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रोना योद्धा दे रहे सीख.. हमने जीत ली जंग, अब आपकी बारी है

Tue, 25 Aug 2020 11:09 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 11:09 PM IST
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Corona warriors learning won battle PGI GMSH
चंडीगढ़। कोरोना से जंग जीतने के बाद दोबारा अपने फर्ज को निभाने के लिए मैदान में उतरे स्वास्थ्य विभाग के योद्धा अपनी ड्यूटी के साथ ही पॉजिटिव मरीजों को मोटिवेट करने का काम भी कर रहे हैं। पीजीआई और जीएमएसएच- 16 के पॉजिटिव डॉक्टर और अन्य स्टाफ दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद मरीजों के तनाव प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। कोई भर्ती मरीजों को योग के फायदे बता रहा है तो कोई मेडिटेशन के। वही कोई खुद के पॉजिटिव होने के दौरान आत्मविश्वास बढ़ाने में उपयोग किए गए उपायों की जानकारी दे रहा है। ऐसे कोरोना योद्धा पर पीजीआई और जीएमएसएच- 16 अस्पताल प्रशासन को गर्व है। उनका कहना है कि ऐसे योद्धाओं के बल पर ही कोरोना के मरीजों का सफल इलाज कर पाना संभव हो पा रहा है।
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अब तक 80 लोग हो चुके पॉजिटिव
पीजीआई में अब तक कोरोना की चपेट में आकर 70 लोग पॉजिटिव हो चुके हैं। इसमें डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही अन्य कर्मचारी भी शामिल है। वहीं जीएमएसएच- 16 में यह संख्या 10 पर पहुंच गई है। दोनों ही अस्पतालों में कोरोना पॉजिटिव हुए ज्यादातर कर्मचारी और डॉक्टर वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं। पीजीआई में कोरोना को हराकर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने वालों में नर्सिंग ऑफिसर की संख्या सबसे ज्यादा है। पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव सत्यवीर सिंह डागर का कहना है कि नर्सिंग ऑफिसर अपनी और अपने परिवार की परवाह किए बिना कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटे हैं। वो उनकी देखभाल के साथ ही उनका आत्मबल बढ़ाने का भी प्रयास कर रहे हैं। इसलिए पीजीआई से ठीक होकर जाने वाले मरीज उनका दिल से धन्यवाद करते हैं।
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मरीजों को अपनापन भी देना हमारा फर्ज
जीएमएसएच- 16 की नर्सिंग ऑफिसर शोभना पठानिया और परमिंदर जीत थिंड का कहना है कि उनके लिए अस्पताल में भर्ती मरीज भी परिवार के सदस्य की तरह है। क्योंकि वह बीमारी के कारण अपनों से दूर अकेले अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसी स्थिति में बीमारी के साथ ही उनका तनाव भी बढ़ता जाता है। उनके तनाव को कम करने में अस्पताल के कर्मचारियों का रोल अहम है। इसलिए हम खुद तो इस बात का ध्यान रखते हैं, साथ ही अपने स्टाफ को भी मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और अपनत्व की भावना बनाए रखने की सलाह देते हैं। कोरोना के मरीजों पर इसका सकारात्मक असर पड़ रहा है।
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