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Chandigarh News: बीमारी के दौरान पॉलिसी क्लेम न देने पर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को दिए 30 हजार का हर्जाना देने के आदेश

Tue, 09 May 2023 02:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 May 2023 02:13 AM IST
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Consumer Commission orders company to pay Rs 30,000 as compensation for not giving policy claim during illness
चंडीगढ़। कार खरीदने के लिए लिए गए लोन के साथ ली गई इंश्योरेंस पॉलिसी के बावजूद उपभोक्ता को बीमा की रकम न देने पर उपभोक्ता आयोग ने एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर 30 हजार का हर्जाना लगाते हुए याची को अदा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आयोग ने बीमा राशि के एक लाख रुपये नौ प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज दर के साथ लौटाने एवं मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपए अदा करने को कहा है। मामले में रीनू रानी ने पति की मौत के बाद अक्तूबर 2021 में एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में याचिका डाली थी।
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शिकायतकर्ता रीनू रानी ने आयोग को दी शिकायत में बताया कि उसके पति संजय कुमार ने साल 2017 में कार खरीदी थी। इसके लिए एचडीएफसी बैंक में लोन के लिए आवेदन किया था। लोन मंजूर करने के लिए बैंक ने शर्त रखी कि उन्हें लोन के लिए व्यक्तिगत बीमा पाॅलिसी भी लेनी होगी। इस पर संजय ने एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से एकमुश्त प्रीमियम 6,761 रुपये का भुगतान कर एक लाख की सर्व सुरक्षा प्लस बीमा पाॅलिसी ले ली। पाॅलिसी की वैधता 13 दिसंबर 2017 से 12 दिसंबर 2022 तक थी। याचिकाकर्ता एक पति की तबीयत ठीक ना होने के चलते उसे उपचार के लिए दिल्ली के श्री गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान पति की बीमारी में हो रहे खर्च को लेकर उसने इंश्योरेंस कंपनी से बातचीत करते हुए बीमारी के बारे में बताते हुए पत्र भी लिखा। शिकायतकर्ता ने पति की गंभीर स्थिति को लेकर बीमा कंपनी को कई बार बताया और इंश्योरेंस की राशि की मांग की थी। लंबे समय तक गंभीर रूप से बीमार रहने के बाद 22 अगस्त 2019 को उनकी मौत हो गई। इस पर बीमा कंपनी ने उनसे इलाज करने वाले डाॅक्टर से क्रोनिक किडनी रोग की सटीक अवधि बताते हुए दस्तावेज मांगे। बीमा कंपनी को दस्तावेज मुहैया करवाने के बावजूद उन्हें इंश्योरेंस की राशि नहीं मिली। इसके बाद रीनू रानी ने बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग को शिकायत दी थी।
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