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पीयू में उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं के निर्माण का काम आखिरी चरण में
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में बन रही उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं का काम आखिरी चरण में है। मार्च से पहले ये प्रयोगशालाएं तैयार हो जाएंगी। शोधार्थी व प्रोजेक्ट वर्क से जुड़े विद्यार्थी इनका लाभ उठा पाएंगे। किसी भी विभाग के विद्यार्थी किसी भी प्रयोगशाला में जाकर काम कर सकेंगे।
पीयू ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत 110 शोध प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे थे। इन सभी के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक रकम मंजूर हो गई। प्रथम चरण में ऊष्मायन केंद्र के लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक रकम मिली थी। इसी रकम का एक हिस्सा उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं पर खर्च किया जा रहा है। विज्ञान संकाय के भौतिक, रसायन, वनस्पति और जंतु विज्ञान विभाग, फार्मास्युटिकल साइंस विभाग आदि में प्रयोगशालाएं बन रही हैं। कुछ में बनकर तैयार हैं, लेकिन वहां पूरी तरह उनका संचालन संसाधनों के अभाव में नहीं हो पाया है।
सूत्रों का कहना है कि सभी प्रयोगशालाएं मार्च माह से काम करने लगेंगी। विभागों नेे पीयू प्रशासन को कहा है कि वह फरवरी तक काम पूरा कर लेंगे। इसी के साथ शोध की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। दूसरे विभागों व चंडीगढ़ कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रयोगशालाओं का लाभ मिल जाएगा।
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पीयू ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत 110 शोध प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे थे। इन सभी के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक रकम मंजूर हो गई। प्रथम चरण में ऊष्मायन केंद्र के लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक रकम मिली थी। इसी रकम का एक हिस्सा उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं पर खर्च किया जा रहा है। विज्ञान संकाय के भौतिक, रसायन, वनस्पति और जंतु विज्ञान विभाग, फार्मास्युटिकल साइंस विभाग आदि में प्रयोगशालाएं बन रही हैं। कुछ में बनकर तैयार हैं, लेकिन वहां पूरी तरह उनका संचालन संसाधनों के अभाव में नहीं हो पाया है।
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सूत्रों का कहना है कि सभी प्रयोगशालाएं मार्च माह से काम करने लगेंगी। विभागों नेे पीयू प्रशासन को कहा है कि वह फरवरी तक काम पूरा कर लेंगे। इसी के साथ शोध की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। दूसरे विभागों व चंडीगढ़ कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रयोगशालाओं का लाभ मिल जाएगा।
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