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ट्रांस फैट ने पंजाब के 40 फीसदी से अधिक लोगों का वजन बढ़ाया, घातक है...पर जानिए क्या है

Fri, 11 Sep 2020 04:15 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 11 Sep 2020 04:15 PM IST
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Consumption of trans fats increased weight of Punjab people WHO advised to india
सांकेतिक तस्वीर
खाद्य तेलों में पाया जाने वाला ट्रांस फैट (असंतृप्त वसा) को धीमा जहर कहा जाता है। इसके लगातार सेवन से दिल का दौरा पड़ने की संभावना 28 फीसदी बढ़ जाती है। पंजाब में असंतृप्त वसा का प्रयोग तेजी से किया जा रहा है। इसके कारण पंजाब में 40 फीसदी से अधिक लोगों का वजन सामान्य से काफी अधिक हो चुका है। डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2023 तक औद्योगिक रूप से उत्पादित असंतृप्त वसा को खाद्य पदार्थों से समाप्त करने की सलाह दी है।
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पीजीआई ने भी इस पर मंथन किया है और लोगों को जागरूक करने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है कि भारत में असंतृप्त वसा से होने वाली बीमारियों से प्रतिवर्ष 60 से 75 हजार लोगों की मौत होती है। हृदय रोग और मोटापे की व्यापकता वाले पंजाब राज्य में ट्रांस फैटी एसिड (टीएफए) की अधिक मात्रा के कारण जोखिम सबसे अधिक है। बीते बुधवार को भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने री-प्लेस ट्रांस फैट एक्शन पैकेज की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट जारी की थी।
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इस रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 58 देशों ने ऐसे कानून पेश किए हैं जो 2021 के अंत तक करोड़ों लोगों को हानिकारक पदार्थ से बचाएंगे, लेकिन 100 से अधिक देशों को अभी भी इन हानिकारक पदार्थों को अपनी खाद्य आपूर्ति से हटाने के लिए कार्रवाई करने की आवश्यकता है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। हमें लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। गैर-संचारी रोगों को रोकने के लिए सभी संभव कदमों को शामिल करना चाहिए जो उन्हें कोरोनो वायरस के लिए अधिक संवेदनशील बना सकते हैं और समय से पहले मौत का कारण बन सकते हैं।
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ट्रांस वसा घातक, जागरूकता जरूरी

सामुदायिक चिकित्सा और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर डॉ. सोनू गोयल ने डब्ल्यूएचओ के आंकड़े आने के बाद उनका विश्लेषण किया। चंडीगढ़ के नामित अधिकारी डॉ. सुखविंदर सिंह ने प्रेस नोट के जरिए बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग चंडीगढ़ पहले से ही शहर में एफएसएसएआई की पहल को फिर से लागू कर रहा है। त्वरित परीक्षण किट (टेस्ट) -270 की मदद से रेस्तरां, मिठाइयों और निर्माण इकाइयों में खाना पकाने के तेल की जांच की जा रही है।

सामुदायिक चिकित्सा और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. अमरजीत सिंह ने भी इस ट्रांस फैट को घातक माना। पीजीआईएमईआर की डॉ. पूनम खन्ना ने सुझाव दिया है कि औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों की कम खपत के बारे में जागरूकता को अत्यधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

जानिए क्या है ट्रांस फैट
ट्रांस फैट तेल तथा खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ (सामग्री के भंडारण एवं उपयोग होने तक की अवधि) में वृद्धि करने व उनके स्वाद को स्थिर करने में सहायता करते हैं। ट्रांस फैट को ट्रांस फैटी एसिड (टीएफए) के रूप में भी जाना जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं। पहला प्राकृतिक ट्रांस फैट और दूसरा कृत्रिम ट्रांस फैट। ट्रांस फैटी एसिड (टीएफए) या ट्रांस वसा सबसे हानिकारक प्रकार के वसा होते हैं जो हमारे शरीर पर किसी भी अन्य आहार से अधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। यह वसा मानव निर्मित वसा है।

इसका कुछ ही भाग प्रकृति में निर्मित होता है। कृत्रिम खाद्य तेल में हाइड्रोजन प्रविष्ट कराकर इसे उत्पन्न किया जाता है। इस प्रक्रिया में तेल का स्वरूप शुद्ध घी या मक्खन जैसा हो जाता है। जहां तक प्राकृतिक टीएफएका प्रश्न है यह मांस और पशु उत्पादों में सूक्ष्म मात्रा में मिलता है। भारत में वनस्पति घी, देसी घी, मक्खन एवं मारगरीन ट्रांस फैट के मुख्य स्रोत हैं। वनस्पति घी का खाद्य उद्योग जगत में अधिक प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह खाद्य उत्पाद की सेल्फ लाइफ को बढ़ाता है तथा यह अपेक्षाकृत सस्ता भी है।
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