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कोरोना : 135 नए मरीज मिले, 9.55 प्रतिशत हुई संक्रमण दर
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चंडीगढ़। शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को 135 नए मरीज मिले। वहीं, 34 मरीजों की हालत गंभीर हैं। पीजीआई व अन्य अस्पतालों में भर्ती कर इनका इलाज किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह चौथी लहर की शुरुआत भी हो सकती है लेकिन स्थिति की गंभीरता जानने के लिए जरूरी है कि संक्रमित मरीजों का जिनोम सिक्वेंसिंग कराया जाए क्योंकि गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या वायरस के नए स्वरूप (वेरिएंट) के हमले की ओर भी संकेत कर रही है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन के अनुसार, ईमटेक में 15 दिन में चिह्नित मरीजों की जिनोम सिक्वेंसिंग कराई जा रही है लेकिन अब तक उनमें सिर्फ ओमिक्रान वेरिएंट ही पाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 1414 लोगों की जांच की, जिनमें से 64 पुरुष और 71 महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि हुई। वहीं 7 दिन की अवधि पूरी होने पर 88 मरीजों को छुट्टी दी गई। इसके बावजूद सक्रिय मरीजों की संख्या 674 है। वही संक्रमण दर 9.55 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता काफी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा 8-8 मरीज सेक्टर-38 व धनास में मिले हैं।
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गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक
विश्व चिकित्सा संघ के सलाहकार डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि अमेरिका में भी यही स्थिति है। लगातार संक्रमण दर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है लेकिन वहां गंभीर मरीजों की संख्या न के बराबर है। ऐसे में अगर अपने यहां गंभीर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा दर्ज हो रहा है तो स्थिति गंभीर है इसलिए देरी नहीं की जानी चाहिए।
नए इस स्ट्रेन की जानकारी और उसकी ताकत का हमें पूरी तरह पता होनी चाहिए जिससे बचाव कार्य उसी अनुपात में किया जा सके। वहीं यह भी जरूरी है कि संक्रमित मरीजों पर टीके के प्रभाव का भी आकलन किया जाए। कहीं ऐसा ना हो कि नए स्ट्रेन में टीका प्रभावी साबित न हो लेकिन इन सारे बिंदुओं की जानकारी जिनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है। अगर जिनोम सिक्वेंसिंग में किसी नए वेरिएंट की पुष्टि हो जाती है तो सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदियां लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह चौथी लहर की शुरुआत भी हो सकती है लेकिन स्थिति की गंभीरता जानने के लिए जरूरी है कि संक्रमित मरीजों का जिनोम सिक्वेंसिंग कराया जाए क्योंकि गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या वायरस के नए स्वरूप (वेरिएंट) के हमले की ओर भी संकेत कर रही है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन के अनुसार, ईमटेक में 15 दिन में चिह्नित मरीजों की जिनोम सिक्वेंसिंग कराई जा रही है लेकिन अब तक उनमें सिर्फ ओमिक्रान वेरिएंट ही पाया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 1414 लोगों की जांच की, जिनमें से 64 पुरुष और 71 महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि हुई। वहीं 7 दिन की अवधि पूरी होने पर 88 मरीजों को छुट्टी दी गई। इसके बावजूद सक्रिय मरीजों की संख्या 674 है। वही संक्रमण दर 9.55 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता काफी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा 8-8 मरीज सेक्टर-38 व धनास में मिले हैं।
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गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक
विश्व चिकित्सा संघ के सलाहकार डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि अमेरिका में भी यही स्थिति है। लगातार संक्रमण दर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है लेकिन वहां गंभीर मरीजों की संख्या न के बराबर है। ऐसे में अगर अपने यहां गंभीर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा दर्ज हो रहा है तो स्थिति गंभीर है इसलिए देरी नहीं की जानी चाहिए।
नए इस स्ट्रेन की जानकारी और उसकी ताकत का हमें पूरी तरह पता होनी चाहिए जिससे बचाव कार्य उसी अनुपात में किया जा सके। वहीं यह भी जरूरी है कि संक्रमित मरीजों पर टीके के प्रभाव का भी आकलन किया जाए। कहीं ऐसा ना हो कि नए स्ट्रेन में टीका प्रभावी साबित न हो लेकिन इन सारे बिंदुओं की जानकारी जिनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है। अगर जिनोम सिक्वेंसिंग में किसी नए वेरिएंट की पुष्टि हो जाती है तो सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदियां लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।