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पंजाब में कर्फ्यू खुलने के आसार नहीं, प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर रिजल्ट घोषित करने की सिफारिश

Wed, 29 Apr 2020 05:24 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 29 Apr 2020 05:24 AM IST
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Coronavirus in Punjab News In Hindi: Special committee submitted its report to Captain Amarinder Singh regarding Lockdown
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

पंजाब में 3 मई के बाद कर्फ्यू में कम से कम और 15 दिन का इजाफा होने की संभावना है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंपी अपनी रिपोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नीति आयोग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए देश और राज्य में कोरोना के फैलाव के भयावह आंकड़े पेश किए हैं।

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कमेटी ने नीति आयोग के हवाले से कहा है कि 31 मई के बाद तो हालात इतने खराब हो जाएंगे कि कोविड-19 के रोज 3680 केस सामने आएंगे। पंजाब में भी इस महामारी के पीड़ितों का आंकड़ा बढ़ेगा और मई में 4000 से 8000 तक केस सामने आ चुके होंगे। इसके साथ ही कमेटी ने कोरोना से निपटने के लिए मेडिकल तैयारियों को भी काफी कमजोर स्थिति में बताते हुए ठोस कदम उठाने की सिफारिश की है।
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3 मई के बाद लॉकडाउन को बढ़ाए जाने का फैसला केंद्र सरकार के फैसले के आधार पर लिया जाएगा लेकिन कर्फ्यू का फैसला राज्य सरकार 30 अप्रैल को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में ले सकती है। कमेटी ने साफ कर दिया है कि लॉकडाउन में ढील तभी दी जानी चाहिए, जब समुचित मेडिकल तैयारियां कर ली जाएं। 
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कमेटी का मानना है कि बिना तैयारी के लॉकडाउन में ढील देने से कोरोना का फैलाव और बढ़ेगा। स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन से बाहर निकलने के बाद मई और जून में वायरस के दबे रहने की संभावना है। कमेटी ने कहा कि विभिन्न संस्थानों के कोरोना को लेकर अनुमान कुछ भी हों लेकिन कर्फ्यू में ढील देने का फैसला लेने से पहले नीति आयोग के अनुमानों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

काफी कमजोर है पंजाब की मेडिकल तैयारी

कमेटी ने अपनी सिफारिशों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग की कोविड-19 के भयंकर फैलाव के अनुमानों को ध्यान में रखते हुए सूबे में मेडिकल तैयारियों को कमजोर माना है। कमेटी ने कोविड-19 संक्रमण से मुकाबले के लिए आईसीयू और नॉन-आईसीयू बेडों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है। विभाग के पास आइसोलेशन सेंटरों में अभी 2900 बेड हैं, जिन्हें 17000 करने के लिए सेंटरों की पहचान की जा रही है। इस उपलब्धता में 50 फीसदी इजाफे की जरूरत है।

राज्य में कोरोना के प्रतिदिन 1200 टेस्ट करने की क्षमता
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में कोविड-19 के लिए टेस्टिंग क्षमता फिलहाल काफी कम है। यहां तक कि राज्य के बड़े जिलों में भी टेस्टिंग की क्षमता समुचित मात्रा में उपलब्ध नहीं है। राज्य में अब तक कोविड-19 के मद्देनजर केवल 9000 टेस्ट किए गए हैं। सूबे में इस समय 25000 आरटी पीसीआर टेस्ट किटें ही उपलब्ध हैं। इनके चलते टेस्टिंग की रोजाना क्षमता केवल 1200 टेस्ट की है, जिसे बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर दसवीं का रिजल्ट घोषित करने की सिफारिश

कोविड-19 संकट से निपटने के लिए गठित की गई कमेटी ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को रिपोर्ट सौंपते हुए यह सिफारिश की है। कमेटी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रिपोर्ट में की सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि नया सत्र आरंभ होने में हो रही देरी को देखते हुए सभी स्कूलों को प्री बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आधार पर ही इस बार दसवीं की परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए जाएं।

इसके साथ ही कमेटी ने 12वीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर यह सिफारिश की है कि चूंकि 12वीं कक्षा के 70 फीसदी पेपर हो चुके हैं, इसलिए सोशल डिस्टेंस जैसे नियमों का पालन करते हुए राज्य में अतिरिक्त परीक्षा केंद्रों की स्थापना कर 12वीं के बाकी बचे पेपर भी करा लिए जाएं। दसवीं के परीक्षा परिणामों के लेकर कमेटी का कहना है कि यह माना जाता है कि प्री बोर्ड परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच काफी गहनता से होती है इसलिए परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों को कुछ विशेष राहत दी जा सकती है।

कमेटी ने कहा है कि रिजल्ट घोषित किए जाने के साथ ही विद्यार्थी अगली कक्षा के लिए तैयारी शुरू कर सकते हैं और स्कूल भी विद्यार्थियों की 11वीं कक्षा में एडमिशन का काम शुरू कर सकते हैं। पांचवीं और आठवीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर कमेटी ने सिफारिश की है कि इन कक्षाओं के अब तक जितने पेपर हो चुके हैं, उन्हीं के आधार पर ही परीक्षा परिणाम घोषित करते हुए विद्यार्थियों को अगली क्लास में प्रवेश दे दिया जाए।

पाठ्य पुस्तकें छापने के लिए खोली जाएं प्रिंटिंग प्रेस
कमेटी ने कहा है कि कर्फ्यू-लॉकडाउन के कारण प्रिंटिंग प्रेसों में काम बंद है। कमेटी ने प्रिंटिंग प्रेसों को खोलने की सिफारिश करते हुए कहा है कि पाठ्य पुस्तकों की छपाई जल्द शुरू की जाए और संबंधित जिलों के डीसी पूरे एहतियात बरतते हुए पुस्तकों को विद्यार्थियों तक पहुंचाएं।
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