निकलेगा आयोग की नियुक्तियों का जिन्न
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हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से आयोग में हुई नियुक्तियों का मुद्दा भाजपा के एजेंडे में शामिल हो सकता है। नए राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने अपनी नियुक्ति के बाद सरकार से आयोग में हुई नियुक्तियों पर 15 दिन में टिप्पणी मांगी थी।
लंबे समय के बाद सरकार ने यह टिप्पणी राज्यपाल के पास भेज दी है। अब कभी भी राज्यपाल आयोग में हुई नियुक्तियों पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
हरियाणा भाजपा के नेताओं ने आयोगों में हुई नियुक्तियों को अवैध बताते हुए राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को इस मामले में ज्ञापन सौंपा था।
इसके बाद राज्यपाल की ओर से मामले में हरियाणा सरकार से जवाब मांगा गया था। सूत्रों के मुताबिक चार दिन पूर्व सरकार ने इस मामले में टिप्पणी राज्यपाल के पास भेजी है।
कासनी ने लगाया था आदेशों से छेड़छाड़ का आरोप
हरियाणा सरकार ने आयोग में हुई नियुक्तियों की फाइल उस समय प्रशासनिक सुधार विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत प्रदीप कासनी के पास भेजी थी।
उस समय प्रदीप कासनी ने यह कह कर फाइल वापस कर दी थी कि फाइल पर राज्यपाल के आदेशों के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसके बाद भाजपा ने इस मुददे पर जांच करवाने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक इन मामलों में नियुक्ति प्राधिकारी राज्यपाल होता है। यदि इन नियुक्तियों में राज्यपाल की ओर से लिखित आदेश नहीं दिए गए हैं तो संबंधित अधिकारी किस तरह से काम कर रहे हैं।
इसके अलावा दूसरा मुद्दा यह है कि जब नए राज्यपाल ने शपथ ग्रहण कर लिया तो पिछले राज्यपाल के आदेशों के अनुसार सरकार कैसे शपथ दिलवा सकती है।
पूर्व मुख्य सचिव को बताया था आयोग का चेयरमैन
हरियाणा सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव एससी चौधरी को सेवा का अधिकार आयोग का चेयरमैन लगाया था। जिसमें सरवन सिंह और जनरल विरेंद्र टांक सहित चार अन्य सदस्य बनाए गए थे।
इसके अलावा सूचना आयोग के आयुक्त भी बनाए गए थे। प्रदीप कासनी के पास इन नियुक्तियों की तीन फाइलें आई थीं। तीनों ही फाइलों पर हस्ताक्षर करने से कासनी ने इनकार कर दिया था।
सरकार ने मेरा तबादला ही इन फाइलों की वजह से किया है। अब मेरी जगह किसी और से कमेंट भेजे गए हैं। ऐसे में यह देखने का विषय होगा कि कमेंट में कहा क्या गया है। तथ्य यह है कि गवर्नर की तरफ से नियुक्ति के कोई आदेश नहीं हैं।
-प्रदीप कासनी, प्रशासक काडा