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चंडीगढ़: सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन के मकानों की हालत बदतर, प्रशासन नहीं ले रहा सुध

Thu, 03 Feb 2022 05:27 PM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संदीप खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 03 Feb 2022 05:27 PM IST
सार

पुलिस लाइन में एक से लेकर 554 तक तीन मंजिला और दो मंजिला मकान हैं। यहां लगभग एक हजार के करीब मकान हैं। हालात यह है कि कई घरों की खिड़कियों व दरवाजों को दीमक खा चुकी है। कई मकानों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि छत से पानी टपकता है।

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Condition of houses built in Police Lines located in Sector-26 of Chandigarh is dire 
पुलिस लाइन में बने मकानों की हालत खस्ता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन में दशकों पहले बने मकानों की हालत खस्ता है। प्रशासन की अनदेखी और सरकारी मकानों की कमी के चलते पुलिसकर्मी इन मकानों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन के पास भी इन मकानों की मरम्मत के लिए कोई ठोस योजना नहीं है, जिसका खामियाजा कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह है कि पुलिस कर्मचारी मकानों में रहने से कतरा रहे हैं। वे बाहर किराए के मकानों में रहना ठीक समझते हैं।

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पुलिस लाइन में एक से लेकर 554 तक तीन मंजिला और दो मंजिला मकान हैं। यहां लगभग एक हजार के करीब मकान हैं। हालात यह है कि कई घरों की खिड़कियों व दरवाजों को दीमक खा चुकी है। कई मकानों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि छत से पानी टपकता है। शुरुआती दौर में बने सेक्टर-26 पुलिस लाइन में रहने वाले लोग इस बारे में कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सरकारी कर्मचारी होने की वजह से वह खुलकर कहीं अपनी आवाज नहीं उठा पाते। इसकी वजह से मकानों की मरम्मत के लिए शिकायत के बाद भी महीनों इंतजार करना पड़ता है। सेक्टर-26 निवासी समाजसेवी जसजीत कौर ने बताया कि कर्मचारियों को जो मकान अलॉट किए जाते हैं, उनकी हालत बेहद खराब होती है। ऐसे में कई मुलाजिम अलॉटमेंट रद्द करवा देते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी अब पुलिस लाइन सुरक्षित नहीं है। यहां हाल ही में कई चोरियां हो चुकी हैं।

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पार्किंग के साथ पानी के निकासी की व्यवस्था नहीं 

पुलिस लाइन में अब पार्किंग की समस्या भी बढ़ गई है। लोगों ने गाड़ी खड़ी करने के लिए हरे पेड़ों तक को काट दिया है। हाल में एक पुराने पेड़ को काटा गया था। जसजीत कौर ने बताया की बारिश के दिनों में यहां तालाब जैसी स्थिति बन जाती है। लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय से लोगों को इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

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फुटपाथ और पार्किंग पर जमाया कब्जा

जसजीत कौर ने बताया कि कई कर्मचारियों ने घर का हिस्सा बड़ा करने के लिए फुटपाथ और पार्किंग पर कब्जा कर लिया है।  कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कब्जे कर बंगले बना लिए हैं। सरकारी मकानों में सिर्फ दोपहिया वाहन को खड़ा करने की जगह दी गई थी, लेकिन अब इन मकानों में रहने वाले ज्यादातर लोगों ने कारें खरीद ली हैं। कुछ कर्मचारियों ने स्टोर को तोड़कर कमरा बना लिया है। इससे मकानों का नक्शा भी बदल गया है।

पुलिस लाइन में खस्ताहाल मकानों में रह रहे पुलिसकर्मियों के लिए मैं वर्ष 2016 से लड़ाई लड़ रही हूं। कई बार प्रशासन को इसके बारे में शिकायत कर चुकी हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर जल्द कार्रवाई न हुई तो मैं अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगी। - जसजीत कौर, समाजसेवी, सेक्टर-26


यह समस्या आज की नहीं है। धनास में मकान बन गए हैं, ज्यादातर पुलिसकर्मी वहां रहेंगे। पुलिसकर्मी मकानों पर कोई कब्जा नहीं करते हैं। जिस तरह से उन्हें मकान अलॉट होता है, वह उसमें रहकर चले जाते हैं। पुलिस लाइन में मकानों की मरम्मत की जिम्मेदारी प्रशासन की है। समस्या को लेकर प्रशासन को पत्र भी लिखा है। जलभराव की समस्या के संबंध में अधिकारियों ने वहां निरीक्षण कर लिया है। - दिलशेर चंदेल, डीएसपी, पुलिस लाइन

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