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पार्किंग स्मार्ट बनाने के लिए एक सप्ताह में ठेकेदारों को देना होगा जबाव
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चंडीगढ़। शहर की 89 पेड पार्किंग को जनवरी से स्मार्ट बनाने और दिसंबर से पूरी लाइसेंस फीस देने के लिए नगर निगम ने दोनों ठेकेदारों को पत्र लिख दिया है। पत्र में एक सप्ताह में जबाव मांगा गया है। ठेकेदारों की ओर से जवाब नहीं मिला तो निगम आगे कार्रवाई शुरू करेगा।
पार्किंग विभाग के प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त एसके जैन ने बताया कि अक्तूबर माह की सदन की बैठक में कहा गया था कि नवंबर माह के अंत तक ठेकेदारों को पार्किंग को स्मार्ट बनाना होगा। एक दिसंबर से ठेकेदार बढ़े हुए पार्किंग शुल्क ले सकेंगे। साथ ही लाइसेंस फीस भी पूरी देनी होगी। इसके बाद पार्किंग ठेकेदारों ने निगम को पत्र देकर कहा कि वह अभी लाइसेंस फीस पूरी देने की स्थिति में नहीं हैं। इस स्थिति में उन्हें ठेका छोड़ना पड़ेगा। इस पत्र के बाद एक दिसंबर से पार्किंग को स्मार्ट बनाने की योजना भी ठप हो गई।
उसके बाद नवंबर माह की सदन की बैठक में तय हुआ कि इस माह की लाइसेंस फीस में भी रियायत दे दी जाए। अब निगम दिसंबर से पूरी लाइसेंस फीस लेगा। इसके साथ ही एक जनवरी से पार्किंग को स्मार्ट बनाना होगा। इसके लिए दोनों ठेकेदार अधिकारियों को अपना जबाव देकर बैठक कर सकते हैं। बैठक में बात बनी तो ठीक, नहीं तो निगम अपने कर्मचारियों को पार्किंग में लगाएगा। हालांकि, निगम ने इससे पहले आर्या कंपनी के साथ ठेका किया था। विवादों के बाद ठेका समय से पहले ही खत्म कर दिया गया था। उसके बाद पार्किंग की व्यवस्था निगम को ही करनी पड़ी। तब माली व सफाई कर्मचारियों तक को पार्किंग के लिए लगाना पड़ा था। उस समय निगम को पार्किंग में काफी घाटा हुआ था और निगम के काम भी प्रभावित हुए थे। अब अगर फिर ठेकेदारों ने पार्किंग छोड़ दी तो एक बार फिर वही स्थिति पैदा हो सकती है।
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पार्किंग विभाग के प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त एसके जैन ने बताया कि अक्तूबर माह की सदन की बैठक में कहा गया था कि नवंबर माह के अंत तक ठेकेदारों को पार्किंग को स्मार्ट बनाना होगा। एक दिसंबर से ठेकेदार बढ़े हुए पार्किंग शुल्क ले सकेंगे। साथ ही लाइसेंस फीस भी पूरी देनी होगी। इसके बाद पार्किंग ठेकेदारों ने निगम को पत्र देकर कहा कि वह अभी लाइसेंस फीस पूरी देने की स्थिति में नहीं हैं। इस स्थिति में उन्हें ठेका छोड़ना पड़ेगा। इस पत्र के बाद एक दिसंबर से पार्किंग को स्मार्ट बनाने की योजना भी ठप हो गई।
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उसके बाद नवंबर माह की सदन की बैठक में तय हुआ कि इस माह की लाइसेंस फीस में भी रियायत दे दी जाए। अब निगम दिसंबर से पूरी लाइसेंस फीस लेगा। इसके साथ ही एक जनवरी से पार्किंग को स्मार्ट बनाना होगा। इसके लिए दोनों ठेकेदार अधिकारियों को अपना जबाव देकर बैठक कर सकते हैं। बैठक में बात बनी तो ठीक, नहीं तो निगम अपने कर्मचारियों को पार्किंग में लगाएगा। हालांकि, निगम ने इससे पहले आर्या कंपनी के साथ ठेका किया था। विवादों के बाद ठेका समय से पहले ही खत्म कर दिया गया था। उसके बाद पार्किंग की व्यवस्था निगम को ही करनी पड़ी। तब माली व सफाई कर्मचारियों तक को पार्किंग के लिए लगाना पड़ा था। उस समय निगम को पार्किंग में काफी घाटा हुआ था और निगम के काम भी प्रभावित हुए थे। अब अगर फिर ठेकेदारों ने पार्किंग छोड़ दी तो एक बार फिर वही स्थिति पैदा हो सकती है।
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