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गल्ले को सेफ नहीं मानने पर लगाई फटकार
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 14 Nov 2013 01:20 AM IST
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काउंटर में ताला लगे गल्ले को सेफ नहीं मानने पर कंज्यूमर फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाई। साथ ही गल्ले से चोरी हुए कैश के बदले पॉलिसी के मुताबिक उपभोक्ता को 25 हजार रुपये अदा करने के निर्देश दिए।
सेक्टर-11 स्थित आकर्षण स्टेशनरी एंड कार्ड शॉप में नौ दिसंबर 2011 को चोरी हुई थी। इसके बाद दुकान मालिक की तरफ से 30 जनवरी 2012 को इंश्योरेंस कंपनी से एक लाख 93 हजार 620 रुपये का क्लेम मांगा गया।
इसमें 1 लाख 65 हजार 840 रुपये का सामान और काउंटर के गल्ले में रखे 27 हजार 840 रुपये का जिक्र किया गया था। कंपनी की तरफ से सर्वेयर नियुक्त किया गया, जिसने 1 लाख 41 हजार 88 रुपये का क्लेम पास किया। इसमें गल्ले में रखी रकम की एवज में 25 हजार रुपये का क्लेम शामिल था।
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बीमा पॉलिसी के तहत कंपनी नगदी चोरी की एवज में 25 हजार रुपये तक देने के लिए बाध्य थी। सर्वेयर की रिपोर्ट के कई दिन बाद भी तक जब दुकान मालिक को क्लेम नहीं मिला तो उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कहा गया कि कोर्ट की अनट्रेस रिपोर्ट के बाद ही क्लेम मिलेगा।
इसके बाद दुकानदार आठ मई 2013 को कंज्यूमर फोरम की शरण में पहुंचा, जहां से 31 जनवरी 2013 को बीमा कंपनी को क्लेम जारी करने के आदेश दिए। लेकिन, बीमा कंपनी के सर्वेयर की तरफ से फोरम में एक अर्जी दी गई कि क्लेम 1 लाख 16 हजार 88 रुपये का ही बनता है।
काउंटर में से चोरी हुए पैसों का क्लेम नहीं दिया जा सकता, क्योंकि बीमा पॉलिसी के मुताबिक सेफ में से चोरी होने पर ही क्लेम दिया जाएगा।
क्या कहा फोरम ने
फोरम के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन, सदस्य अनीता कपूर व अनिल शर्मा की बेंच ने कहा कि जब सर्वेयर ने पहले रिपोर्ट तैयार कर क्लेम एक लाख 65 हजार 840 रुपये का पास किया, जिसमें काउंटर से चोरी हुए पैसे भी शामिल हैं तो फिर 16 महीने बाद दूसरी रिपोर्ट क्यों दी गई, जिसमें कैश का क्लेम यह कहते हुए हटा दिया गया कि पैसे सेफ में नहीं थे। पहली रिर्पोट में कहा गया था कि काउंटर के गल्ले का लॉक तोड़कर चोरी हुई।
बेंच ने कहा कि दूसरी रिपोर्ट पूरी से मैन्यूप्लेट की गई है। काउंटर में ताला लगा गल्ला क्या सेफ नहीं होता? फोरम ने आदेश दिए कि पॉलिसी के तहत कैश चोरी का 25 हजार रुपये का क्लेम दुकानदार को दिया जाए।
साथ ही उस पर 9 प्रतिशत ब्याज और मानसिक परेशानी के एवज में तीन हजार रुपये भी अदा किए जाएं।
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सेक्टर-11 स्थित आकर्षण स्टेशनरी एंड कार्ड शॉप में नौ दिसंबर 2011 को चोरी हुई थी। इसके बाद दुकान मालिक की तरफ से 30 जनवरी 2012 को इंश्योरेंस कंपनी से एक लाख 93 हजार 620 रुपये का क्लेम मांगा गया।
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इसमें 1 लाख 65 हजार 840 रुपये का सामान और काउंटर के गल्ले में रखे 27 हजार 840 रुपये का जिक्र किया गया था। कंपनी की तरफ से सर्वेयर नियुक्त किया गया, जिसने 1 लाख 41 हजार 88 रुपये का क्लेम पास किया। इसमें गल्ले में रखी रकम की एवज में 25 हजार रुपये का क्लेम शामिल था।
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बीमा पॉलिसी के तहत कंपनी नगदी चोरी की एवज में 25 हजार रुपये तक देने के लिए बाध्य थी। सर्वेयर की रिपोर्ट के कई दिन बाद भी तक जब दुकान मालिक को क्लेम नहीं मिला तो उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कहा गया कि कोर्ट की अनट्रेस रिपोर्ट के बाद ही क्लेम मिलेगा।
इसके बाद दुकानदार आठ मई 2013 को कंज्यूमर फोरम की शरण में पहुंचा, जहां से 31 जनवरी 2013 को बीमा कंपनी को क्लेम जारी करने के आदेश दिए। लेकिन, बीमा कंपनी के सर्वेयर की तरफ से फोरम में एक अर्जी दी गई कि क्लेम 1 लाख 16 हजार 88 रुपये का ही बनता है।
काउंटर में से चोरी हुए पैसों का क्लेम नहीं दिया जा सकता, क्योंकि बीमा पॉलिसी के मुताबिक सेफ में से चोरी होने पर ही क्लेम दिया जाएगा।
क्या कहा फोरम ने
फोरम के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन, सदस्य अनीता कपूर व अनिल शर्मा की बेंच ने कहा कि जब सर्वेयर ने पहले रिपोर्ट तैयार कर क्लेम एक लाख 65 हजार 840 रुपये का पास किया, जिसमें काउंटर से चोरी हुए पैसे भी शामिल हैं तो फिर 16 महीने बाद दूसरी रिपोर्ट क्यों दी गई, जिसमें कैश का क्लेम यह कहते हुए हटा दिया गया कि पैसे सेफ में नहीं थे। पहली रिर्पोट में कहा गया था कि काउंटर के गल्ले का लॉक तोड़कर चोरी हुई।
बेंच ने कहा कि दूसरी रिपोर्ट पूरी से मैन्यूप्लेट की गई है। काउंटर में ताला लगा गल्ला क्या सेफ नहीं होता? फोरम ने आदेश दिए कि पॉलिसी के तहत कैश चोरी का 25 हजार रुपये का क्लेम दुकानदार को दिया जाए।
साथ ही उस पर 9 प्रतिशत ब्याज और मानसिक परेशानी के एवज में तीन हजार रुपये भी अदा किए जाएं।