Congress: हरियाणा में कांग्रेस ने बदली रणनीति, जिला अध्यक्षों की तयपाई में जाट के बजाय एससी और ओबीसी पर दांव
कांग्रेस ने इस बार जाटों के बजाय ओबीसी और एससी वर्ग पर दांव खेला है। 32 में से दस जिला अध्यक्ष ओबीसी और पांच एससी समुदाय से हैं। सिर्फ छह जिला अध्यक्ष जाट समुदाय से हैं।
विस्तार
भाजपा की राह पर चलते हुए कांग्रेस ने भी प्रदेश की सियासत में अब अपनी रणनीति बदल ली है। कांग्रेस ने इस बार जाटों के बजाय ओबीसी और एससी वर्ग पर दांव खेला है। 32 में से दस जिला अध्यक्ष ओबीसी और पांच एससी समुदाय से हैं। सिर्फ छह जिला अध्यक्ष जाट समुदाय से हैं। बीते विधानसभा चुनाव में ओबीसी और एससी समाज ने भाजपा को अच्छा-खासा समर्थन दिया था और इसी के बल पर पार्टी ने तीसरी बार प्रदेश की सत्ता हासिल की। कांग्रेस ने भाजपा की इस रणनीति को पहले परखा और लंबे विश्लेषण के बाद जाट के इतर दूसरे समुदाय को तवज्जो देने की कार्यनीति बनाई।
बीते विधानसभा चुनाव में जाट और गैर जाट की राजनीति पर चुनाव लड़ा गया था। मतदान की तारीख नजदीक आते ही पूरा चुनाव जाट और गैर जाट के कोण पर आकर टिक गया था। इसका फायदा भाजपा को मिला और कांग्रेस दस साल बाद भी सत्ता हासिल नहीं कर सकी। कांग्रेस के थिंक टैंक ने इस बात को अच्छी तरह से समझ लिया है कि सिर्फ एक बिरादरी की राजनीति से हरियाणा में सत्ता हासिल नहीं की जा सकती। इसलिए जिला प्रधानों की सूची में सोशल इंजीनियरिंग की झलक दिख रही है। यह भी संकेत मिल रहे हैं कांग्रेस प्रदेश में आगे भी इसी रणनीति पर काम करने वाली है।
जीटी बेल्ट में हुड्डा और सैलजा गुट को बराबर तवज्जो
कांग्रेस हाईकमान ने जीटी बेल्ट में हुड्डा और सैलजा गुट के नेताओं को बराबर तवज्जो दी है। अंबाला कैंट के परविंदर परी व अंबाला सिटी इकाई के जिलाध्यक्ष बने पवन अग्रवाल सैलजा गुट के हैं। अंबाला ग्रामीण के दुष्यंत चौहान हुड्डा खेमे से आते हैं। यमुनानगर ग्रामीण के नरपाल सिंह व यमुनानगर शहरी के प्रधान देवेंद्र सिंह सैलजा गुट से हैं। पंचकूला जिला इकाई के प्रधान बनाए गए संजय राणा भी सैलजा गुट से आते हैं। करनाल के दोनों अध्यक्ष, कुरुक्षेत्र व पानीपत ग्रामीण के जिला अध्यक्ष हुड्डा समर्थक हैं।
बागड़ बेल्ट में सैलजा के चार व हुड्डा गुट के तीन अध्यक्ष
बागड़ बेल्ट से कुमारी सैलजा के चार व हुड्डा खेमे से तीन अध्यक्ष चुने गए हैं। सैलजा गुट के चरखी-दादरी के जिलाध्यक्ष सुशील धानक, हिसार ग्रामीण से लाल बहादुर खोवाल, सिरसा से संतोष बेनीवाल व फतेहाबाद से अरविंद शर्मा शामिल हैं। भिवानी के शहरी व ग्रामीण जिलाध्यक्ष हुड्डा गुट के हैं। हिसार शहर प्रधान बने बजरंग दास गर्ग सैलजा और हुड्डा दोनों के करीबी हैं।
अब प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की बारी
जिला अध्यक्ष की घोषणा के बाद अब हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष का भी चुनाव किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में रणदीप सुरजेवाला, दीपेंद्र हुड्डा, राव दान सिंह और रामकिशन गुर्जर का नाम शामिल है। नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व स्पीकर अशोक अरोड़ा दौड़ में शामिल हैं। हाईकमान की ओर से जो संकेत मिले हैं, उसके मुताबिक नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष दोनों अलग-अलग गुट के होंगे और जाट व गैर जाट के बीच तालमेल भी बैठाया जाएगा।
बंसीलाल परिवार पर भरोसा बरकरार
कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के परिवार पर भरोसा बनाए रखा है। पार्टी ने भिवानी ग्रामीण से जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी बंसीलाल के दूसरे बेटे रणबीर महेंद्र के पुत्र अनिरुद्ध चौधरी को सौंपी है। बंसीलाल की बहू किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस भिवानी क्षेत्र में कद्दावर नेता की तलाश में थी। इसीलिए पार्टी ने विधानसभा चुनाव में तोशाम सीट से श्रुति चौधरी के सामने उनके चचेरे भाई अनिरुद्ध को उतारा था। अब पार्टी ने एक बार फिर अनिरुद्ध चौधरी पर भरोसा जताया था। अनिरुद्ध को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का समर्थक माना जाता है।
हुड्डा गुट के विधायक ज्यादा, इसलिए मिली तवज्जो
विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा का दबदबा कायम है। जिला प्रधानों की सूची में भी करीब 20 नाम हुड्डा गुट के हैं। दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत कर आए 38 में से 32 विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक हैं। कांग्रेस ने जिला प्रधानों को चुनते समय विधायकों की पसंद और न पसंद का भी ख्याल रखा है ताकि संगठन और विधायकों के बीच समन्वय बना रहे।
हारे हुए प्रत्याशियों पर दांव खेलने के मजबूरी
कांग्रेस ने बीते विधानसभा चुनाव में हारे चार उम्मीदवारों वर्धन यादव, अनिरुद्ध चौधरी, मेवा सिंह और परविंदर परी पर दांव लगाया है। इनमें से वर्धन यादव, अनिरुद्ध चौधरी और परविंदर परी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके मेयर चुनाव हारे कमल दीवान की भी ताजपोशी की गई है। इन हारे प्रत्याशियों की ताजपोशी के पीछे इनकी पैरवी करने वाले वरिष्ठ नेताओं की मजबूत पकड़ को कारण माना जा रहा है।
महिलाओं को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
कांग्रेस हाईकमान ने 32 जिलाध्यक्षों की सूची में सिर्फ एक महिला को जगह दी है। संसद से लेकर सड़क तक महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात करने वाली पार्टी ने सिर्फ तीन प्रतिशत महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया है। जिले की कमान सौंपने में महिला नेताओं को नजरअंदाज करना पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.