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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब में कम मतदान ने छीना दलों का चैन, सियासी गणित में सभी जुटे

Tue, 21 May 2019 12:22 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 21 May 2019 12:22 AM IST
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Compared to the previous Lok Sabha elections Low voting in Punjab
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

पंजाब में पिछले साल की तुलना में कम मतदान ने एक तरफ चुनाव आयोग की नींद उड़ा दी है। तो पार्टियां का चैन भी छीन लिया है। सभी सियासी दल कम पोलिंग का आकलन करने में लगे हैं। पंजाब में इस बार औसतन 65.96 फीसदी मतदान हुआ है। जबकि, 2014 में औसत मतदान 70.64 प्रतिशत था। इस बार सबसे कम पोलिंग अमृतसर, होशियारपुर और लुधियाना में हुई है। जबकि, सबसे ज्यादा पोलिंग बठिंडा, संगरूर में हुई है। 

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शिअद-भाजपा गठबंधन को लग रहा है कि उनका कैडर बूथों पर एक्टिव था। उन्होंने पहले ही अपने वोटरों के वोट डलवा लिए। जबकि, दो साल से दरकिनार किए जाने से कांग्रेस के वर्कर हताश थे, उन्होंने अपने वोटरों को बूथों तक लाने में उत्साह नहीं दिखाया। साथ ही लोग भी कांग्रेस के कार्यकाल से निराश हैं, इसलिए उन्होंने भी पोलिंग में खास उत्साह नहीं दिखाया।
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 इस विचारधारा पर भी मंथन किया जा रहा है कि पिछली बार आप की लहर थी। जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने आप के पक्ष में मतदान किया था। वे वोटर आप का हाल देख कर इस बार बेहद निराश थे। वे वोट डालने घर से निकले ही नहीं। 
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बठिंडा और संगरूर में ज्यादा पोलिंग की वजह वहां ज्यादा पार्टियों की मौजूदगी मानी जा रही है। संगरूर में तिकोना मुकाबला है, यहां आप पूरी तरह लड़ाई में, इसलिए सभी पार्टियों ने अपने वोट डलवाने में पूरा जोर लगाया। बठिंडा में कांग्रेस, शिअद, आप के अलावा सुखपाल खैरा भी हैं। यहां भी वही समीकरण हैं।

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