अमर बलिदानी: आतंकियों को मारने में कर्नल मनप्रीत सिंह को हासिल थी महारत, घर में घुसकर दो को किया था ढेर
कर्नल मनप्रीत का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह 10 बजे चंडीमंदिर कमांड हॉस्पिटल से मुल्लांपुर के पास पड़ते पैतृक गांव भड़ौजियां ले जाया जाएगा। सुबह साढ़े 11 बजे पैतृक गांव भड़ौजियां में शव को लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद दोपहर दो से ढाई बजे के बीच राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में बलिदान हुए पंजाब के मोहाली जिले के भड़ौजियां गांव के सपूत कर्नल मनप्रीत सिंह ने दो साल पहले जम्मू-कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान घर में घुसकर दो आतंकियों को मार गिराया था। इस अदम्य साहस के लिए भारतीय सेना ने उन्हें सेना पदक से अलंकृत किया था।
कर्नल मनप्रीत के भाई संदीप सिंह (38) ने बताया कि वह पिछले पांच साल से जम्मू में तैनात थे क्योंकि उन्हें आतंकवादियों को मारने में महारत हासिल थी। अभी वह डेपुटेशन पर आरआर 19 बटालियन में तैनात थे। गुरुवार को कर्नल मनप्रीत के पैतृक गांव में पूरे दिन मातम पसरा रहा। छोटे भाई संदीप ने बताया कि कर्नल मनप्रीत उनसे तीन साल बड़े थे। वह पढ़ाई में शुरू से ही होशियार थे। 10वीं तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय स्कूल से की। इसके बाद चंडीगढ़ सेक्टर-47 के स्कूल में दाखिला लिया। फिर एसडी कॉलेज से बीकॉम किया। इसके बाद पीयू से एमकॉम की परीक्षा पास की। इस बीच 2003 में सेना में चयन हो गया।
कर्नल मनप्रीत का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह 10 बजे चंडीमंदिर कमांड हॉस्पिटल से मुल्लांपुर के पास पड़ते पैतृक गांव भड़ौजियां ले जाया जाएगा। सुबह साढ़े 11 बजे पैतृक गांव भड़ौजियां में शव को लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद दोपहर दो से ढाई बजे के बीच राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पिता की बटालियन ही ज्वाइन करने की रखी थी शर्त
भाई संदीप सिंह ने बताया कि सेना में ज्वाइनिंग के वक्त जब उनसे पूछा गया कि वह किस बटालियन से जुड़ेंगे तो उन्होंने कहा था कि वह अपने दादा शीतल सिंह और पिता लखमीर सिंह वाली बटालियन 12 सिख लाइट इन्फैट्री को ही ज्वाइन करेंगे। उन्हें यह देखकर अच्छा लगेगा कि जिस बटालियन में उनके पिता और दादा अफसरों को सैल्यूट मारते थे, वहां के सैनिक उन्हें सैल्यूट करेंगे।

सबसे पहले चचेरे भाई को मिली बलिदान की खबर
कर्नल मनप्रीत के चचेरे भाई कमलजीत सिंह ने बताया कि बुधवार शाम करीब पौने छह बजे उनके स्मार्टवॉच पर एक नोटिफिकेशन आई। चेक किया तो भाई के बलिदान होने की खबर थी। संदेश पढ़कर उनकी आंखों के अंधेरा छा गया। खबर को झूठा मानकर चेक करना शुरू किया और मनप्रीत के छोटे भाई संदीप को फोन कर जानकारी दी। इस दौरान भाई का नंबर लगाने की कोशिश की लेकिन नंबर नहीं लग रहा था। इसके बाद सेना के अफसरों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका। करीब दो घंटे बाद टीवी पर भाई के शहीद होने की खबर आने लगी। इसके बाद गांव में मातम पसर गया।