लोगों को अपने रीति रिवाज पूरे करने में अड़चन आ रही है। केंद्रीय मंदिर परिषद कमेटी के प्रधान जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने पंजाब सरकार और उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि यह मामला गंभीर है। इसमें तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और बाहरी राज्य से आने वाले उन लोगों को उत्तराखंड में आने दें, जो हरिद्वार जाकर अपने धार्मिक रीति-रिवाज पूरे करना चाहते हैं। कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। जरूरी कामों के लिए कर्फ्यू पास देख कर आने-जाने की अनुमति दी जा रही है।
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लेकिन जिन लोगों के अपने परिजनों या जानकारों का कुछ समय पहले देहांत हो गया हो तो उन्हें अस्थियां गंगा में विसर्जित करने में दिक्कत आ रही है। उत्तराखंड प्रशासन की ओर से बाहरी राज्यों के लोगों को शहर से 30 किलोमीटर बाहर ही रोक दिया जा रहा है। इसके साथ ही साफ कहा जा रहा है कि उनकी शहर में एंट्री नहीं हो सकती। ऐेसे में हजारों रुपये खर्च कर वहां पहुंच चुके लोगों को राज्य में नहीं आने देने के कारण काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। जबकि मोहाली के श्मशान घाट में बने सभी लॉकर अस्थियों से भर गए हैं। जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
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अस्थियां वापस लानी पड़ी घर, सरकार को लिखा पत्र
शहर के एक परिवार में बुजुर्ग का कुछ समय पहले देहांत हो गया था। मृतक के परिवारिक मेंबर मोहाली प्रशासन से बाकायदा अनुमति और पास बनाकर अस्थियों को विसर्जित करने के लिए हरिद्घार गए थे। लेकिन उन्हें हरिद्घार जाने की अनुमति नहीं मिली। ऐसे में उन्हें अस्थियां लेकर वापस घर लौटना पड़ा। जिससे परिवार को काफी परेशानी उठानी पड़ी रही। परिवार का कहना है कि यह गंभीर मामला है। इसमें सरकार को दखल देना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखा है।