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Chandigarh News: उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी पर लगाया 50 हजार रुपये का हर्जाना
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चंडीगढ़। उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी पर 50 हजार का हर्जाना और 20 हजार रुपये मुकदमे खर्च के तौर पर याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही 49 हजार 958 रुपये की प्रीमियम राशि को 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से याचिकाकर्ता को देनी होगी। पीजीआई की डॉ. इनुषा ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी। डॉ. इनुषा ने बताया कि उसने कंपनी की मैक्स लाइफ स्मार्ट इन्वेस्टमेंट पेंशन फंड ली थी जिससे कि वह जीवन की जोखिम को कवर कर परिवार को सुरक्षा प्रदान कर सके। पॉलिसी का प्रीमियम का भुगतान ईसीएस मोड से किया जा रहा था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अचानक एक दिन उसे कंपनी की ओर से 426 रुपये का चेक प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया गया था कि पॉलिसी संख्या 355497876 अर्थात् 100 वर्ष की आयु तक संपूर्ण जीवन भागीदारी कि उनकी पॉलिसी 2012 में समाप्त हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने जानबूझकर उसके 49 हजार 998 रुपये हड़पने और बीमा राशि के 7 लाख 70 हजार 175 देनदारी से बचने के लिए जानबूझकर उसकी पॉलिसी लैप्स कर दी है।
कानूनी नोटिस भेजना का भी नहीं हुआ लाभ
आरोपों के मुताबिक याचिकाकर्ता ने शिकायत के निवारण के लिए कई बार आरोपी कंपनी से संपर्क करने के साथ ही कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित ने मामले को लेकर न्याय के लिए उपरोक्त आयोग में याचिका दायर की थी। मामले में सामने आए सभी तथ्यों और सबूतों को देखने बाद उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को उसके द्वारा प्रीमियम राशि के 49 हजार 958 को 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष के ब्याज दर के साथ वापस करने के आदेश कंपनी को दिए। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक उत्पीड़न के चलते 50 हजार और मुकदमे के खर्च और 20 हजार रुपये उपभोक्ता को देने के लिए कंपनी को आदेश दिए।
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कानूनी नोटिस भेजना का भी नहीं हुआ लाभ
आरोपों के मुताबिक याचिकाकर्ता ने शिकायत के निवारण के लिए कई बार आरोपी कंपनी से संपर्क करने के साथ ही कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित ने मामले को लेकर न्याय के लिए उपरोक्त आयोग में याचिका दायर की थी। मामले में सामने आए सभी तथ्यों और सबूतों को देखने बाद उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को उसके द्वारा प्रीमियम राशि के 49 हजार 958 को 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष के ब्याज दर के साथ वापस करने के आदेश कंपनी को दिए। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक उत्पीड़न के चलते 50 हजार और मुकदमे के खर्च और 20 हजार रुपये उपभोक्ता को देने के लिए कंपनी को आदेश दिए।
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