'कटे-फटे कागज के टुकड़ों से बनाता हूं कोलाज'

ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 13 Mar 2014 01:36 AM IST
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Collage Maker Mohinder Singh in Chandigarh

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पहले कुछ साथियों के साथ पेंटिंग बनाता था। वह काम करते वक्त कागज की काफी बर्बादी करते थे और उन्हें फाड़ देते थे। ऐसा करने पर अक्सर उन्हें डांटता था, कि क्यों इतना कागज बर्बाद करते हो।
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धीरे-धीरे कागज के टुकड़ों को संभालने लगा और एक दिन उनको जोड़कर कुछ चित्र बनाए। इस पर डॉ. बीएन गोस्वामी एक लेख लिख चुके थे। उसे पढ़ने के बाद पता चला कि इसे कोलाज मेकिंग कहते हैं।
यह कहना है चंडीगढ़ के प्रसिद्ध कोलाज आर्टिस्ट मोहिंदर तुली का। मोहिंदर पंजाब कला भवन की शोभा सिंह आर्ट गैलरी में लगी प्रदर्शनी शक्तिपुंज में कोलाज मेकिंग का लाइव डेमो दिखाने पहुंचे थे।
मोहिंदर अपने साथ कागज के कटे-फटे टुकड़े लेकर आए थे। इसके साथ उन्होंने एक रानी की शक्ल तैयार की। मोहिंदर ने कहा कि 1963 में पहली बार कोलाज पेंटिंग बनाई, जिसको काफी सराहा गया।

इसके बाद पहली बार अमृतसर में इसकी एग्जिबिशन लगाई तो देश के अन्य हिस्सों में भी इसके चर्चे होने लगे और फिर कई अवार्ड भी मिले, जिसमें गवर्नर अवार्ड भी शामिल है।

कागज को अक्सर आर्ट की नजर से ही देखा है, इसी के जरिये पूरी दुनिया घुमा हूं। कोलाज मेकिंग में सबसे खास बात यह होती है कि इसमें काफी वेरीएशन होता है। आप कई आकृतियां बना सकते हैं और इसमें महंगे पेंट का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ता।
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