निकाय चुनाव में मिली जीत पर बोले सीएम, कहा- नतीजे विधानसभा चुनाव के लिए जनादेश नहीं
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल निकाय चुनावों में बंपर जीत मिलने पर जोश से लबरेज होने के साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए पूरे होश में भी हैं। जीत की खुमारी उनके सिर चढ़कर नहीं बोल रही। मुख्यमंत्री ने निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद पत्रकारों से बातचीत में साफ कर दिया कि लक्ष्य-2019 है। जीत से उत्साह बढ़ा है, सरकार और जोश के साथ काम करेगी। मगर, इन नतीजों को लोकसभा व विधानसभा चुनाव का जनादेश नहीं माना जा सकता।
चूंकि, यह पूरे हरियाणा का नहीं, बल्कि पांच नगर निगमों और दो नगरपालिकाओं का चुनाव था। नगर निगमों की परिधि में लगभग दर्जन भर विधायक ही आते हैं। लोकसभा और विधानसभा का चुनाव अलग तरह का होता है। यह जीत जनता, कार्यकर्ताओं और नगर निगमों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के मतदाताओं की जीत है। भाजपा अब जींद उपचुनाव, लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगी।
पार्टी को यह जीत भाजपा बनाम ऑल की लड़ाई में मिली है। चूंकि, पूरा विपक्ष उनके खिलाफ एकजुट हो गया था। उनकी सरकार ने पारदर्शिता लाकर व भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए अनेक कदम उठाकर जनता में विश्वास पैदा किया है। यह जीत सिद्ध करती है कि जनता उनकी नीतियों और कामों से खुश है।
देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का माहौल बनना शुरू हुआ है। मगर, इसके लिए अभी सांविधानिक संशोधन होने के अलावा सभी क्षेत्रीय व राष्ट्रीय दलों की सहमति जरूरी है। 2019 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव संभव नहीं लगते। बावजूद इसके वे चुनावों के लिए तैयार हैं। उम्मीद है कि 2024 तक लोकसभा व विधानसभा चुनाव साथ कराने की सहमति बन जाए।
जातिवाद की नहीं करते राजनीति, सरकार के कार्यों से जाटलैंड में जीत
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि वह जातिवाद की राजनीति नहीं करते। आज भी वह हरियाणा एक-हरियाणवी एक, सबका साथ-सबका विकास के नारे पर कायम हैं। चुनावों में पंजाबियत पर दिए विज्ञापन से कोई लेना-देना नहीं। रोहतक में जीत सरकार के कामों व नीतियों की जीत है। इसका कोई और विश्लेषण न करें।
मेयर का सीधा चुनाव कोई रिस्क नहीं था, यह अन्य पद्धतियों से बेहतर है। जींद उपचुनाव फरवरी 2019 तक होने की उम्मीद है, उसे निर्वाचन आयोग को कराना है। ईवीएम में खामी पर सीएम ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग के समक्ष इसमें कोई खामी निकाल ही नहीं पाई। हार हो या जीत, ईवीएम को दोष देना उसका काम हो गया है।